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गौरांग दास प्रभु: प्रतिभा दरवाजा खोलती है, लेकिन अभ्यास उत्कृष्टता की नींव रखता है
Fri, 14 Aug 2026 12:55 AM IST
Heera
रोहतक ब्यूरो
रोहतक ब्यूरो
Published by: Heera
Updated Fri, 14 Aug 2026 12:55 AM IST
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गौरांग दास प्रभु
- फोटो : ani
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अक्सर यह सवाल उठता है कि एक असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले और केवल एक प्रतिभाशाली व्यक्ति में क्या बड़ा अंतर होता है? प्रसिद्ध विचारक गौरांग दास प्रभु ने इसका सटीक उत्तर दिया है। उनके अनुसार, किसी भी बड़ी सफलता का रहस्य केवल प्राकृतिक प्रतिभा में नहीं, बल्कि कड़े अनुशासन, दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास करने की इच्छाशक्ति में छिपा है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की जीवन-यात्रा का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है।
निरंतर अभ्यास है सफलता की असली कुंजी
अरविंद माफतलाल ग्रुप द्वारा आयोजित लिगेसी लीडर्स कार्यक्रम में बातचीत के दौरान गौरांग दास प्रभु ने बताया कि वैभव सूर्यवंशी ने मात्र चार वर्ष की आयु में क्रिकेट के मैदान में कदम रख दिया था। पिछले एक दशक से उनके द्वारा किया जा रहा कड़ा अभ्यास इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सिर्फ जन्मजात हुनर ही सब कुछ नहीं होता। किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक प्रतिभा आपको केवल एक शुरुआती बढ़त दे सकती है, लेकिन उस प्रतिभा को उसकी वास्तविक और अधिकतम क्षमता तक ले जाने का काम निरंतर प्रयास और अटूट प्रतिबद्धता ही करती है।
'रातों-रात सफलता' महज एक भ्रम
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने 'रातों-रात सफलता' के भ्रम को भी तोड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया को किसी भी व्यक्ति की सफलता भले ही अचानक मिली हुई लगती हो, लेकिन उस एक पल की उपलब्धि के पीछे वर्षों का भारी त्याग, अनगिनत घंटों का पसीना और असफलताओं से मिली सीख की एक लंबी प्रक्रिया छिपी होती है। मैदान पर अपनी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें सुधारना और विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहना ही एक खिलाड़ी की महानता तय करता है। लगातार अभ्यास से व्यक्ति के भीतर न केवल कौशल, बल्कि धैर्य और हमेशा सीखते रहने की मानसिकता का भी विकास होता है।
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आज के युवाओं के लिए प्रासंगिक संदेश
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जब युवा बहुत जल्दी परिणाम और 'शॉर्टकट' के जरिए सफलता की तलाश में रहते हैं, तब गौरांग दास प्रभु का यह विचार बेहद प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने सफलता को केवल मेडल, खेल के रिकॉर्ड या प्रसिद्धि तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे जीवन के उच्च मूल्यों और सही उद्देश्यों के साथ जोड़ा है। उनके अनुसार, सच्ची सफलता वह लंबी यात्रा है जहाँ व्यक्ति अपने हुनर के साथ-साथ अपने चरित्र का भी निर्माण करता है।
युवा वर्ग के लिए यह स्पष्ट संदेश है- अवसर मिलना केवल एक शुरुआत हो सकती है, लेकिन उसे किसी ऐतिहासिक उपलब्धि में बदलने के लिए जी-तोड़ मेहनत अनिवार्य है। प्रतिभा आपके लिए सफलता का दरवाजा जरूर खोल सकती है, लेकिन उस दरवाज़े को पार कर उत्कृष्टता के शिखर तक पहुंचने के लिए कठोर अनुशासन और जीवन भर सीखते रहने की प्रबल इच्छाशक्ति सबसे जरूरी है।
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निरंतर अभ्यास है सफलता की असली कुंजी
अरविंद माफतलाल ग्रुप द्वारा आयोजित लिगेसी लीडर्स कार्यक्रम में बातचीत के दौरान गौरांग दास प्रभु ने बताया कि वैभव सूर्यवंशी ने मात्र चार वर्ष की आयु में क्रिकेट के मैदान में कदम रख दिया था। पिछले एक दशक से उनके द्वारा किया जा रहा कड़ा अभ्यास इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सिर्फ जन्मजात हुनर ही सब कुछ नहीं होता। किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक प्रतिभा आपको केवल एक शुरुआती बढ़त दे सकती है, लेकिन उस प्रतिभा को उसकी वास्तविक और अधिकतम क्षमता तक ले जाने का काम निरंतर प्रयास और अटूट प्रतिबद्धता ही करती है।
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'रातों-रात सफलता' महज एक भ्रम
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने 'रातों-रात सफलता' के भ्रम को भी तोड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया को किसी भी व्यक्ति की सफलता भले ही अचानक मिली हुई लगती हो, लेकिन उस एक पल की उपलब्धि के पीछे वर्षों का भारी त्याग, अनगिनत घंटों का पसीना और असफलताओं से मिली सीख की एक लंबी प्रक्रिया छिपी होती है। मैदान पर अपनी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें सुधारना और विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहना ही एक खिलाड़ी की महानता तय करता है। लगातार अभ्यास से व्यक्ति के भीतर न केवल कौशल, बल्कि धैर्य और हमेशा सीखते रहने की मानसिकता का भी विकास होता है।
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आज के युवाओं के लिए प्रासंगिक संदेश
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जब युवा बहुत जल्दी परिणाम और 'शॉर्टकट' के जरिए सफलता की तलाश में रहते हैं, तब गौरांग दास प्रभु का यह विचार बेहद प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने सफलता को केवल मेडल, खेल के रिकॉर्ड या प्रसिद्धि तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे जीवन के उच्च मूल्यों और सही उद्देश्यों के साथ जोड़ा है। उनके अनुसार, सच्ची सफलता वह लंबी यात्रा है जहाँ व्यक्ति अपने हुनर के साथ-साथ अपने चरित्र का भी निर्माण करता है।
युवा वर्ग के लिए यह स्पष्ट संदेश है- अवसर मिलना केवल एक शुरुआत हो सकती है, लेकिन उसे किसी ऐतिहासिक उपलब्धि में बदलने के लिए जी-तोड़ मेहनत अनिवार्य है। प्रतिभा आपके लिए सफलता का दरवाजा जरूर खोल सकती है, लेकिन उस दरवाज़े को पार कर उत्कृष्टता के शिखर तक पहुंचने के लिए कठोर अनुशासन और जीवन भर सीखते रहने की प्रबल इच्छाशक्ति सबसे जरूरी है।