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संघ की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक: देश व पड़ोस में वांछनीय बातों पर जताई चिंता, बांग्लादेश के हालात पर गंभीर

माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत (हरियाणा) Published by: Naveen Updated Sat, 14 Mar 2026 08:39 AM IST
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सार

देश में पिछले दिनों में हिन्दू जागरण और धर्म श्रद्धा जागरण के कई मामले सामने आए हैं। केरल के मलप्पुरम जिले की भारतपुझा नदी के तट पर तनुवाय स्थान में पिछले पौष-माघ मास में 15 दिन नदी में पुण्य स्नान व नील आरती का महोत्सव का आयोजन किया।

Sangh's Three-Day Annual Meeting in Panipat Expresses Concern Over Developments in Country and Neighborhood
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक को संबोधित करते सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और उनके साथ सरकार्यवा - फोटो : संवाद
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विस्तार

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शुक्रवार को शुरू हुई तीन दिवसीय वार्षिक बैठक में पेश की गई रिपोर्ट में संघ ने दावा किया कि केरल राज्य में 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम घरों और 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया। पूरे देश में गृह संपर्क अभियान चल रहा है। इसके अन्तर्गत देश के कुछ प्रांतों में ही 10 करोड़ घरों और 3.90 लाख गांवों तक संपर्क किया जा चुका है। अन्य प्रांतों में अभियान जारी है। गृह संपर्क वर्ग और समुदाय के किसी पूर्वाग्रह के बिना घरों में जाकर परिवारों से मिलकर संघ के विषय में संवाद किया है।

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सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद के अनुसार, नागपुर में दो अक्टूबर 2025 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद व सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के सानिध्य में शताब्दी वर्ष आयोजनों की शुरुआत हुई। इससे एक दिन पूर्व भारत सरकार ने संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना है।
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इनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव, समरसता के लिए संगठित करने का उद्देश्य रखा गया। इस दृष्टि से सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया। देशभर में अब तक 36 हजार से अधिक स्थानों पर हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया है। इनमें शहरी, ग्रामीण, दुर्गम जनजातीय क्षेत्र सहित सभी प्रकार के स्थान सम्मिलित हैं। अरुणाचल के एक दुर्गम क्षेत्र में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन बड़ा उदाहरण है। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध औरथा नागरिक कर्तव्यों की पालना के लिए पंच परिवर्तन का आह्वान किया।

देश और पड़ोस में वांछनीय बातों पर जताई चिंता

संघ के प्रतिवेदन में बताया है कि देश के भीतर व पड़ोस में कुछ वांछनीय बातें भी हुई हैं। हिंसात्मक माओवादी या नकसलवादी ताकत अनेक वर्षों से एक बड़ी समस्या रही हैं। इनको लगभग कर दिया गया। मणिपुर में पिछले दो वर्षों से दो समुदायों के मध्य कटुता व वैमनस्य की स्थिति हिंसात्मक होकर एक चुनौती बन गई और इसका राजनीतिक परिणाम भी हुआ। परिस्थिति में कुछ सुधार होने पर अब वहां नया नेतृत्व मिला है। संघ ने आशा व्यक्त की कि वहां जल्द ही जनजीवन सामान्य होकर समाज के सभी वर्ग परस्पर सामंजस्य से एकता का अनुभव करेंगे।

बांग्लादेश के हालात पर गंभीर

पड़ोस के बांग्लादेश में सामाजिक और राजनीतिक अशांति व अस्थिरता की परिस्थिति में हिंदू समुदाय पर हिंसात्मक आक्रमण हुआ। हिन्दुओं को व्यापक प्रमाण में जान व माल की हानि हुई। वहां हाल में निर्वाचन के बाद नई सरकार सत्ता में आई है। संघ ने हिन्दू नागरिकों के साथ हुए अमानवीय अन्याय का परिमार्जन कर सुरक्षा व सम्मान के जीवन जीने के लिए आवश्यक परिस्थिति का निर्माण करने की उम्मीद जताई है। दूसरे पड़ोसी देश नेपाल में भी सामाजिक व राजनीतिक उथल पुथल के बाद वहां अभी नई सरकार का निर्वाचन हुआ। संघ वहां की परिस्थिति में शांति व स्थिरता स्थापित होकर देश विकास के पथ पर अग्रसर होने की कामना करता है।

राष्ट्र बोध, हिन्दुत्व का जागरण और सामाजिक संवेदना बढ़ रही

सह सरकार्यवाह ने कहा कि समाज में राष्ट्र बोध, हिन्दुत्व का जागरण और सामाजिक संवेदना बढ़ रही हैं। लोग संघ कार्य से जुड़ने की उत्सुकता दिखा रहे हैं। पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थी। अब यह 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाओं का आंकड़ा हो गया है। एक वर्ष में 3943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या 5820 की वृद्धि हुई है। इसके साथ 1.25 लाख लोग ऑनलाइन जुड़े हैं। उत्सुक शक्ति, सज्जन शक्ति के साथ नित्य सिद्ध शक्ति भी बढ़ना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि समाज में प्रशंसा और अनुकूलता के चलते संघ कार्य को गति देने और अधिक गुणात्मक बनाने की योजना करनी चाहिए।

विश्व संघ शिविर में भी किया

सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने कहा कि शताब्दी वर्ष में विदेश में रहने वाले संघ स्वयंसेवकों के प्रयास से विश्व संघ शिविर किया गया। श्ह शिविर तेलंगामाना के भाग्यनगर के कान्हा शांतिवनम् में 25 से 28 दिसंबर 2025 को आयोजित किया गया। इसमें 71 देशों से 1026 बंधु और 585 भगिनी सहित 1611 स्वयंसेवक व परिवार जन शामिल हुए थे।

हिन्दू और धर्म जागरण के उदाहरण आए सामने

देश में पिछले दिनों में हिन्दू जागरण और धर्म श्रद्धा जागरण के कई मामले सामने आए हैं। केरल के मलप्पुरम जिले की भारतपुझा नदी के तट पर तनुवाय स्थान में पिछले पौष-माघ मास में 15 दिन नदी में पुण्य स्नान व नील आरती का महोत्सव का आयोजन किया। यह 250 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद तीन साल पूर्व पुन: प्रारंभ हुआ था। दक्षिण तमिलनाडु के तिरुपरनकुंद्रम के पहाड़ पर स्थित पत्थर के प्राचीन खंभे पर कार्तिक दीपम जलाने की परंपरा काे राज्य सरकार ने सांप्रदायिक तनाव का बहाना बनाकर निषेध कर दिया था। उच्च न्यायालय ने दीपम जलाने की अनुमति दी थी।

पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में जनजाति समुदाय स्वयं की पहचान सनातनी परंपरा के साथ कराने लगा है। यहां 30-35 वर्षों से सनातनी पूजा पद्धतियों व उत्सव पर एक प्रकार का अघोषित प्रतिबंध था। यहां आठ स्थानों पर यात्रा निकाली गईं। 25 हजार आबादी के क्षेत्र से आठ हजार लोग इसमें शामिल हुए। राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर अमर गीत गाने के लिए आकर्षक कार्यक्रम में राष्ट्र भक्ति जागृत की है।

सिख परपंरा के नौवें गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी पर्व पर बड़े स्तर पर कार्यक्रम किए गए। महाराष्ट्र के नागपुर, नांदेड़ और नवी मुंबई के खारघर में भी कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में दमदमी टकसाल के बाबा हरनाम सिंह, हुजूर साहिब नांदेड़ के बाबा कुलवंत सिंह, देश के गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पंजाब के सीएम भगवंत मान, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, बाबा रामदेव प्रमुख रूप से शामिल हुए थे। इनमें करीब 20 हजार गांवों से लोग आए थे।

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