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Jhajjar-Bahadurgarh News: सफल उद्यमी बनकर 60 लोगों को दे रहीं रोजगार
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फोटो-54: निकिता गुलाटी।
- फोटो : rajori news
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बहादुरगढ़। सेक्टर-6 निवासी 54 वर्षीय निकिता गुलाटी ने सफल उद्यमी बनकर महिला सशक्तीकरण का उदाहरण पेश किया है। जॉब वर्क और इसके बाद एक करोड़ के टर्न ओवर से शुरू हुई उनकी फैक्टरी का टर्नओवर करीब 12 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। आज वह 60 लोगों को रोजगार दे रही हैं।
अंग्रेजी में पीजी करने के बाद निकिता की शादी वर्ष 1994 में दिल्ली निवासी बिजेंद्र गुलाटी से हुई थी। इसके बाद उन्होंने एक साल का डिजाइनिंग कोर्स किया और 1997 में पैकेजिंग डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम शुरू किया। तीन साल के बेटे को सास-ससुर के भरोसे छोड़कर उन्होंने डिजाइनिंग का काम सीखा था।
शुरुआत जॉब वर्क से हुई लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था। एक क्लाइंट संजीव मल्होत्रा की प्रेरणा और सहयोग से दिल्ली के मायापुरी में किराये पर 400 वर्ग गज में फैक्टरी शुरू की और डिजाइनिंग के साथ पैकेजिंग का काम भी शुरू किया।
निकिता को कई बार दिन में केवल 3-4 घंटे ही नींद मिल पाती थी। छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल, उनकी पढ़ाई और फैक्टरी का काम, सब कुछ उन्होंने संतुलन के साथ संभाला। इस दौरान उनके पति, सास-ससुर का पूरा सहयोग मिला लेकिन काम की जिम्मेदारी उन्होंने खुद ही निभाई।
वर्ष 2006 में परिवार के साथ बहादुरगढ़ आने के बाद चुनौतियां बढ़ गईं। दिल्ली आना-जाना मुश्किल होने लगा। पति का भी पूरा साथ मिला तो बहादुरगढ़ के ही एमआईई पार्ट-बी में किराये पर फैक्टरी लेकर काम को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया।
वर्ष 2017 में उन्होंने ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में एक एकड़ में फैक्टरी किराये पर ले ली। निकिता बताती हैं कि आज उनके पास 60 कर्मचारी हैं। शुरुआत में केवल 20 कर्मचारी थे।
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अंग्रेजी में पीजी करने के बाद निकिता की शादी वर्ष 1994 में दिल्ली निवासी बिजेंद्र गुलाटी से हुई थी। इसके बाद उन्होंने एक साल का डिजाइनिंग कोर्स किया और 1997 में पैकेजिंग डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम शुरू किया। तीन साल के बेटे को सास-ससुर के भरोसे छोड़कर उन्होंने डिजाइनिंग का काम सीखा था।
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शुरुआत जॉब वर्क से हुई लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था। एक क्लाइंट संजीव मल्होत्रा की प्रेरणा और सहयोग से दिल्ली के मायापुरी में किराये पर 400 वर्ग गज में फैक्टरी शुरू की और डिजाइनिंग के साथ पैकेजिंग का काम भी शुरू किया।
निकिता को कई बार दिन में केवल 3-4 घंटे ही नींद मिल पाती थी। छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल, उनकी पढ़ाई और फैक्टरी का काम, सब कुछ उन्होंने संतुलन के साथ संभाला। इस दौरान उनके पति, सास-ससुर का पूरा सहयोग मिला लेकिन काम की जिम्मेदारी उन्होंने खुद ही निभाई।
वर्ष 2006 में परिवार के साथ बहादुरगढ़ आने के बाद चुनौतियां बढ़ गईं। दिल्ली आना-जाना मुश्किल होने लगा। पति का भी पूरा साथ मिला तो बहादुरगढ़ के ही एमआईई पार्ट-बी में किराये पर फैक्टरी लेकर काम को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया।
वर्ष 2017 में उन्होंने ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में एक एकड़ में फैक्टरी किराये पर ले ली। निकिता बताती हैं कि आज उनके पास 60 कर्मचारी हैं। शुरुआत में केवल 20 कर्मचारी थे।