सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Situation... If your hands or legs get broken in an accident, bring plaster material with you.

Mahendragarh-Narnaul News: सूरते-हाल...दुर्घटना में हाथ-पैर टूट जाए तो प्लास्टर का सामान साथ लेकर आएं

संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 25 Feb 2026 12:08 AM IST
विज्ञापन
Situation... If your hands or legs get broken in an accident, bring plaster material with you.
फोटो नंबर- 10हड्डी रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
विज्ञापन
नारनौल। अगर किसी दुर्घटना में आपके हाथ या पैर की हट्टी टूट जाए तो नागरिक अस्पताल में प्लास्टर का सामान साथ लेकर आएं। इन दिनों अस्पताल में प्लास्टर के लिए जरूरी सामान पीओपी व पट्टियां खत्म हैं। कैल्शियम की दवा तक नहीं है। ऐसे में मरीजों को प्लास्टर का सामान खरीद कर लाना पड़ रहा है।
Trending Videos

नारनौल स्थित नागरिक अस्पताल में प्लास्टर का सामान नहीं होने के कारण मरीजों पर 500 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। जैसे ही हड्डी रोग विशेषज्ञ मरीज को प्लास्टर करवाने के लिए प्लास्टर कक्ष में भेजते हैं तो बताया जाता है कि प्लास्टर करवाने का सामान बाहर से लाना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों के प्लास्टर किए जाते हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से पट्टियां खरीदकर लानी पड़ रही हैं, जिससे उनके इलाज का खर्च बढ़ गया है।
नागरिक अस्पताल नारनौल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी प्रतिदिन लगभग 200 से 250 मरीजों की रहती है। इनमें दुर्घटना, गिरने या अन्य कारणों से हाथ-पैर टूटने और फ्रैक्चर के मरीजों की संख्या भी काफी अधिक होती है।
अस्पताल में प्लास्टर के लिए जरूरी पट्टियां खत्म होने के कारण मरीजों को तुरंत सुविधा नहीं मिल पा रही है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद से वे यहां आते हैं, लेकिन अब उन्हें प्लास्टर करवाने के लिए बाहर से सामान खरीदना पड़ रहा है।
एक बार प्लास्टर करवाने पर मरीज को करीब 500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है।

हड्डी रोग से परेशान मरीजों को कैल्शियम की दवा भी नहीं मिल रही है। हड्डी रोग से जुड़े मरीजों की प्रतिदिन 200 से 250 ओपीडी रहती है। अब इन मरीजों को कैल्शियम की दवा भी अस्पताल में नहीं मिल रही है। इसकी वजह से मरीजों को दवा भी बाहर से खरीदनी पड़ रही है।


केस 1
मेरी माताजी के पैर की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया था। डॉक्टर ने प्लास्टर करवाने के लिए पर्ची पर लिख दिया लेकिन जब प्लास्टर कक्ष में गए तो पता चला की सामग्री नहीं है। इसके चलते मजबूरन बाहर से प्लास्टर में प्रयोग होने वाली पीओपी व अन्य पट्टियां लेकर आनी पड़ी।-योगेश, धोलेड़ा।
केस 2
राजस्थान के गांव खेतड़ी से पैर का उपचार करवाने आई थी। डॉक्टर ने कच्चा प्लास्टर करवाने के लिए लिखा लेकिन प्लास्टर का सामान उपलब्ध नहीं होने के कारण स्वयं के खर्च से बाहर से लाना पड़ा। प्लास्टर कक्ष में बस सामान्य चोट में प्रयोग की जाने वाली पट्टी ही उपलब्ध है।-कुसुम लता, खेतड़ी।


वर्जन :
प्लास्टर में प्रयोग होने वाली सामग्री की मांग उच्च विभाग को भेजी गई है। जल्द ही सामग्री नागरिक अस्पताल में पहुंच जाएगी, जिसके बाद मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।-डॉ. कंवर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल, नारनौल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed