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Karnal News: लोन संबंधी विवाद में बैंक शाखा प्रबंधक फिर बैंकिंग लोकपाल और उपभोक्ता फोरम में करें शिकायत
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.अमर उजाला की और से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाए संवाद
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करनाल। ग्रामीण महिलाओं ने स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से चलने के लिए कानूनी प्रक्रिया को समझा। महिलाओं ने जाना कि उन्हें अपना रोजगार स्थापित करने के लिए किन कानूनी दस्तावेजों को पूरा करना होता है और लाइसेंस व पंजीकरण उनके लिए क्यों जरूरी है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए वीरवार को अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता कार्यक्रम हुआ जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में अधिवक्ता मोनिका शर्मा पहुंचीं।
उन्होंने महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, रोजगार से जुड़े कानूनों और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, अचार-मुरब्बा निर्माण, अगरबत्ती, ब्यूटी पार्लर, किराना और कृषि आधारित कार्यों से जुड़ी महिलाओं को कानूनी जानकारी दी गई जिसमें अपने स्वरोजगार से लेकर उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक किया गया। अधिवक्ता मोनिका शर्मा ने बताया कि कोई भी व्यवसाय शुरू करने से पहले पंजीकरण, लाइसेंस, जीएसटी, बैंक लोन, समूह की जिम्मेदारियां, अनुबंध और धोखाधड़ी से बचाव जैसी कानूनी जानकारी होनी जरूरी है। महिला कमलेश ने पूछा कि अगर कोई ग्राहक या व्यापारी पैसा नहीं देता तो क्या करें? पहले तो काम शुरू करने से पहले लिखित समझौता, बिल या रसीद जरूर बनाएं। यदि भुगतान नहीं मिलता तो पहले नोटिस भेजा जा सकता है, जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
योजनाओं के लाभ के लिए पंजीकरण जरूरी
बबीता ने पूछा कि अगर हम छोटा काम घर से करते हैं, तो क्या उसका पंजीकरण जरूरी है? अधिवक्ता मोनिका ने बताया कि छोटे स्तर पर काम शुरू करने के लिए पंजीकरण जरूरी नहीं होता लेकिन जैसे ही काम बढ़ता है, समूह या व्यवसाय का पंजीकरण कराना जरूरी हो जाता है। इससे बैंक लोन, सरकारी योजनाओं और कानूनी सुरक्षा का लाभ मिलता है। लोन आवेदन पत्र, लोन एग्रीमेंट, पुनर्भुगतान शर्तें और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होते हैं। बिना पढ़े या समझे किसी भी कागज पर हस्ताक्षर करना कानूनी रूप से गलत और जोखिम भरा हो सकता है।
तो हो सकती है कार्रवाई
पिंकी ने पूछा लोन चुकाने में देरी होने पर बैंक कितनी कानूनी कार्रवाई कर सकता है? मोनिका शर्मा ने बताया कि ऋण न देने पर बैंक पहले नोटिस देता है जिसमें कुछ समय के अंतर्गत पैसा वापस करने को कहा जाता है। अगर नोटिस के बाद भी ऋण नहीं दिया जाता है तो बैंक कानूनी कार्रवाई कर केस कर सकता है।
शोषण पर कार्रवाई का विकल्प
मुकेश ने पूछा कि काम के दौरान शोषण या डराने धमकाने पर क्या किया जा सकता है ? इसके लिए महिलाओं के अधिकारों को सबसे पहले रखा गया है जिसमें वह किसी भी प्रकार के शोषण होने पर महिला संरक्षण कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज करवा सकती हैं, इसके एडीआर केंद्र में महिलाओं के लिए निःशुल्क अधिवक्ता व कानूनी सहायता सेवा उपलब्ध है जिसका उपयोग किया जा सकता है।
बैंक से अदालत तक कर सकते हैं शिकायत
गीता ने पूछा कि बैंक लोन से जुड़े विवाद की स्थिति में कहां शिकायत की जा सकती है? इसके लिए सबसे पहले बैंक शाखा प्रबंधक, जिला स्तर के बैंक अधिकारी, बैंकिंग लोकपाल और उपभोक्ता फोरम में शिकायत की जा सकती है। यदि ऋण में किसी भी प्रकार की परेशानी आती है या लंबे समय पर लोन नहीं चुकाया जाता है तो मामला अदालत तक भी पहुंच जाता है।
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उन्होंने महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, रोजगार से जुड़े कानूनों और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, अचार-मुरब्बा निर्माण, अगरबत्ती, ब्यूटी पार्लर, किराना और कृषि आधारित कार्यों से जुड़ी महिलाओं को कानूनी जानकारी दी गई जिसमें अपने स्वरोजगार से लेकर उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक किया गया। अधिवक्ता मोनिका शर्मा ने बताया कि कोई भी व्यवसाय शुरू करने से पहले पंजीकरण, लाइसेंस, जीएसटी, बैंक लोन, समूह की जिम्मेदारियां, अनुबंध और धोखाधड़ी से बचाव जैसी कानूनी जानकारी होनी जरूरी है। महिला कमलेश ने पूछा कि अगर कोई ग्राहक या व्यापारी पैसा नहीं देता तो क्या करें? पहले तो काम शुरू करने से पहले लिखित समझौता, बिल या रसीद जरूर बनाएं। यदि भुगतान नहीं मिलता तो पहले नोटिस भेजा जा सकता है, जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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योजनाओं के लाभ के लिए पंजीकरण जरूरी
बबीता ने पूछा कि अगर हम छोटा काम घर से करते हैं, तो क्या उसका पंजीकरण जरूरी है? अधिवक्ता मोनिका ने बताया कि छोटे स्तर पर काम शुरू करने के लिए पंजीकरण जरूरी नहीं होता लेकिन जैसे ही काम बढ़ता है, समूह या व्यवसाय का पंजीकरण कराना जरूरी हो जाता है। इससे बैंक लोन, सरकारी योजनाओं और कानूनी सुरक्षा का लाभ मिलता है। लोन आवेदन पत्र, लोन एग्रीमेंट, पुनर्भुगतान शर्तें और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होते हैं। बिना पढ़े या समझे किसी भी कागज पर हस्ताक्षर करना कानूनी रूप से गलत और जोखिम भरा हो सकता है।
तो हो सकती है कार्रवाई
पिंकी ने पूछा लोन चुकाने में देरी होने पर बैंक कितनी कानूनी कार्रवाई कर सकता है? मोनिका शर्मा ने बताया कि ऋण न देने पर बैंक पहले नोटिस देता है जिसमें कुछ समय के अंतर्गत पैसा वापस करने को कहा जाता है। अगर नोटिस के बाद भी ऋण नहीं दिया जाता है तो बैंक कानूनी कार्रवाई कर केस कर सकता है।
शोषण पर कार्रवाई का विकल्प
मुकेश ने पूछा कि काम के दौरान शोषण या डराने धमकाने पर क्या किया जा सकता है ? इसके लिए महिलाओं के अधिकारों को सबसे पहले रखा गया है जिसमें वह किसी भी प्रकार के शोषण होने पर महिला संरक्षण कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज करवा सकती हैं, इसके एडीआर केंद्र में महिलाओं के लिए निःशुल्क अधिवक्ता व कानूनी सहायता सेवा उपलब्ध है जिसका उपयोग किया जा सकता है।
बैंक से अदालत तक कर सकते हैं शिकायत
गीता ने पूछा कि बैंक लोन से जुड़े विवाद की स्थिति में कहां शिकायत की जा सकती है? इसके लिए सबसे पहले बैंक शाखा प्रबंधक, जिला स्तर के बैंक अधिकारी, बैंकिंग लोकपाल और उपभोक्ता फोरम में शिकायत की जा सकती है। यदि ऋण में किसी भी प्रकार की परेशानी आती है या लंबे समय पर लोन नहीं चुकाया जाता है तो मामला अदालत तक भी पहुंच जाता है।