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Mahendragarh-Narnaul News: दर्द की राख से जली उम्मीद की लौ

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:25 PM IST
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After her daughter's death, Madhu began her journey towards self-reliance through a self-help group.
फोटो 04 तैयार किए प्राकृतिक पेंट के साथ खड़ी मधु। स्रोत: संवाद
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मंडी अटेली। क्षेत्र की मधु साल 2010 तक एक सामान्य गृहिणी की तरह घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं लेकिन उनकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल गई जब उनकी चार साल की बेटी का निधन हो गया। इस दुख ने उन्हें गहरे तनाव और अवसाद में डाल दिया।

परिवार ने उन्हें इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए काम करने की सलाह दी ताकि वे व्यस्त रहकर मानसिक तनाव से उबर सकें। इसी दौरान उन्होंने एक समाचार पत्र में नीलोखेड़ी में चल रहे स्वयं सहायता समूह प्रशिक्षण शिविर की खबर पढ़ी। वहीं से उनके जीवन में एक नई शुरुआत हुई।
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उन्होंने इस प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया और आत्मनिर्भर बनने का निर्णय लिया।प्रशिक्षण पूरा करने के बाद मधु ने 12 महिलाओं के साथ मिलकर अपना पहला स्वयं सहायता समूह बनाया। शुरुआत में बैंक खाता खुलवाने और औपचारिकताओं में कई कठिनाइयां आईं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
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बाद में सिहमा स्थित हरियाणा ग्रामीण बैंक के सहयोग से 50-50 रुपये की छोटी बचत से समूह की शुरुआत हुई। लगभग दो वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने रोजगार बढ़ाने के लिए लोन लिया। इस आर्थिक सहायता से समूह ने छोटे-छोटे काम शुरू किए।
मधु और उनकी टीम ने परचून की दुकान, ब्यूटी पार्लर, टेडी बियर निर्माण और कॉस्मेटिक स्टोर जैसे व्यवसाय शुरू किए। साथ ही वे घर पर बने खाद्य उत्पाद और प्राकृतिक पेंट यूनिट भी चला रही हैं। आज मधु न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि 150 से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर उनके जीवन में भी बदलाव ला चुकी हैं।
गृह उत्पादों से जुड़कर बनाई नई पहचान
धीरे-धीरे मधु राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना से जुड़ी और फिर ब्लॉक के 43 गांवों में महिला समूह बनाने का काम किया। समूह की महिलाओं को दरी, पायदान, लड्डू, अचार, नमकीन और अन्य घरेलू उत्पाद बनाकर स्वरोजगार की राह दिखाई। इन उत्पादों को सरस मेलों, गीता महोत्सव और जिलास्तरीय आयोजनों में खूब सराहना मिली। आज मधु अटल किसान कैंटीन का संचालन भी करती हैं जहां पर 10 रुपये में श्रमिकों को खाना उपलब्ध कराते हैं।
प्राकृतिक पेंट भी बना रहीं
कटकई में 10 महिलाओं के साथ उन्होंने प्राकृतिक पेंट की यूनिट भी शुरू की जिसमें देसी गाय के गोबर से एंटी बैक्टीरियल पेंट बनता है। वहीं, महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मशरूम उत्पादन भी शुरू किया है।
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