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Jind News: दूसरा अध्याय नाटक ने दर्शकों को किया आत्ममंथन के लिए प्रेरित
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29जेएनडी03-दीवान रंगशाला में हुए दूसरा अध्याय नाटक में मंचन करते कलाकार। स्रोत संगठन
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जींद। शैडो चिल्ड्रेन रिसर्च सेंटर फॉर थिएटर और संस्कार भारती इकाई के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा कला परिषद के सहयोग से दीवान रंगशाला में चल रहे जयंती नाट्य समारोह के अंतिम दिन बुधवार को हिंदी नाटक दूसरा अध्याय हुआ। इसमें मुख्य अतिथि भाजपा युवा नेता रुद्राक्ष मिड्ढा रहे।
नाटक में दिखाया गया कि दूसरा अध्याय नाटक एक महिला नीरजा की भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है जो एक साधारण कामकाजी महिला है और विवाह की सीमाओं से परे अपनी आंतरिक चाहत का सामना करने का साहस करती है।
मद्रास में एक प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात अभय से होती है जो एक निडर और भावनात्मक रूप से संवेदनशील व्यक्ति है। हालांकि नीरजा पहले से विवाहित है। फिर भी उसे अभय में कोई ऐसा मिलता है जो उसे गहराई से समझता है।
समारोह की अध्यक्षता मोतीलाल स्कूल के प्राचार्य रविंदर कुमार ने की। उन्होंने बताया कि यह नाटक दूसरा अध्याय प्रेम, सामाजिक नैतिकता, मानवीय संवेदनशीलता, परिस्थितियों और कल्पना को खोजता है।
विशिष्ट अतिथि नवीन कुमार दहिया ने कहा कि इसकी प्रस्तुतियां आदमी को खुद को सोचने पर मजबूर कर देती है। आदमी अपने जीवन के साथ इन कहानियों को जोड़ता है और कुछ सीख लेकर जाता है। यह नाटक प्रेम, नैतिकता, जिम्मेदारी और इस बात पर गहरे सवाल उठाता है कि क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या परिस्थितियों से संचालित होता है।
नाटक के निर्देशक शिवम राय और परिकल्पना डाॅ. अजय कुमार शर्मा की रही। इस अवसर पर डाॅ. रवजोत कौर, डाॅ. अजय कुमार शर्मा, आयुष सरल, मंजू मानव, डाॅ. सुरेश जैन, रमेंद्र सिंह, हिमानी गुप्ता, दीपक कौशिक, ओमप्रकाश चौहान, जितेंद्र अहलावत और अंकित शर्मा, शकुंतला, काजल रानी, सोनिया, हसन, जितेंद्र पाल, रमेश मूर्ति, अधिवक्ता घनश्याम गोयल, सुनील वशिष्ठ, सुभाष ढिगाना और डाॅ. हनीफ भट्टी मौजूद रहे।
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नाटक में दिखाया गया कि दूसरा अध्याय नाटक एक महिला नीरजा की भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है जो एक साधारण कामकाजी महिला है और विवाह की सीमाओं से परे अपनी आंतरिक चाहत का सामना करने का साहस करती है।
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मद्रास में एक प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात अभय से होती है जो एक निडर और भावनात्मक रूप से संवेदनशील व्यक्ति है। हालांकि नीरजा पहले से विवाहित है। फिर भी उसे अभय में कोई ऐसा मिलता है जो उसे गहराई से समझता है।
समारोह की अध्यक्षता मोतीलाल स्कूल के प्राचार्य रविंदर कुमार ने की। उन्होंने बताया कि यह नाटक दूसरा अध्याय प्रेम, सामाजिक नैतिकता, मानवीय संवेदनशीलता, परिस्थितियों और कल्पना को खोजता है।
विशिष्ट अतिथि नवीन कुमार दहिया ने कहा कि इसकी प्रस्तुतियां आदमी को खुद को सोचने पर मजबूर कर देती है। आदमी अपने जीवन के साथ इन कहानियों को जोड़ता है और कुछ सीख लेकर जाता है। यह नाटक प्रेम, नैतिकता, जिम्मेदारी और इस बात पर गहरे सवाल उठाता है कि क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या परिस्थितियों से संचालित होता है।
नाटक के निर्देशक शिवम राय और परिकल्पना डाॅ. अजय कुमार शर्मा की रही। इस अवसर पर डाॅ. रवजोत कौर, डाॅ. अजय कुमार शर्मा, आयुष सरल, मंजू मानव, डाॅ. सुरेश जैन, रमेंद्र सिंह, हिमानी गुप्ता, दीपक कौशिक, ओमप्रकाश चौहान, जितेंद्र अहलावत और अंकित शर्मा, शकुंतला, काजल रानी, सोनिया, हसन, जितेंद्र पाल, रमेश मूर्ति, अधिवक्ता घनश्याम गोयल, सुनील वशिष्ठ, सुभाष ढिगाना और डाॅ. हनीफ भट्टी मौजूद रहे।
