EC: मतदाता सूची में गड़बड़ी करने वाले BLOs पर चुनाव आयोग का सख्त एक्शन, अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तय
चुनाव आयोग ने उन बूथ लेवल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है, जो जानबूझकर आदेशों का पालन नहीं करते या जिनकी लापरवाही से मतदाता सूची की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
विस्तार
मतदाता सूची की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने उन बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया तय कर दी है, जो जानबूझकर निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं या जिनकी लापरवाही से मतदाता सूची की शुचिता प्रभावित हो रही है।
बूथ लेवल अधिकारी चुनावी व्यवस्था की जमीनी कड़ी होते हैं। एक बीएलओ औसतन 970 मतदाताओं या करीब 300 घरों से जुड़े रिकॉर्ड का रखरखाव और अद्यतन करता है। ऐसे में किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही सीधे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती है।
किन मामलों में होगी कार्रवाई
चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि किसी बीएलओ द्वारा:-
- कर्तव्य में लापरवाही
- जानबूझकर निर्देशों की अवहेलना
- अनुशासनहीनता या कदाचार
- चुनाव कानूनों और नियमों का उल्लंघन
- या ऐसा कोई कार्य या चूक जिससे मतदाता सूची की सटीकता और भरोसेमंदता प्रभावित हो
- तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
DEO और CEO की अहम भूमिका
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारी संबंधित बीएलओ को निलंबित कर सकता है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश अनुशासनात्मक प्राधिकारी को भेजेगा। इस सिफारिश पर छह महीने के भीतर कार्रवाई कर उसकी जानकारी दी जाएगी। यदि मामला आपराधिक कदाचार से जुड़ा हो, तो डीईओ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अनुमति से संबंधित बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा सकता है। यह कार्रवाई जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत की जाएगी।
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CEO को भी मिले विशेष अधिकार
राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सीईओ को यह अधिकार दिया गया है कि वे स्वतः संज्ञान लेकर या डीईओ की रिपोर्ट के आधार पर बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई कर सकें। हालांकि, ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को CEO की पूर्व सहमति के बिना समाप्त नहीं किया जा सकेगा। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह की हर कार्रवाई की जानकारी उसे अनिवार्य रूप से दी जाएगी। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता लोकतंत्र की नींव है, और इसमें किसी भी तरह की जानबूझकर की गई चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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