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Karnal News: आरबीएसके के बच्चों का अब मेडिकल कॉलेज में ही इलाज
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राम सारस्वत
करनाल। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत इलाज की सुविधा अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होने जा रही है। सोमवार को आरबीएसके टीम और कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग के बीच हुई बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया।
अब तक जिले में इस योजना के तहत पहचान किए गए बच्चों को इलाज के लिए चंडीगढ़ और रोहतक पीजीआई भेजना पड़ता था। अब मेडिकल कॉलेज में ही इलाज हो सकेगा। इससे जिले के 300 से अधिक बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। इन बच्चों का योजना के तहत इलाज प्रस्तावित है।
अधिकारियों के अनुसार अगले माह से कुछ बीमारियों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा, जबकि आगामी 6 माह के भीतर अधिकांश बीमारियों के उपचार की सुविधा यहां उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, फिलहाल हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण दिल से जुड़ी जन्मजात बीमारियों का इलाज अभी यहां संभव नहीं होगा।
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अब तक बाहर जाना पड़ता था
आरबीएसके के तहत जिले में बच्चों की स्क्रीनिंग तो हो रही थी लेकिन इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में गंभीर मामलों को चंडीगढ़ पीजीआई और रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता था। इसमें समय, पैसा और संसाधनों की काफी खपत होती थी। कई बार दूरी और आर्थिक कारणों से परिजन इलाज नहीं करवा पाते थे। अब स्थानीय स्तर पर इलाज शुरू होने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
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4 श्रेणियों में होता है इलाज
जन्मजात विकार : दिल में छेद, कटे होंठ/तालु, क्लब फुट
कमियां : एनीमिया, विटामिन की कमी, कुपोषण
रोग : दमा, मिर्गी, त्वचा व दांतों की बीमारियां
विकास में देरी : ऑटिज्म, मानसिक मंदता, सुनने-बोलने में समस्या
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विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि यहां के चिकित्सकों को आरबीएसके के तहत आने वाली विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रयास करेंगे कि अधिक से अधिक बीमारियों का इलाज यहीं संभव हो। इसके लिए डॉक्टरों की ट्रेनिंग कराई जाएगी, ताकि बच्चों को बाहर न जाना पड़े। बैठक में तय किया गया कि शुरुआती चरण में सामान्य और मध्यम स्तर की बीमारियों का इलाज शुरू होगा, जबकि जटिल मामलों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं धीरे-धीरे जोड़ी जाएंगी।
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वर्जन-- -
सोमवार को आरबीएसके के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई है। इसमें आरबीएसके योजना के तहत होने वाले इलाज अब मेडिकल कॉलेज में शुरू करने के लिए चर्चा हुई है जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, करनाल
-- -- अभी हम योजना के तहत मरीजों को पीजीआई भेजा करते थे। अब मेडिकल कॉलेज में सुविधा होने के बाद कुछ इलाज जिले के भीतर ही मिल सकेंगे। इससे पीजीआई पर दवाब कम होगा। साथ ही अन्य जिलों के भी बच्चों को राहत मिल सकेगी। - डॉ. पूनम चौधरी, सीएमओ, करनाल
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करनाल। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत इलाज की सुविधा अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होने जा रही है। सोमवार को आरबीएसके टीम और कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग के बीच हुई बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया।
अब तक जिले में इस योजना के तहत पहचान किए गए बच्चों को इलाज के लिए चंडीगढ़ और रोहतक पीजीआई भेजना पड़ता था। अब मेडिकल कॉलेज में ही इलाज हो सकेगा। इससे जिले के 300 से अधिक बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। इन बच्चों का योजना के तहत इलाज प्रस्तावित है।
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अधिकारियों के अनुसार अगले माह से कुछ बीमारियों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा, जबकि आगामी 6 माह के भीतर अधिकांश बीमारियों के उपचार की सुविधा यहां उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, फिलहाल हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण दिल से जुड़ी जन्मजात बीमारियों का इलाज अभी यहां संभव नहीं होगा।
अब तक बाहर जाना पड़ता था
आरबीएसके के तहत जिले में बच्चों की स्क्रीनिंग तो हो रही थी लेकिन इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में गंभीर मामलों को चंडीगढ़ पीजीआई और रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता था। इसमें समय, पैसा और संसाधनों की काफी खपत होती थी। कई बार दूरी और आर्थिक कारणों से परिजन इलाज नहीं करवा पाते थे। अब स्थानीय स्तर पर इलाज शुरू होने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
4 श्रेणियों में होता है इलाज
जन्मजात विकार : दिल में छेद, कटे होंठ/तालु, क्लब फुट
कमियां : एनीमिया, विटामिन की कमी, कुपोषण
रोग : दमा, मिर्गी, त्वचा व दांतों की बीमारियां
विकास में देरी : ऑटिज्म, मानसिक मंदता, सुनने-बोलने में समस्या
विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि यहां के चिकित्सकों को आरबीएसके के तहत आने वाली विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रयास करेंगे कि अधिक से अधिक बीमारियों का इलाज यहीं संभव हो। इसके लिए डॉक्टरों की ट्रेनिंग कराई जाएगी, ताकि बच्चों को बाहर न जाना पड़े। बैठक में तय किया गया कि शुरुआती चरण में सामान्य और मध्यम स्तर की बीमारियों का इलाज शुरू होगा, जबकि जटिल मामलों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं धीरे-धीरे जोड़ी जाएंगी।
वर्जन
सोमवार को आरबीएसके के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई है। इसमें आरबीएसके योजना के तहत होने वाले इलाज अब मेडिकल कॉलेज में शुरू करने के लिए चर्चा हुई है जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, करनाल