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Palwal News: श्रमिकों की कमी से नहीं उठ रहा अनाज, गोदामों के बाहर लगीं ट्रकों की कतार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 04:09 PM IST
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Due to a shortage of workers, grain is not being lifted, and trucks queue up outside warehouses.
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मंडियों में गहराया संकट, श्रमिकों की कमी से ट्रक अटके, भुगतान में भी देरी

संवाद न्यूज एजेंसी

पलवल। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद के साथ उठान प्रक्रिया गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। मंडी में खरीदी गई फसल समय पर नहीं उठ पा रही। कारण- श्रमिकों की कमी का होना बताया जा रहा है। शहर में अल्हापुर, बहरोला और घूघेरा कुल तीन सरकारी गोदाम हैं। इन्हीं में अनाज का भंडारण किया जाता है। इनमें से बहरोला स्थित गोदाम पूरी तरह भर चुका है। वहीं, बाकी दो गोदामों में अनाज अनलोड करने के लिए श्रमिकों की भारी कमी बनी हुई है।
श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण ट्रकों की अनलोडिंग में देरी हो रही है। इससे मंडी से उठान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। स्थानीय आढ़तियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय हालात और गैस की कमी के चलते कई श्रमिक अपने घर लौट चुके हैं। इस वजह से मंडी में कामकाज पर भी असर पड़ा है। ट्रकों के लंबे समय तक खड़े रहने के कारण मंडी में गेहूं के ढेर भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
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सिर्फ 50 फीसदी गेहूं का ही हो सका उठान

जिले के सभी अनाज मंडियों में सिर्फ 50 फीसदी गेहूं का ही उठान अब तक हो सका है। अब तक करीब 30 लाख 26 हजार 56 क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। इसमें से 26 लाख 77 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। बावजूद केवल 13 लाख 11 हजार 410 क्विंटल गेहूं का ही उठान किया गया है। उठान की धीमी गति के कारण मंडी परिसर में भंडारण की समस्या उत्पन्न हो गई है और खुले में रखा अनाज खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

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गोदाम के बाहर लगा ट्रकों का काफिला

अनाज उठाने में श्रमिकों की कमी बड़ी समस्या बनती जा रही है। जिले के अधिकांश मंडियों में प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। ईरान-इस्राइल युद्ध के बाद अधिकांश श्रमिक अपने गांव वापस लौट गए हैं। लोडिंग और अनलोडिंग के लिए पर्याप्त श्रमिक नहीं मिलने के कारण ठेकेदार समय पर ट्रकों को खाली नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण गोदामों के बाहर ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुईं हैं। इस देरी का असर मंडियों में भी दिख रहा है, जहां अनाज का उठान न होने से फसल पड़ी हुई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को पलवल साइलो (गोदाम) का निरीक्षण किया था। मौके पर लेबर की कमी के कारण फसल से भरे वाहनों को खाली करने में हो रही देरी पर उन्होंने नाराजगी भी जताई थी। उन्होंने टर्मिनल मैनेजर, ठेकेदार और एफसीआई अधिकारियों से बातचीत कर तुरंत मैनपावर बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भी उठान प्रक्रिया में तेजी नहीं आई है।


सिर्फ चार हजार किसानों का ही हुआ भुगतान

प्रदेश सरकार ने 72 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान भेजने का वादा किया था। जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कई मंडियों में15 दिन बाद भी किसानों को उनकी फसल का पैसा नहीं मिल पाया है। किसानों को अपनी फसल बेचने के बाद भी आढ़तियों और अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है। भुगतान में देरी और उठान की धीमी प्रक्रिया ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। पलवल अनाज मंडी में भुगतान की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। पिछले 23 दिनों में केवल चार हजार किसानों को ही उनकी फसल का भुगतान किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अबतक 75 करोड़ रुपए के भुगतान किसानों को किया जा चुका हैं। आढ़तियों का कहना है कि समय पर उठान न होने से भुगतान प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

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अधिकांश ठेकेदार यूपी-बिहार के श्रमिकों पर निर्भर हैं। कई श्रमिक अपने गांव लौट गए हैं। वहीं, बचे श्रमिक अलग-अलग मंडियों में काम कर रहे हैं। इससे कमी आई है, जिसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। -बलदेव सैनी, खरीद अधिकारी, पलवल अनाज मंडी
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