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Karnal News: दस साल से करोड़ों की प्रतिपूर्ति अटकी, 35 स्कूलों के प्रिंसिपलों ने उठाई आवाज
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विधायक को ज्ञापन सौंपते स्कूल प्रिंसिपल।
करनाल। निजी स्कूलों में पढ़ रहे 134ए के विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति पिछले दस साल से लंबित होने का मुद्दा शनिवार को इंद्री ब्लॉक के 35 सीबीएसई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने उठाया। ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित चाय पे चर्चा कार्यक्रम में स्कूल संचालकों और प्रधानाचार्यों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी छह प्रमुख समस्याएं रखीं। विधायक रामकुमार कश्यप को ज्ञापन भी सौंपा।
प्रधानाचार्यों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक करनाल जिले के निजी स्कूलों को धारा 134-ए, शिक्षा का अधिकार अधिनियम और चिराग योजना के तहत देय प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिली है। इससे स्कूलों पर करोड़ों रुपये का वित्तीय बोझ बढ़ा है। सरकार से लंबित भुगतान जारी कराने और अन्य समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।
बैठक की अध्यक्षता सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा ने की। हालांकि, धारा 134-ए निरस्त हो चुकी है, लेकिन इसके तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थी अभी 12वीं कक्षा तक निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इसलिए उनकी प्रतिपूर्ति का मामला अब भी महत्वपूर्ण है। विधायक ने समस्याएं सुनीं तथा उन्हें उचित स्तर पर उठाने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
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ये मांगे उठाईं
स्कूल स्टाफ की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
- शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाने का मुद्दा
- डीजल बसों में सीएनजी किट लगवाने के बाद भी पासिंग कराने में परेशानी
- बिल्डिंग सेफ्टी, फायर सेफ्टी और स्वच्छ पेयजल प्रमाणपत्र की वैधता पांच साल करने की मांग की
- ऑनलाइन स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) जारी करने की व्यवस्था पर आपत्ति
- नर्सरी से यूकेजी तक अलग मान्यता या पंजीकरण की मांग दोहरी व्यवस्था
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प्रधानाचार्यों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक करनाल जिले के निजी स्कूलों को धारा 134-ए, शिक्षा का अधिकार अधिनियम और चिराग योजना के तहत देय प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिली है। इससे स्कूलों पर करोड़ों रुपये का वित्तीय बोझ बढ़ा है। सरकार से लंबित भुगतान जारी कराने और अन्य समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।
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बैठक की अध्यक्षता सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजन लांबा ने की। हालांकि, धारा 134-ए निरस्त हो चुकी है, लेकिन इसके तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थी अभी 12वीं कक्षा तक निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इसलिए उनकी प्रतिपूर्ति का मामला अब भी महत्वपूर्ण है। विधायक ने समस्याएं सुनीं तथा उन्हें उचित स्तर पर उठाने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
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ये मांगे उठाईं
स्कूल स्टाफ की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
- शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाने का मुद्दा
- डीजल बसों में सीएनजी किट लगवाने के बाद भी पासिंग कराने में परेशानी
- बिल्डिंग सेफ्टी, फायर सेफ्टी और स्वच्छ पेयजल प्रमाणपत्र की वैधता पांच साल करने की मांग की
- ऑनलाइन स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) जारी करने की व्यवस्था पर आपत्ति
- नर्सरी से यूकेजी तक अलग मान्यता या पंजीकरण की मांग दोहरी व्यवस्था