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Mahendragarh-Narnaul News: महेंद्रगढ़ के किसान ओमप्रकाश को मिलेगा प्रगतिशील किसान अवाॅर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:14 AM IST
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फोटो संख्या:71- किसान ओमप्रकाश यादव
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महेंद्रगढ़। प्राकृतिक खेती कर अलग पहचान बनाने वाले शहर के मोहल्ला लाला वाला कुआं निवासी किसान ओमप्रकाश यादव को प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित होने वाले कृषि मेले में प्रगतिशील किसान अवाॅर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश यादव ने बताया कि वर्ष 2017 में कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ से प्रशिक्षण लेकर प्राकृतिक खेती शुरू की थी। जैविक व प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जिससे उनकी फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और लागत में भी कमी आई। वर्तमान में वह करीब एक एकड़ 8 मरला भूमि में प्राकृतिक गेंहू व सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
वह आधे एकड़ में प्राकृतिक तरीके से गेहूं, आधे एकड़ में तरबूज, प्याज, गाजर, लहसुन, बंद गोभी, फूल गोभी, बेंगन, हल्दी व सोंठ की खेती कर रहे हैं। उनकी सालाना आय करीब 70 से 80 हजार रुपये तक पहुंच जाती है जबकि कुल लागत 8 से 10 हजार रुपये के बीच रहती है। इसमें उसकी पत्नी पूनम व परिवार का सहयोग रहा है।
जनवरी में उनकी पत्नी पूनम ने धारुहेड़ा में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया है। प्राकृतिक खेती ने उनकी आमदनी को दोगुना करने में अहम भूमिका निभाई है। सही योजना, मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन 4 से 5 किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी मुहिया करवा रहा है। इसके अतिरिक्त वह किसानों को निशुल्क सब्जियों के बीज वितरित कर रहा है। उन्हाेंने कहा उसका लक्ष्य प्राकृतिक खेत करके धरती माता को जहर मुक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि सोंठ व हल्दी की खेती के लिए दूसरे किसानों को भी जानकारी दे रहे हैं।
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प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश यादव ने बताया कि वर्ष 2017 में कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ से प्रशिक्षण लेकर प्राकृतिक खेती शुरू की थी। जैविक व प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जिससे उनकी फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और लागत में भी कमी आई। वर्तमान में वह करीब एक एकड़ 8 मरला भूमि में प्राकृतिक गेंहू व सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
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वह आधे एकड़ में प्राकृतिक तरीके से गेहूं, आधे एकड़ में तरबूज, प्याज, गाजर, लहसुन, बंद गोभी, फूल गोभी, बेंगन, हल्दी व सोंठ की खेती कर रहे हैं। उनकी सालाना आय करीब 70 से 80 हजार रुपये तक पहुंच जाती है जबकि कुल लागत 8 से 10 हजार रुपये के बीच रहती है। इसमें उसकी पत्नी पूनम व परिवार का सहयोग रहा है।
जनवरी में उनकी पत्नी पूनम ने धारुहेड़ा में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया है। प्राकृतिक खेती ने उनकी आमदनी को दोगुना करने में अहम भूमिका निभाई है। सही योजना, मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन 4 से 5 किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी मुहिया करवा रहा है। इसके अतिरिक्त वह किसानों को निशुल्क सब्जियों के बीज वितरित कर रहा है। उन्हाेंने कहा उसका लक्ष्य प्राकृतिक खेत करके धरती माता को जहर मुक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि सोंठ व हल्दी की खेती के लिए दूसरे किसानों को भी जानकारी दे रहे हैं।