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Kaithal News: 14 साल बाद स्वास्थ्य विभाग कैथल को मिलेंगे 10 नए रेडिएंट वार्मर
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जिला नागरिक अस्पताल में रखा रेडियंट वार्मर। संवाद
कैथल। नवजात बच्चों को जन्म के बाद ठंड से बचाने और उनके शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग को 10 नए रेडिएंट वार्मर मिलेंगे। एक रेडिएंट वार्मर की कीमत 57,750 रुपये है। जिले में वर्ष 2012 में करीब 34 रेडिएंट वार्मर खरीदे गए थे। इसके बाद करीब 14 साल में नए उपकरणों की खरीद नहीं हुई। पुराने उपकरणों में से ज्यादातर जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। ऐसे में अस्पतालों में दान में मिले वार्मर के सहारे काम चलाया जा रहा है। नए उपकरण मिलने से जिला नागरिक अस्पताल में पुराने वार्मर को बदला जा सकेगा।
जिला नागरिक अस्पताल में फिलहाल 14 रेडिएंट वार्मर उपलब्ध हैं। इनमें कुछ उपकरण दान में मिले हैं और नए हैं। इनका इस्तेमाल नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में किया जाता है। जिले में जिला स्तर के अस्पताल के अलावा अन्य जगहों पर एसएनसीयू और बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता नहीं होने से दूसरे स्थानों पर रखे गए कई वार्मर इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में नए मिलने वाले सभी 10 उपकरणों का इस्तेमाल जिला नागरिक अस्पताल में पुराने वार्मर को बदलने के लिए किए जाने की योजना है।
समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए जरूरी है वार्मर
रेडिएंट वार्मर एक विशेष चिकित्सा उपकरण है, जो ऊपर लगे हीटिंग सिस्टम के माध्यम से नवजात शिशु को गर्माहट देता है। जन्म के तुरंत बाद बच्चे का शरीर तापमान नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता। समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले या शरीर का तापमान कम होने की आशंका वाले बच्चों को इसकी विशेष जरूरत पड़ती है। ऐसे बच्चों को ठंड लगने से शरीर का तापमान गिर सकता है जिससे उनकी स्थिति गंभीर होने का खतरा रहता है।
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वार्मर के नीचे बच्चे को खुले बिस्तर पर लिटाया जाता है जिससे डॉक्टर और नर्स उसकी लगातार निगरानी कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार बच्चे का तापमान नियंत्रित रखा जाता है। नवजात को उपचार देने, उसकी जांच करने और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने में भी यह उपकरण सहायक होता है।
तापमान नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था जरूरी
रेडिएंट वार्मर को अस्पताल के नवजात देखभाल कक्ष या एसएनसीयू में रखा जाता है। इसके लिए साफ-सुथरा, संक्रमण से बचाव वाला और नियंत्रित तापमान का वातावरण जरूरी है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति, उपकरण के तापमान की निगरानी और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी आवश्यक है। वार्मर का इस्तेमाल बच्चे की स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय निगरानी में किया जाता है।
विभाग के एक ही बाल रोग विशेषज्ञ
जिले में बाल रोग विशेषज्ञों और नवजात देखभाल इकाइयों की कमी के कारण इन उपकरणों का दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में केवल वार्मर उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इनके प्रभावी इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञों और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था भी जरूरी है। जिले में इस समय सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल हैं, जो इस समय जिला नागरिक अस्पताल में तैनात हैं जबकि जिला नागरिक अस्पताल सहित उपमंडल स्तर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कम से कम 6 से 7 बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत है।
जिला नागरिक अस्पताल में पहले से रेडिएंट वार्मर मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर बच्चों को समय पर इलाज दिया जा रहा है। जल्द ही 10 नए रेडिएंट वार्मर भी मिल जाएंगे। इसके बाद पुराने हो चुके रेडिएंट वार्मर को रिप्लेस कर दिया जाएगा।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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जिला नागरिक अस्पताल में फिलहाल 14 रेडिएंट वार्मर उपलब्ध हैं। इनमें कुछ उपकरण दान में मिले हैं और नए हैं। इनका इस्तेमाल नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में किया जाता है। जिले में जिला स्तर के अस्पताल के अलावा अन्य जगहों पर एसएनसीयू और बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता नहीं होने से दूसरे स्थानों पर रखे गए कई वार्मर इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में नए मिलने वाले सभी 10 उपकरणों का इस्तेमाल जिला नागरिक अस्पताल में पुराने वार्मर को बदलने के लिए किए जाने की योजना है।
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समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए जरूरी है वार्मर
रेडिएंट वार्मर एक विशेष चिकित्सा उपकरण है, जो ऊपर लगे हीटिंग सिस्टम के माध्यम से नवजात शिशु को गर्माहट देता है। जन्म के तुरंत बाद बच्चे का शरीर तापमान नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता। समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले या शरीर का तापमान कम होने की आशंका वाले बच्चों को इसकी विशेष जरूरत पड़ती है। ऐसे बच्चों को ठंड लगने से शरीर का तापमान गिर सकता है जिससे उनकी स्थिति गंभीर होने का खतरा रहता है।
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वार्मर के नीचे बच्चे को खुले बिस्तर पर लिटाया जाता है जिससे डॉक्टर और नर्स उसकी लगातार निगरानी कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार बच्चे का तापमान नियंत्रित रखा जाता है। नवजात को उपचार देने, उसकी जांच करने और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने में भी यह उपकरण सहायक होता है।
तापमान नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था जरूरी
रेडिएंट वार्मर को अस्पताल के नवजात देखभाल कक्ष या एसएनसीयू में रखा जाता है। इसके लिए साफ-सुथरा, संक्रमण से बचाव वाला और नियंत्रित तापमान का वातावरण जरूरी है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति, उपकरण के तापमान की निगरानी और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी आवश्यक है। वार्मर का इस्तेमाल बच्चे की स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय निगरानी में किया जाता है।
विभाग के एक ही बाल रोग विशेषज्ञ
जिले में बाल रोग विशेषज्ञों और नवजात देखभाल इकाइयों की कमी के कारण इन उपकरणों का दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में केवल वार्मर उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इनके प्रभावी इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञों और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था भी जरूरी है। जिले में इस समय सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल हैं, जो इस समय जिला नागरिक अस्पताल में तैनात हैं जबकि जिला नागरिक अस्पताल सहित उपमंडल स्तर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कम से कम 6 से 7 बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत है।
जिला नागरिक अस्पताल में पहले से रेडिएंट वार्मर मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर बच्चों को समय पर इलाज दिया जा रहा है। जल्द ही 10 नए रेडिएंट वार्मर भी मिल जाएंगे। इसके बाद पुराने हो चुके रेडिएंट वार्मर को रिप्लेस कर दिया जाएगा।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

जिला नागरिक अस्पताल में रखा रेडियंट वार्मर। संवाद