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Panipat: धर्मांतरण, जनसंख्या असंतुलन और महिला सुरक्षा पर काम करेगा संघ, प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रतिवेदन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Mar 2026 06:17 AM IST
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सार

संघ ने कहा कि उसने शताब्दी वर्ष के दौरान अपने गृह संपर्क अभियान के तहत चुनावी राज्य केरल में अब तक एक लाख ईसाई-मुस्लिम घरों से संपर्क साधा है।

Panipat: RSS will work on religious conversion, population imbalance and women's safety
मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख - फोटो : ANI
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विस्तार

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने देश में धर्मांतरण, जनसंख्या असंतुलन, महिलाओं की असुरक्षा और युवाओं में नशे की बढ़ती लत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। साथ ही इनके समाधान के लिए काम करने की बात कही है। संघ ने कहा कि उसने शताब्दी वर्ष के दौरान अपने गृह संपर्क अभियान के तहत चुनावी राज्य केरल में अब तक एक लाख ईसाई-मुस्लिम घरों से संपर्क साधा है।

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हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा के पट्टीकल्याणा स्थित माधव सृष्टि केंद्र में शुक्रवार से शुरू हुई संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक में यह बातें कही गईं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने सभागार में बैठक का शुभारंभ किया।
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सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने वार्षिक (2025-26) प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत किया। संघ ने कहा कि राष्ट्र धर्म के निर्वाह और समाज की उम्मीदों को पूरा करने के लिए वह संस्कृति और ताने-बाने को सुदृढ़ रखते हुए आगे बढ़ेगा। मुकुंद ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) समेत नए तंत्रज्ञान, आधुनिक जीवनशैली, हिंदू जीवन मूल्यों में संतुलन लाना जरूरी है। 

10 करोड़ घरों तक पहुंचा संघ
मुकुंद ने कहा कि बीते साल विजया दशमी से शुरू हुए अभियान के महज छह महीने में ही 10.40 करोड़ घरों और 3.90 लाख गांवों से संपर्क किया है। देश भर में 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिसमें 3.5 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया। बीते साल मार्च महीने से अब तक संघ के शाखाओं की संख्या 83,129 से बढ़ कर 88,949 हो गई। शाखा के स्थानों की संख्या भी 51,740 से बढ़ कर 55,683 हो गई। उन्होंने बताया कि गृह संपर्क अभियान के तहत केरल में संघ के कार्यकर्ताओं को कम्युनिस्ट, मुस्लिम और ईसाई परिवारों में सम्मान मिला।

सामाजिक सद्भाव बैठकें
समाज में सद्भाव की स्थापना के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के साथ मिल कर कई बैठकें आयोजित की गईं। देश भर में जन गोष्ठियां की। इन कार्यक्रमों में संघ के पंच परिवर्तनों में शामिल सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण चेतना, स्व व स्वदेशी के लिए गर्व, परिवार व्यवस्था के संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के लिए जागरुकता फैलाई गई।

बैठक में 1,400 प्रतिनिधि प्रतिनिधि 
सभा की बैठक में संघ और संघ के अनुषांगिक संगठनों के 1,400 सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। बैठक की शुरुआत संघ प्रमुख भागवत और सरकार्यवाह होसबाले द्वारा किया गया। बैठक में संघ न सिर्फ आगामी एक वर्ष की कार्ययोजना तैयार करेगा, बल्कि संगठन में जरूरी बदलावों पर भी मंथन करेगा।

यूजीसी पर जताई चिंता, ईरान के मुद्दे पर सरकार के साथ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े विवाद पर गहरी चिंता जताई है। हालांकि ईरान के मुद्दे पर सरकार के रुख का समर्थन किया है। सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यूजीसी मामले में समाज और सरकार दोनों के मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। समाज की एकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर समरस और संगठित समाज का निर्माण करना ही देश की मजबूती का आधार है। 

मंच के नीचे पहली पंक्ति में बैठे भाजपा अध्यक्ष  संघ की बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को मंच से नीचे पहली कतार में कुर्सी पर जगह मिली। नवीन तीनों दिन यहां रहेंगे। सभा शुरू होने के बाद मीडिया को आठ मिनट के लिए प्रवेश दिया गया।

यूपी व केरल चुनाव से पहले बदलाव की बड़ी तैयारी
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यूपी और केरल चुनाव से पहले कई ढांचागत बदलाव करने की तैयारी में है। इसमें क्षेत्र प्रचारकों की संख्या कम करने और जिला, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार देने की योजना है। संघ आने वाले चुनावों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसका प्रस्ताव यहां पेश किया जाएगा। बैठक के पहले दिन शुक्रवार को शताब्दी वर्ष में अब तक और वर्षभर में संघ के कार्यों समीक्षा की गई। संघ की ताकत निचले स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है। संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने भी संगठन में बदलाव करने की बात मानी है। कहा कि संगठन में परिवर्तन समय-समय पर होते हैं।

देश और पड़ोस के हालात पर भी चर्चा
देश और पड़ोसी देशों की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। रिपोर्ट में कहा गया कि हिंसक माओवादी या नक्सलवादी गतिविधियां लंबे समय से बड़ी चुनौती रही हैं, लेकिन अब इन्हें काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है।

बांग्लादेश के हालात पर चिंता
संघ ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हुए हमलों पर भी चिंता व्यक्त की। नई सरकार से उम्मीद जताई गई कि हिंदू नागरिकों को सुरक्षित माहौल मिलेगा। नेपाल में भी राजनीतिक बदलाव के बाद के हालात पर चर्चा की गई।

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