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Mahendragarh-Narnaul News: 27 गेटपास ई-नाम और 3 गेटपास ई-खरीद पोर्टल के तहत हुए जारी
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फोटो नंबर- 10सचिन, युवा किसान, गांव - अटेली
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नारनौल। सरसों खरीद के दौरान ई-खरीद पोर्टल पर गेटपास जारी करना अनिवार्य किए जाने के बावजूद मंडी में अधिकांश गेटपास ई-नाम पोर्टल के माध्यम से ही काटे जा रहे हैं। मंगलवार को कुल 30 गेटपास जारी हुए जिनमें से 27 ई-नाम और केवल 3 ई-खरीद पोर्टल पर जारी किए गए।
इसकी मुख्य वजह यह रही कि सरसों बेचने पहुंचे अधिकतर किसानों ने एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया था जबकि कुछ किसान सीमावर्ती राजस्थान क्षेत्र से आए थे। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब प्राइवेट मंडी में सरसों बेचने पर भी ई-खरीद पोर्टल के तहत ही गेटपास जारी करना अनिवार्य किया गया है।
हालांकि जिन किसानों का एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं है या जो अन्य राज्यों से आए हैं, उनके लिए ई-नाम पोर्टल के जरिए गेटपास जारी किए जा रहे हैं।
किसानों में बढ़ा रोष
प्राइवेट मंडियों में भी ई-खरीद पोर्टल से गेटपास अनिवार्य किए जाने के फैसले से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि बाजार में अधिक भाव मिलने पर वे व्यापारियों को फसल बेचते हैं लेकिन ई-खरीद पोर्टल से गेटपास लेने पर पूरी बिक्री राशि उनकी आय में जुड़ जाती है, जबकि उत्पादन लागत को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
भाव में तेजी, सरकारी खरीद शुरू नहीं
सरकारी खरीद एजेंसियों का अभी तक खाता नहीं खुला है, जबकि बाजार में सरसों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 42 प्रतिशत लैब गुणवत्ता वाली सरसों का भाव 7100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है और आगे भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मंगलवार को मंडी में करीब 600 क्विंटल सरसों की आवक हुई, जबकि अब तक कुल आवक लगभग 9100 क्विंटल तक पहुंच चुकी है।
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व्यापारियों को भी फसल बेचने पर ई-खरीद के तहत गेटपास कटवाने के निर्देश से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अभी तो मंडियों में सरसों की आवक कम है, लेकिन जैसे ही आवक बढ़ेगी गेटपास के लिए लाइन में लगना पड़ेगा। -सचिन, युवा किसान, अटेली
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बाजरे के समय जब किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ी थी तब सरकार ने खरीद से दूरी बनाई हुई थी। अब व्यापारियों को भी फसल बेचने पर ई-खरीद पोर्टल के तहत गेटपास जारी करवाने होंगे। जिससे किसानों में रोष व्याप्त है। -महाराम, किसान, ताजीपुर
वर्जन:
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार ही गेटपास जारी किए जा रहे हैं। जिन किसानों का एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं है, उन्हें ई-नाम पोर्टल के माध्यम से गेटपास दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ मंडी आएं, ताकि गेटपास जारी करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। -नुकुल यादव, सचिव मार्केट कमेटी।
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इसकी मुख्य वजह यह रही कि सरसों बेचने पहुंचे अधिकतर किसानों ने एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया था जबकि कुछ किसान सीमावर्ती राजस्थान क्षेत्र से आए थे। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब प्राइवेट मंडी में सरसों बेचने पर भी ई-खरीद पोर्टल के तहत ही गेटपास जारी करना अनिवार्य किया गया है।
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हालांकि जिन किसानों का एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं है या जो अन्य राज्यों से आए हैं, उनके लिए ई-नाम पोर्टल के जरिए गेटपास जारी किए जा रहे हैं।
किसानों में बढ़ा रोष
प्राइवेट मंडियों में भी ई-खरीद पोर्टल से गेटपास अनिवार्य किए जाने के फैसले से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि बाजार में अधिक भाव मिलने पर वे व्यापारियों को फसल बेचते हैं लेकिन ई-खरीद पोर्टल से गेटपास लेने पर पूरी बिक्री राशि उनकी आय में जुड़ जाती है, जबकि उत्पादन लागत को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
भाव में तेजी, सरकारी खरीद शुरू नहीं
सरकारी खरीद एजेंसियों का अभी तक खाता नहीं खुला है, जबकि बाजार में सरसों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 42 प्रतिशत लैब गुणवत्ता वाली सरसों का भाव 7100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है और आगे भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मंगलवार को मंडी में करीब 600 क्विंटल सरसों की आवक हुई, जबकि अब तक कुल आवक लगभग 9100 क्विंटल तक पहुंच चुकी है।
व्यापारियों को भी फसल बेचने पर ई-खरीद के तहत गेटपास कटवाने के निर्देश से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अभी तो मंडियों में सरसों की आवक कम है, लेकिन जैसे ही आवक बढ़ेगी गेटपास के लिए लाइन में लगना पड़ेगा। -सचिन, युवा किसान, अटेली
बाजरे के समय जब किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ी थी तब सरकार ने खरीद से दूरी बनाई हुई थी। अब व्यापारियों को भी फसल बेचने पर ई-खरीद पोर्टल के तहत गेटपास जारी करवाने होंगे। जिससे किसानों में रोष व्याप्त है। -महाराम, किसान, ताजीपुर
वर्जन:
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार ही गेटपास जारी किए जा रहे हैं। जिन किसानों का एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं है, उन्हें ई-नाम पोर्टल के माध्यम से गेटपास दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ मंडी आएं, ताकि गेटपास जारी करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। -नुकुल यादव, सचिव मार्केट कमेटी।