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परीक्षा में कम अंक आने से भविष्य तय नहीं होता : डॉ. सुमिता

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 12:12 AM IST
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Scoring low marks in exams does not determine one's future: Dr. Sumita
29जेएनडी25: डॉ. सुमिता आसरी प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय में परीक्षा के तनाव को - फोटो : घटना के बाद दहौरा गांव में बिलखते परिजन।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। महिला प्रकोष्ठ अधिकारी डॉ. सुमिता आसरी ने कहा कि परीक्षा जीवन का एक छोटा सा हिस्सा है लेकिन कई बार विद्यार्थी इसे सब कुछ मान लेेते हैं। परीक्षा में कम अंक आने के डर से कुछ विद्यार्थी गलत कदम उठा लेते हैं। किसी एक विषय में कम अंक आना असफलता नहीं बल्कि यह आगे बेहतर करने का अवसर देता है।
यह बात उन्होंने प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय में बुधवार को आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में कही।डॉ. सुमिता ने परीक्षा के दौरान तनाव से बचने और आत्मविश्वास बनाए रखने के टिप्स दिए।
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उन्होंने सलाह दी कि पढ़ाई योजनाबद्ध तरीके से करें। नियमित अध्ययन करें। परीक्षा से पहले सभी महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम दोहराएं। समय प्रबंधन, मानसिक संतुलन को सफलता की कुंजी बनाएं। उन्होंने कहा कि मानसिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है जितना पढ़ाई करना।
पेपर अच्छा न जाए तो तनाव कैसे कम करें
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने खुलकर सवाल पूछे। बीए अंतिम वर्ष की छात्रा स्वीटी ने पूछा कि यदि तैयारी के बावजूद पेपर अच्छा न जाए तो तनाव कैसे कम करें। इस पर डॉ. आसरी ने जवाब दिया कि एक पेपर खराब होने का असर बाकी पेपरों पर नहीं पड़ने देना चाहिए और तुरंत अगले विषय की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए।

आत्मविश्वास को सबसे बड़ा हथियार बनाए और खुद पर भरोसा रखें

बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा सबाना ने पूछा, परीक्षा के दौरान घबराहट को कैसे नियंत्रित किया जाए। जवाब में डॉ. आसरी ने सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए खुद पर भरोसा रखने की सलाह दी।

अभिभावकों से खुलकर संवाद करें और अपनी स्थिति समझाएं

बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा रामभतेरी ने परीक्षा में कम अंक आने पर परिवार के दबाव को लेकर सवाल पूछा। इस पर डॉ. आसरी ने कहा कि अभिभावकों से खुलकर संवाद करें और उन्हें अपनी स्थिति समझाएं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे कई अवसर मिलते हैं जहां खुद को साबित किया जा सकता है।
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