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Mahendragarh-Narnaul News: धोखाधड़ी मामले में पूर्व नायब तहसीलदार की जमानत याचिका खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 29 Mar 2026 12:05 AM IST
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नारनौल। धोखाधड़ी कर दो कंपनियों की संपत्तियों की रजिस्ट्री करने के मामले में एडीजे हर्षाली चौधरी की अदालत ने आरोपी पूर्व नायब तहसीलदार जगदीश चंद्र की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले की गहराई तक जाने, अन्य साजिशकर्ताओं की पहचान करने और दस्तावेजों की बरामदगी के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
पुलिस के अनुसार 25 जुलाई 2024 को पर्ल्स इंवेस्टर्स वेलफेयर ट्रस्ट हिसार के अध्यक्ष मनदीप काजला की ओर से डाक के माध्यम से एक शिकायत सतनाली थाने में प्राप्त हुई थी। इसमें बताया गया था कि ट्रस्ट पीएसीएल और पीजीएफ लिमिटेड से जुड़े निवेशकों के हितों के लिए काम करती है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि 22 फरवरी 2014 को सीबीआई ने उक्त दोनों और उनकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियों और बैंक खातों को जब्त कर लिया था। सर्वोच्च न्यायालय (लोढ़ा कमेटी) ने कंपनियों की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था।
इसके बाद भी सोनीपत निवासी जगदीश चंद्र ने नायब तहसीलदार के पद पर रहते हुए नियमों का उल्लंघन कर इन संपत्तियों की रजिस्ट्री की। आरोप है कि उन्होंने बिना उचित एनओसी और रिकॉर्ड की जांच किए इन अवैध बिक्री दस्तावेजों को पंजीकृत किया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि जगदीश चंद्र एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं और उन्होंने केवल अपना आधिकारिक कर्तव्य निभाया है। उन्होंने दावा किया कि रजिस्ट्री नियमानुसार और सत्यापन के बाद की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि आवेदक जांच में शामिल होने के लिए तैयार है और उसे झूठा फंसाया गया है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है जिसमें हजारों निवेशकों का पैसा जुड़ा है। ऐसे सबूत हैं जो आवेदक की भूमिका पर संदेह पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर संपत्तियों को वैधता देने की कोशिश की गई है। इसके लिए आरोपी से पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत जरूरी है और अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया।
इनसेट
कृषि भूमि विकास और रियल एस्टेट के नाम पर बनाई संपत्ति
पीएसीएल और पीजीएफ कंपनियों ने कृषि भूमि विकास और रियल एस्टेट के नाम पर देशभर में, विशेषकर उत्तर भारत में करोड़ों-अरबों रुपये की संपत्तियां बनाई थीं। इन कंपनियों की संपत्ति मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सबसे अधिक होने की बात सामने आई है। अकेले हरियाणा में 1841 एकड़ से ज्यादा जमीन होने का जिक्र है।
बॉक्स:
ईडी ने सात हजार करोड़ की संपत्ति की कुर्क
ईडी ने इन कंपनियों की 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल और अचल संपत्ति कुर्क की है। इन संपत्तियों में कृषि भूमि, व्यावसायिक भूखंड और लग्जरी कारें तक शामिल हैं। इन जमीनों को अब सेबी और जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी नीलामी के जरिए बेचकर निवेशकों का पैसा वापस कर रही है।
बॉक्स:
निवेशकों को लौटाने थे 49 हजार करोड़
पीएसीएल और पीजीएफ कंपनियों की संपत्तियां दिसंबर 2015 में सेबी की ओर से फ्रीज/कुर्क की गई थीं, जब कंपनी ने निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपये से अधिक का पैसा वापस करने में विफलता दिखाई थी।
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पुलिस के अनुसार 25 जुलाई 2024 को पर्ल्स इंवेस्टर्स वेलफेयर ट्रस्ट हिसार के अध्यक्ष मनदीप काजला की ओर से डाक के माध्यम से एक शिकायत सतनाली थाने में प्राप्त हुई थी। इसमें बताया गया था कि ट्रस्ट पीएसीएल और पीजीएफ लिमिटेड से जुड़े निवेशकों के हितों के लिए काम करती है।
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शिकायत में आरोप लगाया गया कि 22 फरवरी 2014 को सीबीआई ने उक्त दोनों और उनकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियों और बैंक खातों को जब्त कर लिया था। सर्वोच्च न्यायालय (लोढ़ा कमेटी) ने कंपनियों की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था।
इसके बाद भी सोनीपत निवासी जगदीश चंद्र ने नायब तहसीलदार के पद पर रहते हुए नियमों का उल्लंघन कर इन संपत्तियों की रजिस्ट्री की। आरोप है कि उन्होंने बिना उचित एनओसी और रिकॉर्ड की जांच किए इन अवैध बिक्री दस्तावेजों को पंजीकृत किया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि जगदीश चंद्र एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं और उन्होंने केवल अपना आधिकारिक कर्तव्य निभाया है। उन्होंने दावा किया कि रजिस्ट्री नियमानुसार और सत्यापन के बाद की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि आवेदक जांच में शामिल होने के लिए तैयार है और उसे झूठा फंसाया गया है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है जिसमें हजारों निवेशकों का पैसा जुड़ा है। ऐसे सबूत हैं जो आवेदक की भूमिका पर संदेह पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर संपत्तियों को वैधता देने की कोशिश की गई है। इसके लिए आरोपी से पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत जरूरी है और अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया।
इनसेट
कृषि भूमि विकास और रियल एस्टेट के नाम पर बनाई संपत्ति
पीएसीएल और पीजीएफ कंपनियों ने कृषि भूमि विकास और रियल एस्टेट के नाम पर देशभर में, विशेषकर उत्तर भारत में करोड़ों-अरबों रुपये की संपत्तियां बनाई थीं। इन कंपनियों की संपत्ति मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सबसे अधिक होने की बात सामने आई है। अकेले हरियाणा में 1841 एकड़ से ज्यादा जमीन होने का जिक्र है।
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ईडी ने सात हजार करोड़ की संपत्ति की कुर्क
ईडी ने इन कंपनियों की 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल और अचल संपत्ति कुर्क की है। इन संपत्तियों में कृषि भूमि, व्यावसायिक भूखंड और लग्जरी कारें तक शामिल हैं। इन जमीनों को अब सेबी और जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी नीलामी के जरिए बेचकर निवेशकों का पैसा वापस कर रही है।
बॉक्स:
निवेशकों को लौटाने थे 49 हजार करोड़
पीएसीएल और पीजीएफ कंपनियों की संपत्तियां दिसंबर 2015 में सेबी की ओर से फ्रीज/कुर्क की गई थीं, जब कंपनी ने निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपये से अधिक का पैसा वापस करने में विफलता दिखाई थी।