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SC: अनिल अंबानी समूह से जुड़े मामले में CBI-ईडी से रिपोर्ट तलब; पुणे पोर्श हादसे के आरोपी ने मांगी जमानत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 23 Jan 2026 11:45 PM IST
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Supreme Court Updates Anil Ambani CBI ED Report Pune Porche Accident Bail Plea and other cases hearing news
सुप्रीम कोर्ट। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनियों और उनके प्रमोटर अनिल अंबानी से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दोनों केंद्रीय एजेंसियों को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया है।

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पीठ पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस सरमा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों का डेढ़ लाख लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बट्टे खाते में डाला गया और कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन की हेराफेरी की गई। उन्होंने इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा बैंक ऋण घोटाला बताया। भूषण ने अदालत को यह भी बताया कि नवंबर में नोटिस जारी होने के बावजूद अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों ने अब तक अदालत में पेशी नहीं की है। इस पर पीठ ने कहा कि न्याय के हित में उन्हें अंतिम अवसर दिया जा रहा है और बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को ताजा नोटिस की तामील सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
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याचिका में कहा गया है कि 2013 से 2017 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम से रिलायंस कम्युनिकेशंस और समूह की अन्य कंपनियों को लगभग 31580 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए। एसबीआई द्वारा कराए गए फॉरेंसिक ऑडिट में हजारों करोड़ रुपये के डायवर्जन और संदिग्ध लेनदेन सामने आए लेकिन औपचारिक शिकायत कई साल बाद दर्ज की गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर ही सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की है और धन के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा जांच सीमित है और इसमें बैंक अधिकारियों व अन्य की भूमिका को नजरअंदाज किया गया है। याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए न्यायिक निगरानी की मांग की है।

पुणे पोर्श कार दुर्घटना: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मई, 2024 में पुणे में हुई पोर्श कार दुर्घटना में दो लोगों की जान जाने के मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और बॉम्बे हाई कोर्ट के 16 दिसंबर के आदेश के खिलाफ आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ की ओर से दायर याचिका को इस मामले से संबंधित अन्य समान मामलों के साथ जोड़ दिया।

पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई, 2024 को, शराब के नशे में धुत 17 वर्षीय नाबालिग द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। वकील सना रईस खान के जरिये पेश केस में गायकवाड़ ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इन्कार करने संबंधी अपने फैसले में गलती की है। खान ने बृहस्पतिवार को पीठ के सामने कहा, याचिकाकर्ता के खिलाफ एकमात्र आरोप यह है कि उसने पैसे के लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उसपर आरोप है कि मेडिकल सबूतों से छेड़छाड़ करने या ससून अस्पताल में किशोर के रक्त के नमूने की अदला-बदली के लिए पैसे का लेन-देन किया। पुलिस के आरोप के अनुसार उसने ड्राइवर से पैसे लिए और उसे डॉक्टर के सहायक को सौंप दिया।

याचिका में कहा गया है, अभियोजन पक्ष ने गायकवाड़ पर आरोप लगाया है कि उसने कार चलाने वाले नाबालिग की मां के कहने पर सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए। हालांकि उस महिला को जमानत मिल चुकी है और ऐसे में न्यायिक समानता का सिद्धांत कहता है कि गायकवाड़ को भी जमानत मिलनी चाहिए क्योंकि उसका अपराध में उसकी भूमिका महिला से कहीं हल्की है।

डिजिटल अरेस्ट से 22.92 करोड़ की ठगी: केंद्र, आरबीआई, सीबीआई और सात बैंकों को नोटिस जारी
डिजिटल अरेस्ट के जरिये 22.92 करोड़ रुपये की ठगी के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक, सीबीआई और सात निजी बैंकों को नोटिस जारी किया है। 82 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिये उन्हें 22.92 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया गया। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस संबंध में सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने अदालत को बताया, घटना उस समय हुई जब पीड़ित के बच्चे विदेश में थे। उन्होंने इसे बैंकों की घोर लापरवाही का मामला बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी रकम के लेन-देन पर बैंकों को सतर्कता बरतनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक व्हीलचेयर पर हैं और अकेले रहते हैं, ऐसे में बैंकों की विशेष जिम्मेदारी बनती है। याचिका में कहा गया है कि ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिये सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश दिखाए। गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने की धमकी देकर उनकी जीवनभर की बचत अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली गई। याचिकाकर्ता ने आरबीआई को निर्देश देने की मांग की है कि वह बैंकों को फर्जी खातों की पहचान कर राशि वापस दिलाने के लिए बाध्य करे। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने, रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम विकसित करने और संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है।

दिवाला धोखाधड़ी मामले की जांच की मांग, केंद्र और अन्य से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के मामले की जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र, तेलंगाना सरकार, सीबीआई, ईडी और एसएफआईओ से जवाब मांगा है। याचिका में इस मामले में राज्य के अधिकारियों और न्यायपालिका के एक उच्च पदस्थ सदस्य की कथित मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने वकील अश्विनी उपाध्याय की दलीलों पर ध्यान देते हुए गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय और कॉरपोरेट मंत्रालय सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों को नोटिस जारी किए। पीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई, ईडी और एसएफआईओ (गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय) को भी नोटिस जारी किए।

बंगाल कोल्ड रोलर्स प्रा. लि. के निदेशक सौरभ अग्रवाल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि एक सुनियोजित साजिश के तहत दिवालिया कंपनी के निलंबित प्रबंधन ने कथित तौर पर लगभग 150 करोड़ रुपये की हेराफेरी की और दिवालियापन की कार्यवाही को 30 महीने से अधिक समय तक टालने के लिए उच्च स्तरीय न्यायिक प्रभाव का इस्तेमाल किया।
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