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Karnal News: शौर्य को तरस गया काला आंब, नहीं जल पाई अमर जवान ज्योति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 03:34 AM IST
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The black mango tree yearned for bravery, the Amar Jawan Jyoti could not be lit.
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पानीपत। पानीपत की तीसरी लड़ाई के शौर्य का प्रतीक काला आंब अपने ही शौर्य को तरस गया है। पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद में 14 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में हर बार इसे नया रूप देने की घोषणा की जा रही है। यहां शौर्य स्मारक बनना तो दूर पांच साल पहले अमर ज्योति जलाने की घोषणा भी की थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल शौर्य दिवस पर आयोजित समारोह में 16 एकड़ जमीन खरीदकर इससे आधुनिक शौर्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी। इस एक साल में जमीन ही खरीदी जा सकी है। इस पर आगे का काम बाकी है।
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पुराने समय में पानीपत को दिल्ली का स्वागत द्वार कहा जाता था। अफगान से आने वाले आक्रमणकारी पानीपत से होकर आगे जाते थे। यहां तीन लड़ाई लड़ी गई। तीसरी लड़ाई 14 जनवरी 1761 को अहमद शाह अब्दाली के बीच लड़ी गई थी। तीसरी लड़ाई 14 जनवरी 1761 को अहमद शाह अब्दाली के बीच लड़ी गई थी। मराठों के सेनापति सदाशिव राव भाऊ थे। मराठा इस युद्ध में हार गए लेकिन अब्दाली भी इतना सहम गया था कि दोबारा हिंदुस्तान लौटकर नहीं आया।
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काला आंब का यह है प्रोजेक्ट
इतिहासकार रमेश पुहाल ने बताया कि काला आंब पानीपत-हरिद्वार स्टेट हाईवे पर उग्राखेड़ी गांव के नजदीक है। यह करीब छह एकड़ में हैं। यह मराठों की वीरता का प्रतीक भी है। बताया जाता है कि यहां इतना खून बहा था कि आम भी काला पड़ गया था। इसके बाद इस स्थल को काला आंब के नाम से जाना जाता है। काला आंब पर पांच साल पहले अमर ज्योति जलाने की घोषणा की थी। यह पानीपत रिफाइनरी द्वारा सीएसआर में लगाई जानी थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 14 जनवरी 2025 को शौर्य दिवस समारोह पर काला आंब आए थे। उन्होंने इसे महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार के सहयोग से शौर्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए 16 एकड़ जमीन खरीदी जानी थी। अब जमीन खरीदी जा चुकी है।
वर्जन :
काला आंब को शौर्य स्मारक बनाने के लिए 10 एकड़ जमीन खरीद ली गई है। सरकार के स्तर पर इसको अधिग्रहण किया जाना है। इसके बाद डीपीआर बनाकर काम शुरू किया जाएगा।
प्रदीप पाटिल, अध्यक्ष शौर्य स्मारक ट्रस्ट।
वर्जन :
काला आंब के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। इसका डिजाइन भी बेहतर बनाया जाएगा। इसके बाद इसमें ही पानीपत संग्रहालय स्थानांतरित किया जाएगा।
वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
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