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Panipat News: पशुपालन कर परिवार की ताकत बनीं रेखा
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रेखा।
- फोटो : samvad
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पानीपत। खोजकीपुर गांव की रेखा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार की ताकत बनीं हैं। वे अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं।
रेखा ने बताया कि वे करीब पांच वर्ष पहले गांव की अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ते हुए देख प्रेरित हुई थी। उस समय उन्हें यह समझ नहीं थी कि समूह से जुड़ने से जीवन में इतना बड़ा बदलाव आ सकता है। उन्होंने भी समूह की सदस्यता ली और नियमित रूप से बैठकों में हिस्सा लेना शुरू किया। उनको बैठकों में बचत, ऋण, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली। वे ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं। ऐसे में आकर नौकरी करना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने पशुपालन का कार्य शुरू किया।
उन्होंने शुरुआत में एक-दो पशुओं से काम शुरू किया और धीरे-धीरे इस काम को बढ़ाया। अब चार भैंस हैं। दूध और घी बेचकर अच्छा कमा रही हैं। घर के खर्च में सहयोग कर रही हैं और बच्चों की जरूरतों को भी पूरा कर रही हैं। अब वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबरी से भागीदारी निभा रही हैं। यदि महिलाएं संगठित होकर बचत करें और छोटे-छोटे काम को अपनाएं तो वे आसानी से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। वह केवल अपने तक सीमित नहीं हैं बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं। वह मनरेगा में काम करने वाली महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
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रेखा ने बताया कि वे करीब पांच वर्ष पहले गांव की अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ते हुए देख प्रेरित हुई थी। उस समय उन्हें यह समझ नहीं थी कि समूह से जुड़ने से जीवन में इतना बड़ा बदलाव आ सकता है। उन्होंने भी समूह की सदस्यता ली और नियमित रूप से बैठकों में हिस्सा लेना शुरू किया। उनको बैठकों में बचत, ऋण, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली। वे ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं। ऐसे में आकर नौकरी करना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने पशुपालन का कार्य शुरू किया।
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उन्होंने शुरुआत में एक-दो पशुओं से काम शुरू किया और धीरे-धीरे इस काम को बढ़ाया। अब चार भैंस हैं। दूध और घी बेचकर अच्छा कमा रही हैं। घर के खर्च में सहयोग कर रही हैं और बच्चों की जरूरतों को भी पूरा कर रही हैं। अब वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबरी से भागीदारी निभा रही हैं। यदि महिलाएं संगठित होकर बचत करें और छोटे-छोटे काम को अपनाएं तो वे आसानी से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। वह केवल अपने तक सीमित नहीं हैं बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं। वह मनरेगा में काम करने वाली महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

रेखा।- फोटो : samvad