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Kaithal News: चोरी और माल रखने में दो को दो-दो साल कैद
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला अदालत ने चोरी और चोरी के माल को रखने के एक अहम मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो दोषियों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट रू से कहा कि विश्वासघात और बेईमानी से जुड़े अपराधों में नरमी बरतना
समाज हित में नहीं। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तुषार शर्मा की अदालत ने सुनाया।
मामला कैथल के एक निजी फर्म से जुड़ा है, जहां दिलबाग नामक कर्मचारी ने नौकरी के दौरान कीमती सामान चुरा लिया था। सूरज ने बाद में चोरी का माल खरीदा और रखा। कोर्ट ने दिलबाग को भारतीय दंड संहिता की धारा 381 (नौकरी के दौरान चोरी) तथा सूरज को धारा 411 (चोरी का माल रखने) के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने दोनों को दो वर्ष कठोर कारावास और प्रति व्यक्ति एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
जुर्माना न देने पर एक माह अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस अपराध से फर्म को लाखों का नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब भी मुश्किल है। नियोक्ता ने गवाही में बताया कि विश्वास टूटने से कारोबार प्रभावित हुआ।
कोर्ट ने प्रोबेशन की मांग ठुकराई
सुनवाई में बचाव पक्ष ने नरमी और प्रोबेशन का लाभ मांगा, लेकिन अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने तर्क दिया कि यह अपराध न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि नियोक्ता के भरोसे का गंभीर धोखा भी। पुलिस जांच से साबित हुआ कि चोरी योजनाबद्ध थी। अदालत ने कहा, “ऐसे मामलों में ढिलाई गलत संदेश देगी। दंड से ही समाज में संदेश जाएगा।”
यह फैसला चोरी और विश्वासघात के प्रति अदालत की सख्ती का स्पष्ट
संदेश है। स्थानीय व्यापारियों ने इसे स्वागतयोग्य बताया।
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कैथल। जिला अदालत ने चोरी और चोरी के माल को रखने के एक अहम मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो दोषियों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट रू से कहा कि विश्वासघात और बेईमानी से जुड़े अपराधों में नरमी बरतना
समाज हित में नहीं। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तुषार शर्मा की अदालत ने सुनाया।
मामला कैथल के एक निजी फर्म से जुड़ा है, जहां दिलबाग नामक कर्मचारी ने नौकरी के दौरान कीमती सामान चुरा लिया था। सूरज ने बाद में चोरी का माल खरीदा और रखा। कोर्ट ने दिलबाग को भारतीय दंड संहिता की धारा 381 (नौकरी के दौरान चोरी) तथा सूरज को धारा 411 (चोरी का माल रखने) के तहत दोषी ठहराया।
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अदालत ने दोनों को दो वर्ष कठोर कारावास और प्रति व्यक्ति एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
जुर्माना न देने पर एक माह अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस अपराध से फर्म को लाखों का नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब भी मुश्किल है। नियोक्ता ने गवाही में बताया कि विश्वास टूटने से कारोबार प्रभावित हुआ।
कोर्ट ने प्रोबेशन की मांग ठुकराई
सुनवाई में बचाव पक्ष ने नरमी और प्रोबेशन का लाभ मांगा, लेकिन अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने तर्क दिया कि यह अपराध न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि नियोक्ता के भरोसे का गंभीर धोखा भी। पुलिस जांच से साबित हुआ कि चोरी योजनाबद्ध थी। अदालत ने कहा, “ऐसे मामलों में ढिलाई गलत संदेश देगी। दंड से ही समाज में संदेश जाएगा।”
यह फैसला चोरी और विश्वासघात के प्रति अदालत की सख्ती का स्पष्ट
संदेश है। स्थानीय व्यापारियों ने इसे स्वागतयोग्य बताया।
