{"_id":"696401e4d790d1c13108103f","slug":"monika-mann-from-bahadurgarh-is-giving-haryanvi-culture-a-global-identity-bahadurgarh-news-c-200-1-bgh1005-120230-2026-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: बहादुरगढ़ की मोनिका मान दिला रही हरियाणवी संस्कृति को वैश्विक पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: बहादुरगढ़ की मोनिका मान दिला रही हरियाणवी संस्कृति को वैश्विक पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:32 AM IST
विज्ञापन
फोटो-57: बहादुरगढ़ निवासी मोनिका मान द्वारा बनाई गई हरियाणवी पोशाक पहने विदेशी महिला। स्त्रोत सो
विज्ञापन
बहादुरगढ़। समय के साथ बाजार से लगभग गायब हो चुकी हरियाणा की मिट्टी से जुड़ी हरियाणवी पारंपरिक पोशाक एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन रही है। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पीछे महिला उद्यमी मोनिका मान की मेहनत, शोध और दूरदृष्टि है।
मकर संक्रांति जैसे लोक पर्वों में हरियाणवी दामन, कुर्ती और चुन्नी की जबरदस्त मांग होती है। कोरोना महामारी में जब रोजगार के साधन सीमित हो गए तो मोनिका मान ने हरियाणवी पोशाक को फिर जीवित करने का संकल्प लिया।
लगभग 50 वर्षों से लुप्त हो रही हरियाणा की पारंपरिक पोशाक को दोबारा चलन में लाने की शुरुआत दो-तीन महिलाओं के साथ शुरू हुई। यह प्रयास आज 15 से 20 महिलाओं के मजबूत स्वयं सहायता समूह का रूप ले चुका है।
इस समूह द्वारा बनाए जा रहे दामन, कुर्ती और चुन्नी न केवल पारंपरिक रंगों और डिजाइनों से सजे होते हैं बल्कि इनमें हरियाणवी लोक संस्कृति, त्योहारों और ग्रामीण जीवन की झलक भी साफ दिखाई देती है।
लोक पर्वों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्कूल आयोजनों में भी हरियाणवी पोशाक की विशेष मांग सामने आ रही है। मोनिका मान बताती हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया तब बाजार में प्रामाणिक हरियाणवी पोशाक कहीं उपलब्ध ही नहीं थी।
कारीगरों की कमी, संसाधनों का अभाव और बाजार की अनिश्चितताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार शोध और पारंपरिक कढ़ाई व सिलाई तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मूल स्वरूप को बनाए रखा।
आज यह हरियाणवी पोशाक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंच रही है। विदेशी ग्राहक भी हरियाणवी संस्कृति से जुड़ी इस अनूठी पहचान को उत्साह से अपना रहे हैं।
साहित्यकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी बताते हैं कि मकर संक्रांति के साथ बढ़ती मांग ने यह साबित कर दिया है कि हरियाणवी संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है, बस उसे सही मंच और पहचान देने की जरूरत है।
Trending Videos
मकर संक्रांति जैसे लोक पर्वों में हरियाणवी दामन, कुर्ती और चुन्नी की जबरदस्त मांग होती है। कोरोना महामारी में जब रोजगार के साधन सीमित हो गए तो मोनिका मान ने हरियाणवी पोशाक को फिर जीवित करने का संकल्प लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
लगभग 50 वर्षों से लुप्त हो रही हरियाणा की पारंपरिक पोशाक को दोबारा चलन में लाने की शुरुआत दो-तीन महिलाओं के साथ शुरू हुई। यह प्रयास आज 15 से 20 महिलाओं के मजबूत स्वयं सहायता समूह का रूप ले चुका है।
इस समूह द्वारा बनाए जा रहे दामन, कुर्ती और चुन्नी न केवल पारंपरिक रंगों और डिजाइनों से सजे होते हैं बल्कि इनमें हरियाणवी लोक संस्कृति, त्योहारों और ग्रामीण जीवन की झलक भी साफ दिखाई देती है।
लोक पर्वों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्कूल आयोजनों में भी हरियाणवी पोशाक की विशेष मांग सामने आ रही है। मोनिका मान बताती हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया तब बाजार में प्रामाणिक हरियाणवी पोशाक कहीं उपलब्ध ही नहीं थी।
कारीगरों की कमी, संसाधनों का अभाव और बाजार की अनिश्चितताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार शोध और पारंपरिक कढ़ाई व सिलाई तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मूल स्वरूप को बनाए रखा।
आज यह हरियाणवी पोशाक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंच रही है। विदेशी ग्राहक भी हरियाणवी संस्कृति से जुड़ी इस अनूठी पहचान को उत्साह से अपना रहे हैं।
साहित्यकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी बताते हैं कि मकर संक्रांति के साथ बढ़ती मांग ने यह साबित कर दिया है कि हरियाणवी संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है, बस उसे सही मंच और पहचान देने की जरूरत है।

फोटो-57: बहादुरगढ़ निवासी मोनिका मान द्वारा बनाई गई हरियाणवी पोशाक पहने विदेशी महिला। स्त्रोत सो

फोटो-57: बहादुरगढ़ निवासी मोनिका मान द्वारा बनाई गई हरियाणवी पोशाक पहने विदेशी महिला। स्त्रोत सो

फोटो-57: बहादुरगढ़ निवासी मोनिका मान द्वारा बनाई गई हरियाणवी पोशाक पहने विदेशी महिला। स्त्रोत सो

फोटो-57: बहादुरगढ़ निवासी मोनिका मान द्वारा बनाई गई हरियाणवी पोशाक पहने विदेशी महिला। स्त्रोत सो