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Panipat News: पहले समंदर में उतारा गया मुझे, फिर प्यास की हदों से गुजारा गया मुझे...
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काव्य गोष्ठी में कविता पढ़ते डॉ. सोनिया सोनम 'अक्स'। स्रोत : मंच
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पानीपत। पहले समंदर में उतारा गया मुझे, फिर प्यास की हदों से गुजारा गया मुझे, जिंदा हूं इसलिए कि मैं उर्दू जबान हूं, वरना हर इक मुकाम पे मारा गया मुझे।।अंकन साहित्यिक मंच और आर्य पीजी कॉलेज में कॉलेज की हिंदी साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अंबाला के विश्वविख्यात गजलकार डॉ. नफस अंबालवी और अमेरिका से दिल्ली के दंपती अंतरराष्ट्रीय व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार डॉ. सुधा नवल विशेष रूप से शामिल हुईं।
काव्य गोष्ठी के सत्र की अध्यक्षता डॉ. नफस अंंबालवी ने की। मुख्यातिथि डॉ. हरीश नवल और विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा नवल व चंडीगढ़ के विख्यात गजलकार नवीन नीर रहे। मंच संचालन अंकन मंच की संयोजिका डॉ. सोनिया सोनम अक्स ने किया। आर्य पीजी कॉलेज से डॉ. अनुराधा सिंह ने सबका स्वागत किया। मंच के संरक्षक डॉ. एपी जैन और हिंदी परिषद के संयोजक डॉ. विजय सिंह ने सबका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सुभाष भाटिया, डॉ. पंकज चौधरी, डॉ. कंचन प्रभाती, डॉ. शालिनी, गोपाल मालिक व कविता मलिक मौजूद रही। नफस अंबालवी ने कहा कि पहले समंदर में उतारा गया मुझे, फिर प्यास की हदों से गुजारा गया मुझे, जिंदा हूं इसलिए कि मैं उर्दू जबान हूं, वरना हर इक मुकाम पे मारा गया मुझे।। डॉ. हरीश नवल ने कहा कि उठो साथियों, निज धर्म बिक न जाए, बहनों जगो, निज शर्म बिक न जाए, यही आरजू है मेरी कविगणों से कि सब कुछ बिके पर कलम बिक न जाएं।।
डॉ. सुधा नवल ने कहा कि जितना तप यशोधरा के व्यक्तित्व में है, शायद ही किसी बुद्ध में हो, जितना संघर्ष इस मुट्ठी भर हृदय में है, शायद ही किसी युद्ध में हो।। नवीन नीर ने कहा कि तबाही अपने हाथों से ही अपनी यार मत करना, मैं कहना चाहता हूं ये किसी से प्यार मत करना, डुबोने में बहुत माहिर यहां के लोग हैं प्यारे, इशारों पे कभी दरिया किसी के पार मत करना।। डॉ. सोनिया सोनम अक्स ने कहा कि मुझको यूं जीने की आदत है तो है, खुद की खुद से ही मोहब्बत है तो है, सब गमों को ठोकरों पर रखती हूं, अब जमाने को शिकायत है तो है।। डॉ. एपी जैन ने कहा कि वक्त की जादूगरी का कमाल देखिए, आदमी में से इंसान गायब कर दिया, गोया कि डिब्बा बाहर से तो साबूत रहा, सारा कीमती सामान गायब कर दिया।। मनु बदायूंनी ने कहा कि हमसफर हर मामले में उम्र भर ज्यादा लगा, बेटियों में घर चलाने का हुनर ज्यादा लगा, हमसफर ने आके ही मेरा मकान घर कर दिया, बेटी के आने से मुझको घर वो घर ज्यादा लगा।। आराधना सिंह अनु ने कहा कि आधुनिक हूं मैं मगर रिश्तों से कब अनजान हूं, रागिनी हूं प्रेम की नवयुग का मैं अभियान हूं। धड़कने परिवार की हूं धर्म के प्रति हूं सजग, नाज है अबला नहीं मैं, शक्ति की पहचान हूं।।
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काव्य गोष्ठी के सत्र की अध्यक्षता डॉ. नफस अंंबालवी ने की। मुख्यातिथि डॉ. हरीश नवल और विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा नवल व चंडीगढ़ के विख्यात गजलकार नवीन नीर रहे। मंच संचालन अंकन मंच की संयोजिका डॉ. सोनिया सोनम अक्स ने किया। आर्य पीजी कॉलेज से डॉ. अनुराधा सिंह ने सबका स्वागत किया। मंच के संरक्षक डॉ. एपी जैन और हिंदी परिषद के संयोजक डॉ. विजय सिंह ने सबका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सुभाष भाटिया, डॉ. पंकज चौधरी, डॉ. कंचन प्रभाती, डॉ. शालिनी, गोपाल मालिक व कविता मलिक मौजूद रही। नफस अंबालवी ने कहा कि पहले समंदर में उतारा गया मुझे, फिर प्यास की हदों से गुजारा गया मुझे, जिंदा हूं इसलिए कि मैं उर्दू जबान हूं, वरना हर इक मुकाम पे मारा गया मुझे।। डॉ. हरीश नवल ने कहा कि उठो साथियों, निज धर्म बिक न जाए, बहनों जगो, निज शर्म बिक न जाए, यही आरजू है मेरी कविगणों से कि सब कुछ बिके पर कलम बिक न जाएं।।
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डॉ. सुधा नवल ने कहा कि जितना तप यशोधरा के व्यक्तित्व में है, शायद ही किसी बुद्ध में हो, जितना संघर्ष इस मुट्ठी भर हृदय में है, शायद ही किसी युद्ध में हो।। नवीन नीर ने कहा कि तबाही अपने हाथों से ही अपनी यार मत करना, मैं कहना चाहता हूं ये किसी से प्यार मत करना, डुबोने में बहुत माहिर यहां के लोग हैं प्यारे, इशारों पे कभी दरिया किसी के पार मत करना।। डॉ. सोनिया सोनम अक्स ने कहा कि मुझको यूं जीने की आदत है तो है, खुद की खुद से ही मोहब्बत है तो है, सब गमों को ठोकरों पर रखती हूं, अब जमाने को शिकायत है तो है।। डॉ. एपी जैन ने कहा कि वक्त की जादूगरी का कमाल देखिए, आदमी में से इंसान गायब कर दिया, गोया कि डिब्बा बाहर से तो साबूत रहा, सारा कीमती सामान गायब कर दिया।। मनु बदायूंनी ने कहा कि हमसफर हर मामले में उम्र भर ज्यादा लगा, बेटियों में घर चलाने का हुनर ज्यादा लगा, हमसफर ने आके ही मेरा मकान घर कर दिया, बेटी के आने से मुझको घर वो घर ज्यादा लगा।। आराधना सिंह अनु ने कहा कि आधुनिक हूं मैं मगर रिश्तों से कब अनजान हूं, रागिनी हूं प्रेम की नवयुग का मैं अभियान हूं। धड़कने परिवार की हूं धर्म के प्रति हूं सजग, नाज है अबला नहीं मैं, शक्ति की पहचान हूं।।