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Haryana: छात्राओं को मुर्गा बनाकर घुमाने के मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त, मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:26 PM IST
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सार
आयोग ने साफ कहा कि स्कूलों में अनुशासन के नाम पर किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता। छात्राओं को सार्वजनिक रूप से इस तरह अपमानित करना उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने हिसार के अग्रोहा ब्लॉक के गांव जगान स्थित सरकारी उच्च विद्यालय में छात्राओं को अपमानजनक सजा देने की घटना को गंभीरता से लिया है। आयोग के अनुसार यह मामला 7 मार्च 2026 को एक समाचार रिपोर्ट के माध्यम से सामने आया था। रिपोर्ट में बताया गया कि स्कूल में कुछ छात्राओं को मुर्गा बनाकर पूरे परिसर में घुमाया गया। इस घटना के तीन वीडियो भी सामने आए हैं, जिन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में ई-मेल से भेजा गया है।
वीडियो सामनेआने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह छात्राओं की गरिमा, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
आयोग ने साफ कहा कि स्कूलों में अनुशासन के नाम पर किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता। छात्राओं को सार्वजनिक रूप से इस तरह अपमानित करना उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है और यह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की भावना के भी खिलाफ है।
आयोग ने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल दिया जाए। इस तरह की घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं और शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर करती हैं।
मामले की जांच के लिए आयोग ने हिसार के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले आयोग के सामने पेश की जाएं।
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वीडियो सामनेआने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह छात्राओं की गरिमा, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
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आयोग ने साफ कहा कि स्कूलों में अनुशासन के नाम पर किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता। छात्राओं को सार्वजनिक रूप से इस तरह अपमानित करना उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है और यह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की भावना के भी खिलाफ है।
आयोग ने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल दिया जाए। इस तरह की घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं और शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर करती हैं।
मामले की जांच के लिए आयोग ने हिसार के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले आयोग के सामने पेश की जाएं।