सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   FD Scam in Panchkula municipal Corporation kotak bank Conspiracy hatched during COVID

पंचकूला निगम में एफडी घोटाला: कोरोना काल में रची गई साजिश, बेनामी खातों से एफडी में किया गया हेरफेर

दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Fri, 27 Mar 2026 01:39 PM IST
विज्ञापन
सार

कोटक महिंद्रा बैंक के साथ निगम के बैंकिंग संबंध 2018 में शुरू हुए लेकिन घोटाले का असली खेल 28 मई 2020 को शुरू हुआ। इसी दिन सेक्टर-11 स्थित बैंक शाखा में निगम के नाम पर एक गुप्त खाता (नंबर 2015073031) सक्रिय किया गया, जिसका निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं था।

FD Scam in Panchkula municipal Corporation kotak bank Conspiracy hatched during COVID
पंचकूला नगर निगम - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार

पंचकूला नगर निगम के 158 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वित्त विभाग की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की साजिश कोरोना काल के दौरान रची गई और 2018 से 2026 के बीच बेनामी खातों के जरिए एफडी में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया।
Trending Videos


जांच के अनुसार, कोटक महिंद्रा बैंक के साथ निगम के बैंकिंग संबंध 2018 में शुरू हुए लेकिन घोटाले का असली खेल 28 मई 2020 को शुरू हुआ। इसी दिन सेक्टर-11 स्थित बैंक शाखा में निगम के नाम पर एक गुप्त खाता (नंबर 2015073031) सक्रिय किया गया, जिसका निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं था। इसके बाद 2022 में दो और खाते (नंबर 2046279112 और 2046903758) खोले गए। आशंका है कि इन खातों के जरिए एफडी की रकम को घुमाकर बाहर निकाला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

चार खातों से चला पूरा खेल

जांच में सामने आया है कि निगम के नाम पर कुल चार खाते संचालित हो रहे थे, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल दो खातों का ही जिक्र था। एफडी की राशि सीधे ट्रांसफर करने के बजाय पहले इन गुप्त खातों में डाली जाती थी जिससे हेरफेर लंबे समय तक छिपा रहा।

खाता संख्या 2015073031 (28 मई 2020 से 25 मार्च 2026)
खाता संख्या 2046279112 (8 जून 2022 से 25 मार्च 2026)
खाता संख्या 2013457703 (27 अक्तूबर 2018 से 25 मार्च 2026)
खाता संख्या 2046903758 (26 अगस्त 2022 से 25 मार्च 2026)

वित्त विभाग की जांच में खुला खेल

घोटाले की भनक लगने पर वित्त विभाग ने 18 फरवरी और 17 मार्च 2026 को विशेष जांच समिति गठित की। जांच में पाया गया कि जिस खाते में 50.07 करोड़ रुपये होने चाहिए थे, वहां केवल 2.17 करोड़ रुपये ही बचे थे। इसके बाद विजिलेंस ने जांच तेज कर दी।

आठ साल का रिकॉर्ड खंगाल रही विजिलेंस

विजिलेंस टीम ने 2018 से 2026 तक के सभी बैंकिंग और दस्तावेजी रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं। अब यह जांच की जा रही है कि इतने लंबे समय तक ऑडिट के दौरान इन खातों और लेन-देन की गड़बड़ी सामने क्यों नहीं आई। साथ ही गिरफ्तार आरोपी दिलीप सिंह राघव के 2018 से अब तक के संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed