{"_id":"6adbca47b0e84456e20a0bc2","slug":"demand-for-the-regularization-of-10757-guest-teachers-kurukshetra-news-c-45-1-kur1010-163135-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: 10,757 अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: 10,757 अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। प्रदेशभर के करीब 10,757 अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग के लिए 25 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र में न्याय रैली आयोजित की जाएगी। अतिथि अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से 21 अक्टूबर को सिरसा से शुरू की गई न्याय यात्रा रविवार को कुरुक्षेत्र पहुंचेगी। रैली के बाद अतिथि अध्यापक न्याय रथ के साथ पैदल चंडीगढ़ पहुंचकर राज्यपाल के समक्ष अपनी मांग रखेंगे। ये जानकारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण धाराशूल ने दी।
उन्होंने कहा कि अतिथि अध्यापक कई वर्षों से प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन नियमितीकरण का मुद्दा अब तक लंबित है। उन्होंने मांग की कि 25 मई 2026 को न्यायालय की ओर से दिए गए आदेश के अनुसार, हरियाणा सरकार की वर्ष 2014 में बनाई गई तीन वर्षीय नीति के तहत अतिथि अध्यापकों की सेवाएं नियमित की जाएं। उन्होंने कहा कि अतिथि अध्यापक पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं। सरकार को उनकी मांग पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
व्यक्तिगत सुनवाई के बाद भी निर्णय का इंतजार
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि अतिथि अध्यापकों से जुड़े मामलों में विभागीय स्तर पर व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन नियमितीकरण को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है। उन्होंने संबंधित मामलों का पारदर्शी तरीके से निपटारा करने और शिक्षकों को उनकी सेवा स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।मोर्चा ने कहा कि नियमितीकरण की मांग पूरी होने तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अतिथि अध्यापक कई वर्षों से प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन नियमितीकरण का मुद्दा अब तक लंबित है। उन्होंने मांग की कि 25 मई 2026 को न्यायालय की ओर से दिए गए आदेश के अनुसार, हरियाणा सरकार की वर्ष 2014 में बनाई गई तीन वर्षीय नीति के तहत अतिथि अध्यापकों की सेवाएं नियमित की जाएं। उन्होंने कहा कि अतिथि अध्यापक पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं। सरकार को उनकी मांग पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
विज्ञापन
व्यक्तिगत सुनवाई के बाद भी निर्णय का इंतजार
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि अतिथि अध्यापकों से जुड़े मामलों में विभागीय स्तर पर व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन नियमितीकरण को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है। उन्होंने संबंधित मामलों का पारदर्शी तरीके से निपटारा करने और शिक्षकों को उनकी सेवा स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।मोर्चा ने कहा कि नियमितीकरण की मांग पूरी होने तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
विज्ञापन