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Iran-India Relations: '3000 साल पुराने हैं भारत-ईरान के रिश्ते, चाबहार पर काम अच्छे से होगा', ईरानी प्रतिनिधि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 24 Jan 2026 01:48 AM IST
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सार
भारत और ईरान के रिश्ते बहुत मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार पर टिके हैं। ये कहना है ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही का, जिन्होंने ये भी कहा कि चाबहार परियोजना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और वे चाहते हैं कि यह बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े।
अब्दुल माजिद हकीम इलाही, ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि
- फोटो : ANI
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विस्तार
ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर सकारात्मक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि चाबहार बंदरगाह परियोजना पर काम अच्छे तरीके से आगे बढ़ेगा और भारत-ईरान के संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश आपसी सहयोग और समझदारी के साथ इस परियोजना को सफल बनाएंगे।
'3000 साल पुराने भारत-ईरान के रिश्ते'
एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते बहुत पुराने हैं, इस्लाम के आने से भी लगभग 3,000 साल पहले से दोनों सभ्यताओं के बीच संपर्क रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान में भारत के दर्शन, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन किया जाता रहा है। विश्वविद्यालयों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा का असर देखा गया है। इससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक भी हैं।
यह भी पढ़ें - Iran Unrest: हजारों गिरफ्तार और 5000 से भी ज्यादा मौतें; ईरान में नहीं रुक रहे प्रदर्शन, ट्रंप बोले- मदद आ रही
'दोनों देश अच्छे संबंध और सहयोग चाहते हैं'
चाबहार बंदरगाह को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता हमेशा भारत के साथ अच्छे रिश्तों पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक भारत सरकार ने दूसरे देशों के प्रतिबंधों से प्रभावित होकर ईरान से अपने रिश्ते नहीं बिगाड़े हैं और दोनों देश अच्छे संबंध और सहयोग चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि चाबहार परियोजना पर काम अच्छे ढंग से आगे बढ़ेगा। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। इसके जरिए भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक बिना पाकिस्तान पर निर्भर हुए व्यापार कर सकता है। यह बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ने 2003 में इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था। बाद में भारत की कंपनी इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) और ईरान की पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच दीर्घकालिक समझौता हुआ।
हालांकि, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इस परियोजना की रफ्तार पहले धीमी हो गई थी। अभी अमेरिका ने चाबहार के लिए सशर्त प्रतिबंध छूट दी हुई है, जो 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। भारत सरकार अमेरिका से लगातार बातचीत कर रही है ताकि इस छूट को आगे भी जारी रखा जा सके और परियोजना पर काम न रुके। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत-ईरान का द्विपक्षीय व्यापार इस समय करीब 1.6 अरब डॉलर का है। इसमें भारत का ईरान को निर्यात 1.2 अरब डॉलर और ईरान से आयात 0.4 अरब डॉलर का है। साथ ही, भारत उस घोषणा पर भी नजर रखे हुए है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।
ईरान में हालात नियंत्रण में हैं- इलाही
ईरान की आंतरिक स्थिति पर बोलते हुए अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि देश में आर्थिक समस्याएं हैं, जो प्रतिबंधों की वजह से पैदा हुई हैं। कुछ लोग इससे नाराज हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ विदेशी मीडिया में जो हालात दिखाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सच नहीं हैं। उनके अनुसार, वास्तविक स्थिति और मीडिया द्वारा बनाई गई कल्पना में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान में हालात नियंत्रण में हैं और स्थिति उतनी खराब नहीं है, जितनी बताई जाती है।
यह भी पढ़ें - Iran Vs US: फिर झूठे साबित हुए ट्रंप, फर्जी निकला दावा! ईरान के शीर्ष अभियोजक बोले- किसी की फांसी नहीं रोकी
प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर विदेशी संगठनों पर लगाए आरोप
प्रदर्शनों और हिंसा में मारे गए लोगों के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की मौत हुई है, लेकिन सही आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विदेशी संगठन और मीडिया संस्थान आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को मारा है। उनके मुताबिक, कई मामलों में प्रदर्शनकारियों ने पहले आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों और व्यापारियों पर हमला किया था, लेकिन बाद में इसका दोष सरकार पर डाल दिया गया।
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'3000 साल पुराने भारत-ईरान के रिश्ते'
एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते बहुत पुराने हैं, इस्लाम के आने से भी लगभग 3,000 साल पहले से दोनों सभ्यताओं के बीच संपर्क रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान में भारत के दर्शन, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन किया जाता रहा है। विश्वविद्यालयों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा का असर देखा गया है। इससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक भी हैं।
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'दोनों देश अच्छे संबंध और सहयोग चाहते हैं'
चाबहार बंदरगाह को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता हमेशा भारत के साथ अच्छे रिश्तों पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक भारत सरकार ने दूसरे देशों के प्रतिबंधों से प्रभावित होकर ईरान से अपने रिश्ते नहीं बिगाड़े हैं और दोनों देश अच्छे संबंध और सहयोग चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि चाबहार परियोजना पर काम अच्छे ढंग से आगे बढ़ेगा। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। इसके जरिए भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक बिना पाकिस्तान पर निर्भर हुए व्यापार कर सकता है। यह बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ने 2003 में इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था। बाद में भारत की कंपनी इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) और ईरान की पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच दीर्घकालिक समझौता हुआ।
हालांकि, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इस परियोजना की रफ्तार पहले धीमी हो गई थी। अभी अमेरिका ने चाबहार के लिए सशर्त प्रतिबंध छूट दी हुई है, जो 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। भारत सरकार अमेरिका से लगातार बातचीत कर रही है ताकि इस छूट को आगे भी जारी रखा जा सके और परियोजना पर काम न रुके। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत-ईरान का द्विपक्षीय व्यापार इस समय करीब 1.6 अरब डॉलर का है। इसमें भारत का ईरान को निर्यात 1.2 अरब डॉलर और ईरान से आयात 0.4 अरब डॉलर का है। साथ ही, भारत उस घोषणा पर भी नजर रखे हुए है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।
ईरान में हालात नियंत्रण में हैं- इलाही
ईरान की आंतरिक स्थिति पर बोलते हुए अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि देश में आर्थिक समस्याएं हैं, जो प्रतिबंधों की वजह से पैदा हुई हैं। कुछ लोग इससे नाराज हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ विदेशी मीडिया में जो हालात दिखाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सच नहीं हैं। उनके अनुसार, वास्तविक स्थिति और मीडिया द्वारा बनाई गई कल्पना में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान में हालात नियंत्रण में हैं और स्थिति उतनी खराब नहीं है, जितनी बताई जाती है।
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प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर विदेशी संगठनों पर लगाए आरोप
प्रदर्शनों और हिंसा में मारे गए लोगों के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की मौत हुई है, लेकिन सही आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विदेशी संगठन और मीडिया संस्थान आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को मारा है। उनके मुताबिक, कई मामलों में प्रदर्शनकारियों ने पहले आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों और व्यापारियों पर हमला किया था, लेकिन बाद में इसका दोष सरकार पर डाल दिया गया।
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