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Kaithal News: तब उड़ गये फिरंगियों के होश, जब...
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 24 Jan 2026 03:52 AM IST
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कैथल। जिले के अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की इकाई ने गांव काकौत में प्रचार मंत्री राजेश भारती के निवास पर वसंत पंचमी उपलक्ष्य में धनंजय जन्मोत्सव विचार एवं काव्य-गोष्ठी का आयोजन का आयोजन किया। विचार गोष्ठी में करनाल से आए युवा साहित्यकार अनुवादक एवं समीक्षक दीपक वोहरा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सतबीर सिंह जागलान ने काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। गोष्ठी में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के पराक्रम का वर्णन करते हुए दिलबाग अकेला ने कहा - तब उड़ गये फिरंगियों के होश साथियों, जब सेना लेकर आये, नेता जी बोस साथियों। भूख और भगवान की बात करते हुए राजेश भारती ने कहा :- भूखे बच्चे रोते हैं, पत्थर पर चढ़ते पकवान। हर बंदे में रहता है, गौर से देखो एक भगवान।
विचार-गोष्ठी में पर्यावरण, प्रदूषण के दुष्प्रभाव और चुनौतियां, सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी एवं मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। शहीदों के प्रति श्रद्धा-भाव दिखाते हुए डाॅ़ विकास आनंद ने कहा - आजादी के दीवानों का, फूलों से सत्कार करें, वतन के अमर शहीदों की, मिलकर जय-जयकार करें। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के शौर्य को याद करते हुए सतबीर सिंह जागलान ने कहा - अंगरेजां तै जिसनै, आजादी लई थी खोस, जयहिंद का नारा देग्ये सुभाष चंद्र बोस।
बसंत पंचमी के अवसर पर डाॅ़ तेजिंद्र ने कहा - मंद-मंद मुस्काता गंध-सुगंध बिखराता, दिव्य रूप दिखलाता, पीला चोला धारे, जैसे आये संत, वैसे आया वसंत। प्रकृति-चित्रण करते हुए मुख्य्-अतिथि दीपक वोहरा ने कहा - झरने बेकरार हैं, नदियों से मिलने के लिये, अल्हड़ चंचल नदियां, बेसाख्ता बेताब हैं, समंदर के प्यार में डूब जाने के लिये। रिसाल जांगड़ा ने कहा - अंगारों सी बातें सुनकर, दिल रह जाता है जल-भुनकर, साथ समय के नहीं चला था, बैठा है वह अब सिर धुनकर। पर्यावरणविद् डाॅ़ सुखदेव कुंडू ने कहा कि खेतों में रासायनिक उर्वरकों एवं दवाइयों के प्रयोग के गम्भीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। जल,भूमि और वायु प्रदूषित हो रहे हैं। कैंसर और हृदय-रोग जैसी बीमारियां आम हो रहीं हैं। संचालन इकाई-अध्यक्ष डाॅ़ तेजिंद्र ने किया। संवाद
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विचार-गोष्ठी में पर्यावरण, प्रदूषण के दुष्प्रभाव और चुनौतियां, सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी एवं मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। शहीदों के प्रति श्रद्धा-भाव दिखाते हुए डाॅ़ विकास आनंद ने कहा - आजादी के दीवानों का, फूलों से सत्कार करें, वतन के अमर शहीदों की, मिलकर जय-जयकार करें। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के शौर्य को याद करते हुए सतबीर सिंह जागलान ने कहा - अंगरेजां तै जिसनै, आजादी लई थी खोस, जयहिंद का नारा देग्ये सुभाष चंद्र बोस।
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बसंत पंचमी के अवसर पर डाॅ़ तेजिंद्र ने कहा - मंद-मंद मुस्काता गंध-सुगंध बिखराता, दिव्य रूप दिखलाता, पीला चोला धारे, जैसे आये संत, वैसे आया वसंत। प्रकृति-चित्रण करते हुए मुख्य्-अतिथि दीपक वोहरा ने कहा - झरने बेकरार हैं, नदियों से मिलने के लिये, अल्हड़ चंचल नदियां, बेसाख्ता बेताब हैं, समंदर के प्यार में डूब जाने के लिये। रिसाल जांगड़ा ने कहा - अंगारों सी बातें सुनकर, दिल रह जाता है जल-भुनकर, साथ समय के नहीं चला था, बैठा है वह अब सिर धुनकर। पर्यावरणविद् डाॅ़ सुखदेव कुंडू ने कहा कि खेतों में रासायनिक उर्वरकों एवं दवाइयों के प्रयोग के गम्भीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। जल,भूमि और वायु प्रदूषित हो रहे हैं। कैंसर और हृदय-रोग जैसी बीमारियां आम हो रहीं हैं। संचालन इकाई-अध्यक्ष डाॅ़ तेजिंद्र ने किया। संवाद