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Mahendragarh-Narnaul News: सम्मेलन में प्रो. अरिंदम को बनाया आईएए का अध्यक्ष
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में तीन दिन चले 48वें अखिल भारतीय लेखांकन सम्मेलन एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। सम्मेलन में देशभर से 800 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 500 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन में विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. अरिंदम गुप्ता को भारतीय लेखांकन संघ (आईएए) का नया अध्यक्ष चुना गया। हकेंवि के वाणिज्य विभाग के प्रो. राजेंद्र प्रसाद मीणा को संघ का कनिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया।
समापन सत्र में एपीएस विश्वविद्यालय, रीवा के पूर्व कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल मुख्य अतिथि रहे। राजस्थान के राज्यपाल के सलाहकार और वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी तथा राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर के कुलपति प्रो. रमन कुमार दवे विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
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प्रो. करुणेश सक्सेना ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक लेखांकन के बीच तालमेल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र और वेदों में लेखांकन से जुड़े संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ना बड़ी चुनौती है।
प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत से ज्यादा है जबकि दुनिया का औसत करीब तीन प्रतिशत है। इसके बावजूद वाणिज्य पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी चिंता की बात है।
सम्मेलन के तीन तकनीकी सत्रों में पेश शोध-पत्रों में से सर्वश्रेष्ठ को पुरस्कृत किया गया। हकेंवि के वाणिज्य विभाग की छात्राओं अन्नू और प्रेरणा को दूसरे तकनीकी सत्र में सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र का पुरस्कार मिला। संवाद
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सम्मेलन में विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. अरिंदम गुप्ता को भारतीय लेखांकन संघ (आईएए) का नया अध्यक्ष चुना गया। हकेंवि के वाणिज्य विभाग के प्रो. राजेंद्र प्रसाद मीणा को संघ का कनिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया।
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समापन सत्र में एपीएस विश्वविद्यालय, रीवा के पूर्व कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल मुख्य अतिथि रहे। राजस्थान के राज्यपाल के सलाहकार और वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी तथा राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर के कुलपति प्रो. रमन कुमार दवे विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
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प्रो. करुणेश सक्सेना ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक लेखांकन के बीच तालमेल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र और वेदों में लेखांकन से जुड़े संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ना बड़ी चुनौती है।
प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत से ज्यादा है जबकि दुनिया का औसत करीब तीन प्रतिशत है। इसके बावजूद वाणिज्य पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी चिंता की बात है।
सम्मेलन के तीन तकनीकी सत्रों में पेश शोध-पत्रों में से सर्वश्रेष्ठ को पुरस्कृत किया गया। हकेंवि के वाणिज्य विभाग की छात्राओं अन्नू और प्रेरणा को दूसरे तकनीकी सत्र में सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र का पुरस्कार मिला। संवाद