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CDSCO के नए दिशानिर्देश: अब दवाओं के लाइसेंस के लिए डोजियर प्रणाली का पालन जरूरी, सुनिश्चित होगी गुणवत्ता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Thu, 19 Mar 2026 05:17 PM IST
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सार
सीडीसीएसओ ने दवा निर्माण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को दस्तावेज-आधारित बनाकर देशभर में गुणवत्ता और प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस प्रणाली में आवेदन को दो हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें कंपनी और संयंत्र से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ उत्पाद से संबंधित परीक्षण और प्रमाणपत्र शामिल हैं। पढ़िए रिपोर्ट-
दवाएं (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दवा निर्माण लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए दस्तावेज- आधारित प्रणाली (डोजियर) लागू करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। इसका मकसद देशभर में दवाओं की गुणवत्ता और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
पिछले महीने जारी इस दस्तावेज में दवा निर्माताओं के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक व्यवस्थित सूची दी गई, जिसमें प्रशासनिक और तकनीकी दोनों तरह की आवश्यकताएं शामिल हैं। यह नियम दवा बनाने वाली कंपनियों पर लागू होगा, लेकिन आयुष दवाओं, प्रसाधन सामग्री और चिकित्सा उपकरणों को इससे बाहर रखा गया है।
नियामक अब आवेदन का मूल्यांकन कैसे करेंगे?
दिशानिर्देश के अनुसार, दस्तावेज-आधारित प्रक्रिया के तहत नियामक अब आवेदन का व्यापक और व्यवस्थित तरीके से मूल्यांकन कर सकेंगे, जिसमें परीक्षण रिपोर्ट, प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल होंगे, न कि अलग-अलग आधार पर जांच होगी।
क्यों है यह प्रक्रिया प्रभावी और पारदर्शी?
इनमें कहा गया है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाती है और फैसले लेने में निष्पक्षता सुनिश्चित करती है। डोजियर आधारित प्रणाली व्यक्तिगत मूल्यांकन की तुलना में ज्यादा प्रभावी है, क्योंकि इससे प्रक्रिया आसान होती है और कई बार जांच की जरूरत कम हो जाती है। यह तरीका खासतौर पर तब उपयोगी है, जब एक समान और निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी हो।
यह पहल कब और क्यों शुरू हुई?
यह पहल दवाओं पर सलाहकार समिति की 61वीं बैठक में हुई चर्चा के बाद शुरू की गई है। बैठक में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई थी और नियमों को पूरे देश में समान रूप से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
ये भी पढ़ें: ADR रिपोर्ट: राज्यसभा के 73 सांसदों पर आपराधिक केस, 14% अरबपति, दो के पास 5000 करोड़ से ज्यादा संपत्ति
डोजियर प्रणाली में क्या शामिल है?
समिति ने देशभर में दवाओं के लाइसेंस के लिए डोजियर प्रणाली लागू करने की सिफारिश की थी और इसके लिए एक मानकीकृत सूची अपनाने पर जोर दिया था। दिशानिर्देश के अनुसार, आवेदन को दो हिस्सों में बांटा गया है। भाग-ए में कंपनी और उसके संयंत्र से जुड़ी जानकारी जैसे साइट योजना, कर्मचारियों की योग्यता और नियामक मंजूरी शामिल है, जबकि भाग-बी में उत्पाद से संबंधित जानकारी जैसे स्थिरता परीक्षण, प्रक्रिया सत्यापन और जैव-समानता परीक्षण (बायोइक्विवेलेंस) रिपोर्ट शामिल हैं।
नियामक प्रणाली को क्या फायदा होगा?
अधिकारियों के मुताबिक, यह चेकलिस्ट नियामक प्रणाली में भरोसा और स्थिरता लाने में मदद करेगी और आवेदकों तथा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून और नियम, 1945 के पालन में सहायक होगी। सभी राज्यों के नियामकों ने इस प्रणाली को लागू करने पर सहमति जताई है।
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पिछले महीने जारी इस दस्तावेज में दवा निर्माताओं के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक व्यवस्थित सूची दी गई, जिसमें प्रशासनिक और तकनीकी दोनों तरह की आवश्यकताएं शामिल हैं। यह नियम दवा बनाने वाली कंपनियों पर लागू होगा, लेकिन आयुष दवाओं, प्रसाधन सामग्री और चिकित्सा उपकरणों को इससे बाहर रखा गया है।
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नियामक अब आवेदन का मूल्यांकन कैसे करेंगे?
दिशानिर्देश के अनुसार, दस्तावेज-आधारित प्रक्रिया के तहत नियामक अब आवेदन का व्यापक और व्यवस्थित तरीके से मूल्यांकन कर सकेंगे, जिसमें परीक्षण रिपोर्ट, प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल होंगे, न कि अलग-अलग आधार पर जांच होगी।
क्यों है यह प्रक्रिया प्रभावी और पारदर्शी?
इनमें कहा गया है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाती है और फैसले लेने में निष्पक्षता सुनिश्चित करती है। डोजियर आधारित प्रणाली व्यक्तिगत मूल्यांकन की तुलना में ज्यादा प्रभावी है, क्योंकि इससे प्रक्रिया आसान होती है और कई बार जांच की जरूरत कम हो जाती है। यह तरीका खासतौर पर तब उपयोगी है, जब एक समान और निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी हो।
यह पहल कब और क्यों शुरू हुई?
यह पहल दवाओं पर सलाहकार समिति की 61वीं बैठक में हुई चर्चा के बाद शुरू की गई है। बैठक में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई थी और नियमों को पूरे देश में समान रूप से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
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डोजियर प्रणाली में क्या शामिल है?
समिति ने देशभर में दवाओं के लाइसेंस के लिए डोजियर प्रणाली लागू करने की सिफारिश की थी और इसके लिए एक मानकीकृत सूची अपनाने पर जोर दिया था। दिशानिर्देश के अनुसार, आवेदन को दो हिस्सों में बांटा गया है। भाग-ए में कंपनी और उसके संयंत्र से जुड़ी जानकारी जैसे साइट योजना, कर्मचारियों की योग्यता और नियामक मंजूरी शामिल है, जबकि भाग-बी में उत्पाद से संबंधित जानकारी जैसे स्थिरता परीक्षण, प्रक्रिया सत्यापन और जैव-समानता परीक्षण (बायोइक्विवेलेंस) रिपोर्ट शामिल हैं।
नियामक प्रणाली को क्या फायदा होगा?
अधिकारियों के मुताबिक, यह चेकलिस्ट नियामक प्रणाली में भरोसा और स्थिरता लाने में मदद करेगी और आवेदकों तथा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून और नियम, 1945 के पालन में सहायक होगी। सभी राज्यों के नियामकों ने इस प्रणाली को लागू करने पर सहमति जताई है।