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Rewari News: जिले में आभा आईडी अभियान तेज, आशा वर्करों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 10 Feb 2026 05:40 PM IST
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रेवाड़ी। जिले में आभा आईडी बनाने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। इसके लिए आशा वर्करों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य जिले के हर नागरिक को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान से जोड़ना है ताकि भविष्य में इलाज और योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जिले में कुल 837 आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्र की प्रत्येक आशा को एक हजार और शहरी क्षेत्र की आशा को दो हजार आभा आईडी बनाने का लक्ष्य दिया है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जिले में आभा आईडी बनने की संख्या बेहद कम है, इसी कारण यह लक्ष्य तय कर अभियान को गति दी जा रही है।
अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रोत्साहन रणनीति भी लागू की है। जिला आशा को-ऑर्डिनेटर सुनीता यादव ने बताया कि सरकार द्वारा प्रत्येक आभा आईडी बनाने पर आशा कार्यकर्ताओं को निर्धारित मानदेय दिया जाएगा।
उन्होंने आशा वर्करों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें और घर-घर जाकर लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के फायदों के बारे में जागरूक करें। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी ब्लॉक आशा को-ऑर्डिनेटर के माध्यम से लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
व्यवहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे
प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। सुनीता यादव ने बताया कि किस तरह आमजन को सरल भाषा में आभा आईडी की जरूरत और उसके लाभ समझाए जाएं ताकि लोग स्वेच्छा से इस अभियान से जुड़ें। भविष्य में आभा आईडी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मरीजों को इलाज के लिए फाइलें और पुराने पर्चे साथ लेकर नहीं घूमना पड़ेगा। मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड पुरानी बीमारियां, जांच रिपोर्ट और दवाइयों का विवरण एक क्लिक पर डॉक्टर के सामने होगा। इससे इलाज में तेजी आएगी और आपात स्थिति में सटीक व समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
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जिले में कुल 837 आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्र की प्रत्येक आशा को एक हजार और शहरी क्षेत्र की आशा को दो हजार आभा आईडी बनाने का लक्ष्य दिया है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जिले में आभा आईडी बनने की संख्या बेहद कम है, इसी कारण यह लक्ष्य तय कर अभियान को गति दी जा रही है।
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अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रोत्साहन रणनीति भी लागू की है। जिला आशा को-ऑर्डिनेटर सुनीता यादव ने बताया कि सरकार द्वारा प्रत्येक आभा आईडी बनाने पर आशा कार्यकर्ताओं को निर्धारित मानदेय दिया जाएगा।
उन्होंने आशा वर्करों से अपील की है कि वे इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें और घर-घर जाकर लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के फायदों के बारे में जागरूक करें। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी ब्लॉक आशा को-ऑर्डिनेटर के माध्यम से लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
व्यवहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे
प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। सुनीता यादव ने बताया कि किस तरह आमजन को सरल भाषा में आभा आईडी की जरूरत और उसके लाभ समझाए जाएं ताकि लोग स्वेच्छा से इस अभियान से जुड़ें। भविष्य में आभा आईडी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मरीजों को इलाज के लिए फाइलें और पुराने पर्चे साथ लेकर नहीं घूमना पड़ेगा। मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड पुरानी बीमारियां, जांच रिपोर्ट और दवाइयों का विवरण एक क्लिक पर डॉक्टर के सामने होगा। इससे इलाज में तेजी आएगी और आपात स्थिति में सटीक व समय पर उपचार संभव हो सकेगा।