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ममता पलटेंगी बाजी या जीतेंगे शुभेंदु: सियासी टकराव का केंद्र बना नंदीग्राम, हाईप्रोफाइल सीट की इनसाइड स्टोरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Riya Dubey Updated Sat, 11 Apr 2026 03:56 PM IST
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सार

नंदीग्राम सीट 2026 के बंगाल चुनाव में सबसे अहम मुकाबलों में शामिल है। 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था और अब भाजपा यहां संगठनात्मक रूप से मजबूत स्थिति में है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Will Mamata turn the tables or will Suvendu win: Nandigram becomes the epicenter of political conflict
शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में नंदीग्राम सीट एक बार फिर सबसे चर्चित और हाई-स्टेक मुकाबलों में शामिल हो गई है। बदलती राजनीतिक निष्ठा, भाजपा का मजबूत होता संगठन और मतदाता सूची से कथित नाम हटाए जाने (SIR) के आरोपों ने इस सीट को और भी जटिल और दिलचस्प बना दिया है।

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2021 से शुरू हुआ नया राजनीतिक अध्याय

2 मई 2021 की शाम, जब नंदीग्राम के रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर 1,956 वोटों से जीत दिलाने की घोषणा की, तब से यह सीट राज्य की राजनीति का केंद्र बन गई। अधिकारी ने 1.1 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर भाजपा की स्थिति को मजबूत किया, जबकि 2016 में पार्टी यहां कमजोर थी। टीएमसी छोड़कर 19 दिसंबर 2020 को भाजपा में शामिल हुए अधिकारी ने महज तीन महीनों में राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। 2016 से यहां से लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं।

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बदले हालात, भाजपा को बढ़त

पिछले पांच वर्षों में नंदीग्राम में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा काफी मजबूत हुआ है। अब 17 में से 11 ग्राम पंचायतों और दोनों पंचायत समितियों (नंदीग्राम 1 और 2) पर भाजपा का नियंत्रण है, जो 2026 चुनाव में अधिकारी को बड़ी बढ़त देता है। 2024 लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने इस सीट पर बढ़त बनाते हुए 49.49% वोट शेयर और 8,200 वोटों की लीड हासिल की, जबकि टीएमसी को 45.87% वोट मिले।

ममता के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई 

नंदीग्राम ममता बनर्जी के लिए हमेशा प्रतिष्ठा की सीट रही है। 2007 में प्रस्तावित नैनो प्लांट के विरोध में हुए आंदोलन ने उन्हें नई राजनीतिक पहचान दी। इसके बाद 2009 के उपचुनाव में यहां टीएमसी की जीत हुई और यह सीट शुभेंदु अधिकारी परिवार का गढ़ बन गई। हालांकि 2021 में जब शुभेंदु अधिकारी भाजपा में शामिल हुए, तो ममता बनर्जी ने खुद उनके खिलाफ यहां चुनाव लड़कर इस सीट को अपनी साख का सवाल बना लिया।

इस क्षेत्र का है अपना ऐतिहासिक महत्व

नंदीग्राम वही क्षेत्र है, जहां 2007 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन और पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत हुई थी। यही आंदोलन 2011 में ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने का बड़ा कारण बना था।

भूमिपुत्र बनाम भूमिपुत्र मुकाबला

इस बार टीएमसी ने रणनीतिक चाल चलते हुए पवित्र चंद्र कर को उम्मीदवार बनाया है, जो कभी शुभेंदु अधिकारी के करीबी और भाजपा नेता रहे हैं। नामांकन से कुछ घंटे पहले ही टीएमसी में शामिल हुए कर के मैदान में उतरने से मुकाबला स्थानीय बनाम स्थानीय हो गया है। उनकी पत्नी शिउली कर भी टीएमसी में शामिल हो चुकी हैं। हालांकि, कर का अतीत विवादों से भी जुड़ा रहा है, 2021 चुनाव से पहले एक टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या के मामले में वह आरोपी रहे और जेल भी गए।

टीएमसी की वापसी की कोशिश

टीएमसी, जिसने 2009 से 2016 तक यह सीट जीती थी, इस बार इसे वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी खुद इस सीट की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 25 दिनों तक इस सीट की जिम्मेदारी लें, जबकि वह अगले पांच साल की जिम्मेदारी लेंगे। जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए टीएमसी ने सेवा आश्रय कैंप भी लगाए हैं, जहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।

भाजपा का दावा और अंदरूनी खींचतान

शुभेंदु अधिकारी के करीबी और चुनाव प्रबंधन देख रहे प्रलय पाल का दावा है कि टीएमसी को इस बार अपने ही अंदरूनी विवादों का नुकसान उठाना पड़ेगा। उनके अनुसार, पवित्र कर को लेकर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष है, जो चुनाव में असर डाल सकता है। हालांकि, उन्होंने माना कि नंदीग्राम 1 ब्लॉक भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है, जबकि नंदीग्राम 2 में भाजपा को बढ़त मिलती रही है।

एसआईआर को लेकर विवाद 

नंदीग्राम में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर भी विवाद गहराया है। कोलकाता स्थित साबर इंस्टीट्यूट के विश्लेषण के अनुसार, हटाए गए नामों में 95.5% मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि गैर-मुस्लिम केवल 4.5% हैं। इसे लेकर पक्षपात और तकनीक के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं।

अन्य खिलाड़ी भी मैदान में

वामपंथी दलों ने भी इस बार रणनीति बदली है। सीपीआई एम की बजाय सीपीआई ने शांति गिरी को उम्मीदवार बनाया है, हालांकि 2021 में वाम दलों का प्रदर्शन यहां बेहद कमजोर रहा था। नंदीग्राम में मतदान 23 अप्रैल को पहले चरण में होना है।

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