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Karnal News: अब खाली जमीन की भरत में इस्तेमाल होगा मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 30 Jan 2026 01:17 AM IST
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करनाल। अब शहर में इमारतों के निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा यानी सीएंडडी वेस्ट (कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलेशन वेस्ट) सड़कों, गलियों और खाली प्लॉटों में बिखरा नजर नहीं आएगा। नगर निगम ने पहली बार इस मलबे को व्यवस्थित तरीके से उठाने और उसका वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण की तैयारी कर ली है। इस मलबे का इस्तेमाल निगम खाली जमीन के भरत में करेगा। इससे स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का काम भी होगा और लोगों को सीएंडडी वेस्ट की वजह से होने वाली परेशानियां दूर होंगी।
अब तक नगर निगम की ओर से केवल घरेलू कूड़ा-कचरा उठाने का ही काम कराया जाता था जबकि भवन निर्माण से निकलने वाला मलबा लोगों द्वारा खुले में डाल दिया जाता था। इससे न केवल शहर की सुंदरता खराब होती थी बल्कि नालियों के जाम होने, सड़क हादसों और धूल-प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा हो रही थीं। इन समस्याओं को देखते हुए निगम ने सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर ठोस योजना बनाई है। इससे शहरवासियों को धूल और गंदगी से निजात मिलेगी, नालियां जाम नहीं होंगी और सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। साथ ही, शहर का सौंदर्य बढ़ेगा और स्वच्छ, सुरक्षित वातावरण तैयार होगा।
दो करोड़ रुपये खर्च करेगा निगम
इस पूरी व्यवस्था पर नगर निगम करीब दो करोड़ रुपये खर्च करेगा। निगम ने सीएंडडी वेस्ट उठाने और ढुलाई के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और लोडर की व्यवस्था की है। शहर के विभिन्न हिस्सों से भवन निर्माण, मरम्मत और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे को नियमित रूप से उठाया जाएगा और तय स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। इससे सड़कों पर बेतरतीब पड़े मलबे से निजात मिलेगी और यातायात भी सुचारु रहेगा। इसके लिए निगम ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मलबे का होगा वैज्ञानिक निस्तारण
निगम की योजना सिर्फ मलबा उठाने तक सीमित नहीं है बल्कि उसका उपयोगी निस्तारण भी किया जाएगा। इस मलबे में से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) और सीएंडडी वेस्ट को अलग-अलग किया जाएगा। आरडीएफ का इस्तेमाल सीमेंट फैक्ट्रियों और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में ईंधन के रूप में किया जाएगा, जिससे ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा जिससे इस कचरे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। वहीं सीएंडडी वेस्ट यानी कंक्रीट, ईंट, पत्थर आदि अवशेषों का इस्तेमाल टूटी सड़कों की मरम्मत और खाली जमीन को भरने के लिए किया जाएगा। इससे निगम को निर्माण कार्यों में अतिरिक्त सामग्री खरीदने की जरूरत भी कम पड़ेगी और लागत में बचत होगी।
नगर निगम द्वारा यह कदम स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भी उठाया गया है। खुले में पड़ा मलबा अक्सर शहर की सफाई रैंकिंग को प्रभावित करता रहा है। वहीं लोगों के लिए भी धूल का कारण बनता था। अब सीएंडडी वेस्ट के समुचित प्रबंधन से शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है।
- डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त, नगर निगम
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अब तक नगर निगम की ओर से केवल घरेलू कूड़ा-कचरा उठाने का ही काम कराया जाता था जबकि भवन निर्माण से निकलने वाला मलबा लोगों द्वारा खुले में डाल दिया जाता था। इससे न केवल शहर की सुंदरता खराब होती थी बल्कि नालियों के जाम होने, सड़क हादसों और धूल-प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा हो रही थीं। इन समस्याओं को देखते हुए निगम ने सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर ठोस योजना बनाई है। इससे शहरवासियों को धूल और गंदगी से निजात मिलेगी, नालियां जाम नहीं होंगी और सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। साथ ही, शहर का सौंदर्य बढ़ेगा और स्वच्छ, सुरक्षित वातावरण तैयार होगा।
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दो करोड़ रुपये खर्च करेगा निगम
इस पूरी व्यवस्था पर नगर निगम करीब दो करोड़ रुपये खर्च करेगा। निगम ने सीएंडडी वेस्ट उठाने और ढुलाई के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और लोडर की व्यवस्था की है। शहर के विभिन्न हिस्सों से भवन निर्माण, मरम्मत और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे को नियमित रूप से उठाया जाएगा और तय स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। इससे सड़कों पर बेतरतीब पड़े मलबे से निजात मिलेगी और यातायात भी सुचारु रहेगा। इसके लिए निगम ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मलबे का होगा वैज्ञानिक निस्तारण
निगम की योजना सिर्फ मलबा उठाने तक सीमित नहीं है बल्कि उसका उपयोगी निस्तारण भी किया जाएगा। इस मलबे में से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) और सीएंडडी वेस्ट को अलग-अलग किया जाएगा। आरडीएफ का इस्तेमाल सीमेंट फैक्ट्रियों और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में ईंधन के रूप में किया जाएगा, जिससे ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा जिससे इस कचरे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। वहीं सीएंडडी वेस्ट यानी कंक्रीट, ईंट, पत्थर आदि अवशेषों का इस्तेमाल टूटी सड़कों की मरम्मत और खाली जमीन को भरने के लिए किया जाएगा। इससे निगम को निर्माण कार्यों में अतिरिक्त सामग्री खरीदने की जरूरत भी कम पड़ेगी और लागत में बचत होगी।
नगर निगम द्वारा यह कदम स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भी उठाया गया है। खुले में पड़ा मलबा अक्सर शहर की सफाई रैंकिंग को प्रभावित करता रहा है। वहीं लोगों के लिए भी धूल का कारण बनता था। अब सीएंडडी वेस्ट के समुचित प्रबंधन से शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है।
- डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त, नगर निगम