{"_id":"6ab029c48b0169c4e5098d84","slug":"age-was-no-barrier-to-dropping-out-of-school-2903-adults-took-the-literacy-test-jind-news-c-199-1-sroh1009-160665-2026-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: पढ़ाई छूटी तो उम्र नहीं बनी बाधा, 2903 वयस्कों ने दी साक्षरता की परीक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: पढ़ाई छूटी तो उम्र नहीं बनी बाधा, 2903 वयस्कों ने दी साक्षरता की परीक्षा
विज्ञापन
20जेएनडी30, 31- परीक्षा केंद्रों में उल्लास की परीक्षा देते हुए बुजुर्ग। संवाद
जींद। पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती। इसका उदाहरण रविवार को जिले में देखने को मिला। रविवार को जिले में स्कूली शिक्षा से वंचित रहे 15 वर्ष से अधिक आयु के 2903 वयस्कों ने उल्लास कार्यक्रम के तहत उल्लास की परीक्षा दी।
जिलेभर में इसके लिए 226 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से दोगुने से भी अधिक रही। कुल परीक्षार्थियों में 2043 महिलाएं और 860 पुरुष शामिल हुए।
उल्लास परीक्षा का उद्देश्य उन वयस्कों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है जो किसी कारणवश स्कूली शिक्षा हासिल नहीं कर सके। परीक्षा के जरिये उनके पढ़ने-लिखने के साथ रोजमर्रा के जीवन में जरूरी बुनियादी ज्ञान का आकलन किया गया।
विज्ञापन
परीक्षार्थियों को घर का हिसाब-किताब रखने, टिकट लेने, नाप-तौल समझने और बैंक में हस्ताक्षर करने जैसी दैनिक जरूरतों में सक्षम बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
150 अंकों की हुई परीक्षा
उल्लास की परीक्षा 150 अंकों की होती है। सफल होने के लिए परीक्षार्थी को कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। परीक्षा परिणाम करीब एक महीने बाद जारी होने की उम्मीद है। सफल परीक्षार्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की ओर से बुनियादी साक्षरता का प्रमाणपत्र दिया जाएगा। उल्लास योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिशों के अनुरूप वयस्कों को साक्षर बनाने के साथ उन्हें जीवनभर सीखने के अवसरों से जोड़ने पर केंद्रित है।
बॉक्स
उल्लास योजना कार्यक्रम का उद्देश्य नवसाक्षरों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि योजना से बुजुर्गों के दैनिक जीवन में भी बदलाव आया है। -आनंद सहारण, जिला नोडल अधिकारी जींद।
विज्ञापन
जिलेभर में इसके लिए 226 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से दोगुने से भी अधिक रही। कुल परीक्षार्थियों में 2043 महिलाएं और 860 पुरुष शामिल हुए।
विज्ञापन
उल्लास परीक्षा का उद्देश्य उन वयस्कों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है जो किसी कारणवश स्कूली शिक्षा हासिल नहीं कर सके। परीक्षा के जरिये उनके पढ़ने-लिखने के साथ रोजमर्रा के जीवन में जरूरी बुनियादी ज्ञान का आकलन किया गया।
विज्ञापन
परीक्षार्थियों को घर का हिसाब-किताब रखने, टिकट लेने, नाप-तौल समझने और बैंक में हस्ताक्षर करने जैसी दैनिक जरूरतों में सक्षम बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
150 अंकों की हुई परीक्षा
उल्लास की परीक्षा 150 अंकों की होती है। सफल होने के लिए परीक्षार्थी को कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। परीक्षा परिणाम करीब एक महीने बाद जारी होने की उम्मीद है। सफल परीक्षार्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की ओर से बुनियादी साक्षरता का प्रमाणपत्र दिया जाएगा। उल्लास योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिशों के अनुरूप वयस्कों को साक्षर बनाने के साथ उन्हें जीवनभर सीखने के अवसरों से जोड़ने पर केंद्रित है।
बॉक्स
उल्लास योजना कार्यक्रम का उद्देश्य नवसाक्षरों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि योजना से बुजुर्गों के दैनिक जीवन में भी बदलाव आया है। -आनंद सहारण, जिला नोडल अधिकारी जींद।

20जेएनडी30, 31- परीक्षा केंद्रों में उल्लास की परीक्षा देते हुए बुजुर्ग। संवाद