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Karnal News: नौकरी की मिले सुरक्षा और बकाया मानदेय का जल्द हो भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 30 Jan 2026 01:19 AM IST
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करनाल। 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर मिड डे मील वर्कर को काफी उम्मीद है। वर्षों से लंबित मांगों के समाधान की आस में मिड डे मील वर्कर और उनके पदाधिकारी बजट की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर इस बार बजट में उनके हितों को प्राथमिकता दी गई तो हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।
पदाधिकारियों का कहना है कि मिड डे मील योजना बच्चों के पोषण से जुड़ी अहम योजना है और इसे चलाने वाली वर्कर्स की अनदेखी अब नहीं होनी चाहिए। सभी की नजरें अब एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं, जिससे मिड डे मील वर्कर्स को सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व मिलने की उम्मीद की जा रही है।
12 महीने मिलना चाहिए मानदेय
करनाल ब्लॉक की उप प्रधान लक्ष्मी ने कहा कि मिड डे मील वर्कर को सबसे बड़ी उम्मीद बकाया मानदेय के तत्काल भुगतान और 12 महीने मानदेय को लेकर है। उन्होंने कहा कि अभी केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है, जबकि शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों को पूरे वर्ष वेतन मिलता है। बजट में इस विसंगति को दूर किए जाने की उम्मीद है।
मानदेय बढ़ोत्तरी की आस
कैशियर ओमप्रकाश माटा ने बताया कि वर्कर्स को इस बार बजट से मानदेय बढ़ाकर 26 हजार रुपये करने और इसे हरियाणा में लागू न्यूनतम वेतन के बराबर करने की आस है। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मिड डे मील वर्कर्स का मानदेय बेहद कम है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
- नौकरी की सुरक्षा की उम्मीद
जिला प्रधान शिमला ने कहा कि स्कूलों के मर्ज या बंद होने के चलते बड़ी संख्या में वर्कर्स को काम से हटाया गया है। बजट से उम्मीद है कि नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और हटाई गई वर्करों को दोबारा काम पर लिया जाएगा या अन्य सरकारी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा।
- विशेष फंड का होना चाहिए प्रावधान
करनाल ब्लॉक प्रधान कविता ने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को आयुष्मान कार्ड, मुफ्त चिकित्सा सुविधा और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि बजट में इन प्रावधानों के लिए विशेष फंड का प्रावधान होना चाहिए, ताकि काम के दौरान घायल होने या मृत्यु की स्थिति में परिवार असहाय न रहे।
- मिड डे मील वर्कर्स को मिलना चाहिए रिटायरमेंट लाभ
जिला सहसचिव नीलम ने कहा कि वर्कर्स को 65 वर्ष तक सेवा और सेवानिवृत्ति पर दो लाख रुपये लाभ दिए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह अन्य स्कीम वर्कर्स को रिटायरमेंट लाभ दिया जा रहा है, उसी तरह मिड डे मील वर्कर्स को भी बजट में यह अधिकार मिलेगा।
स्थायी कर्मचारी बनाने की मांग
वहीं जिला उप प्रधान ममता ने कहा कि बजट से वर्दी भत्ता बढ़ाने, मानदेय सीधे बैंक खाते में हर माह समय पर डालने और महीने में दो अवकाश जैसी मांगों के पूरे होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि मिड डे मील वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी बनाकर ईएसआई और पीएफ के दायरे में लाया जाए।
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पदाधिकारियों का कहना है कि मिड डे मील योजना बच्चों के पोषण से जुड़ी अहम योजना है और इसे चलाने वाली वर्कर्स की अनदेखी अब नहीं होनी चाहिए। सभी की नजरें अब एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं, जिससे मिड डे मील वर्कर्स को सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व मिलने की उम्मीद की जा रही है।
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12 महीने मिलना चाहिए मानदेय
करनाल ब्लॉक की उप प्रधान लक्ष्मी ने कहा कि मिड डे मील वर्कर को सबसे बड़ी उम्मीद बकाया मानदेय के तत्काल भुगतान और 12 महीने मानदेय को लेकर है। उन्होंने कहा कि अभी केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है, जबकि शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों को पूरे वर्ष वेतन मिलता है। बजट में इस विसंगति को दूर किए जाने की उम्मीद है।
मानदेय बढ़ोत्तरी की आस
कैशियर ओमप्रकाश माटा ने बताया कि वर्कर्स को इस बार बजट से मानदेय बढ़ाकर 26 हजार रुपये करने और इसे हरियाणा में लागू न्यूनतम वेतन के बराबर करने की आस है। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मिड डे मील वर्कर्स का मानदेय बेहद कम है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
- नौकरी की सुरक्षा की उम्मीद
जिला प्रधान शिमला ने कहा कि स्कूलों के मर्ज या बंद होने के चलते बड़ी संख्या में वर्कर्स को काम से हटाया गया है। बजट से उम्मीद है कि नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और हटाई गई वर्करों को दोबारा काम पर लिया जाएगा या अन्य सरकारी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा।
- विशेष फंड का होना चाहिए प्रावधान
करनाल ब्लॉक प्रधान कविता ने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स को आयुष्मान कार्ड, मुफ्त चिकित्सा सुविधा और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि बजट में इन प्रावधानों के लिए विशेष फंड का प्रावधान होना चाहिए, ताकि काम के दौरान घायल होने या मृत्यु की स्थिति में परिवार असहाय न रहे।
- मिड डे मील वर्कर्स को मिलना चाहिए रिटायरमेंट लाभ
जिला सहसचिव नीलम ने कहा कि वर्कर्स को 65 वर्ष तक सेवा और सेवानिवृत्ति पर दो लाख रुपये लाभ दिए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह अन्य स्कीम वर्कर्स को रिटायरमेंट लाभ दिया जा रहा है, उसी तरह मिड डे मील वर्कर्स को भी बजट में यह अधिकार मिलेगा।
स्थायी कर्मचारी बनाने की मांग
वहीं जिला उप प्रधान ममता ने कहा कि बजट से वर्दी भत्ता बढ़ाने, मानदेय सीधे बैंक खाते में हर माह समय पर डालने और महीने में दो अवकाश जैसी मांगों के पूरे होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि मिड डे मील वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी बनाकर ईएसआई और पीएफ के दायरे में लाया जाए।