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Mahendragarh-Narnaul News: विकास कार्यों में देरी का विरोध, जिला प्रमुख सहित 17 पार्षदों ने बैठक का किया बहिष्कार
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फोटो नंबर-06बैठक का बहिष्कार कर रोष व्यक्त करते जिला पार्षद। संवाद
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नारनौल। जिले में विकास कार्यों में देरी और प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में सोमवार को जिला परिषद की प्रस्तावित बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। जिला परिषद के 19 में से 17 पार्षद बैठक में पहुंचे लेकिन उन्होंने कार्यवाही में शामिल होने के बजाय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिला प्रमुख राकेश कुमार भी पार्षदों के साथ बहिष्कार में शामिल रहे।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि पिछली बैठकों में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर कई फैसले लिए गए थे लेकिन उन पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ। उनके मुताबिक करीब 300 विकास प्रस्ताव लंबित हैं जिनकी अनुमानित लागत 50 से 60 करोड़ रुपये है।
पार्षदों का कहना है कि कई विकास कार्यों के बिल पिछले दो साल से अटके हुए हैं। जनवरी के बाद से कोई नया काम स्वीकृत नहीं हुआ और पिछले छह महीनों में एक भी नया विकास कार्य शुरू नहीं किया गया।
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बैठक में विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी पार्षदों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पंचायत विभाग को छोड़कर दूसरे विभागों के अधिकारी बैठकों में नहीं आते। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की समस्याओं और विकास प्रस्तावों पर कार्रवाई कैसे होगी। पार्षदों ने प्रशासन से लंबित कार्यों पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है, ताकि आचार संहिता लागू होने तक काम लंबित रहें। उन्होंने प्रक्रिया में अनियमितता, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के भी आरोप लगाए और प्रशासन से लंबित प्रस्तावों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मांगें नहीं मानीं तो सामूहिक इस्तीफा देंगे पार्षद
पार्षदों ने प्रशासन को 10 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि लंबित प्रस्तावों और विकास कार्यों को लेकर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। पार्षदों ने कहा कि जनता ने उन्हें क्षेत्र के विकास के लिए चुना है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नहीं मिलने के कारण वे अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।
वर्जन 1
लंबे समय से जिला परिषद के अटके विकास कार्यों को लेकर प्रशासन को दस दिन का समय दिया गया है, अगर हमारी मांग पर कार्रवाई नहीं होती है तो न केवल सामूहिक इस्तीफा दिया जाएगा। हम मुख्यमंत्री से मिलकर भी अपनी मांग उनके सम्मुख रखेंगे।
-डॉ. राकेश कुमार, जिला प्रमुख
वर्जन 2
बैठक में अन्य विभागों के अधिकारियों के नहीं पहुंचने को लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके अलावा जो विकास कार्य नहीं हो रहे उनकी भी जांच करवाई जाएगी।-तरुण पवारिया, एडीसी, नारनौल
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पार्षदों ने आरोप लगाया कि पिछली बैठकों में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर कई फैसले लिए गए थे लेकिन उन पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ। उनके मुताबिक करीब 300 विकास प्रस्ताव लंबित हैं जिनकी अनुमानित लागत 50 से 60 करोड़ रुपये है।
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पार्षदों का कहना है कि कई विकास कार्यों के बिल पिछले दो साल से अटके हुए हैं। जनवरी के बाद से कोई नया काम स्वीकृत नहीं हुआ और पिछले छह महीनों में एक भी नया विकास कार्य शुरू नहीं किया गया।
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बैठक में विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी पार्षदों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पंचायत विभाग को छोड़कर दूसरे विभागों के अधिकारी बैठकों में नहीं आते। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की समस्याओं और विकास प्रस्तावों पर कार्रवाई कैसे होगी। पार्षदों ने प्रशासन से लंबित कार्यों पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है, ताकि आचार संहिता लागू होने तक काम लंबित रहें। उन्होंने प्रक्रिया में अनियमितता, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के भी आरोप लगाए और प्रशासन से लंबित प्रस्तावों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मांगें नहीं मानीं तो सामूहिक इस्तीफा देंगे पार्षद
पार्षदों ने प्रशासन को 10 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि लंबित प्रस्तावों और विकास कार्यों को लेकर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। पार्षदों ने कहा कि जनता ने उन्हें क्षेत्र के विकास के लिए चुना है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नहीं मिलने के कारण वे अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।
वर्जन 1
लंबे समय से जिला परिषद के अटके विकास कार्यों को लेकर प्रशासन को दस दिन का समय दिया गया है, अगर हमारी मांग पर कार्रवाई नहीं होती है तो न केवल सामूहिक इस्तीफा दिया जाएगा। हम मुख्यमंत्री से मिलकर भी अपनी मांग उनके सम्मुख रखेंगे।
-डॉ. राकेश कुमार, जिला प्रमुख
वर्जन 2
बैठक में अन्य विभागों के अधिकारियों के नहीं पहुंचने को लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके अलावा जो विकास कार्य नहीं हो रहे उनकी भी जांच करवाई जाएगी।-तरुण पवारिया, एडीसी, नारनौल