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Kaithal News: ब्रह्मा बाबा के जीवन दर्शन की दी जानकारी
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कलायत। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि पर विश्व शांति दिवस का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर आश्रम की प्रमुख बहन रेखा दीदी ने ब्रह्मा बाबा के जीवन दर्शन, उनके गहन आध्यात्मिक अनुभवों और विश्व-कल्याणकारी दृष्टिकोण के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक साधारण हीरा व्यापारी दादा लेखराज ने वर्ष 1936-37 में प्राप्त दिव्य अनुभवों के माध्यम से मानवता को आत्म-जागरण, नैतिकता और शांति का मार्ग दिखाया। रेखा बहन ने कहा कि ब्रह्मा बाबा को द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व ही महाविनाश तथा उसके पश्चात एक पवित्र, शांतिपूर्ण और श्रेष्ठ विश्व की झलक प्राप्त हो गई थी जो उनके उच्च आध्यात्मिक स्तर का प्रमाण है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 1930 के दशक में, जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर दुर्लभ था ब्रह्मा बाबा ने संस्था की कमान महिलाओं को सौंपकर नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने ब्रह्मा बाबा के ट्रस्टीशिप सिद्धांत मेरा कुछ नहीं, सब ईश्वर का को आज के समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि यह सिद्धांत नेतृत्व और सेवा भावना का सर्वोत्तम मॉडल है। उन्होंने बताया कि राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति मृत्यु के भय से मुक्त होकर शांत, संतुलित और सशक्त जीवन जी सकता है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि विश्व शांति की शुरुआत आत्म-शांति से होती है। और ब्रह्मा बाबा का संपूर्ण जीवन इसी सत्य का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक शांति ध्यान कराया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा को शीश नवा आशीर्वाद ले बाबा के दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इसके अलावा समाज में फैली बुराईयों को समाप्त करने के लिए अपना भरपूर सहयोग देने का प्रण भी लिया।
18केएलटी3: ब्रह्मा बाबा को पुष्पांजलि अर्पित करते श्रद्धालु
18केएलटी4: कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु
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उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक साधारण हीरा व्यापारी दादा लेखराज ने वर्ष 1936-37 में प्राप्त दिव्य अनुभवों के माध्यम से मानवता को आत्म-जागरण, नैतिकता और शांति का मार्ग दिखाया। रेखा बहन ने कहा कि ब्रह्मा बाबा को द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व ही महाविनाश तथा उसके पश्चात एक पवित्र, शांतिपूर्ण और श्रेष्ठ विश्व की झलक प्राप्त हो गई थी जो उनके उच्च आध्यात्मिक स्तर का प्रमाण है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 1930 के दशक में, जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर दुर्लभ था ब्रह्मा बाबा ने संस्था की कमान महिलाओं को सौंपकर नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने ब्रह्मा बाबा के ट्रस्टीशिप सिद्धांत मेरा कुछ नहीं, सब ईश्वर का को आज के समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि यह सिद्धांत नेतृत्व और सेवा भावना का सर्वोत्तम मॉडल है। उन्होंने बताया कि राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति मृत्यु के भय से मुक्त होकर शांत, संतुलित और सशक्त जीवन जी सकता है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि विश्व शांति की शुरुआत आत्म-शांति से होती है। और ब्रह्मा बाबा का संपूर्ण जीवन इसी सत्य का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक शांति ध्यान कराया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा को शीश नवा आशीर्वाद ले बाबा के दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इसके अलावा समाज में फैली बुराईयों को समाप्त करने के लिए अपना भरपूर सहयोग देने का प्रण भी लिया।
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18केएलटी4: कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु