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Rewari News: हादसे में मौत के मामले में 18.60 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:11 AM IST
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रेवाड़ी। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी जतिन गर्ग ने सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के एक मामले में मृतक के परिजनों को 18 लाख 60 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
गांव निखारी निवासी नरेंद्र की 10 जनवरी 2025 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। आरोप था कि कार चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए दुर्घटना को अंजाम दिया। इस संबंध में धारूहेड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया था। मृतक के पिता राम मेहर, माता सविता, पत्नी मीना यादव और दो नाबालिग बच्चों ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत करीब एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत बीमा कंपनी ने मृतक के परिजनों को 18.60 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई जिसे परिजनों ने भी स्वीकार कर लिया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने इस समझौते को अंतिम रूप देते हुए आदेश पारित किया।
अदालत ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर मुआवजा राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा कराए। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो कंपनी को याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मुआवजा राशि के वितरण को लेकर भी ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इसमें मृतक के माता-पिता को कुल मुआवजे का 20-20 जबकि पत्नी को 40 प्रतिशत राशि दी जाएगी। वहीं दोनों नाबालिग बच्चों को 10-10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। संवाद
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गांव निखारी निवासी नरेंद्र की 10 जनवरी 2025 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। आरोप था कि कार चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए दुर्घटना को अंजाम दिया। इस संबंध में धारूहेड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया था। मृतक के पिता राम मेहर, माता सविता, पत्नी मीना यादव और दो नाबालिग बच्चों ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत करीब एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
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सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत बीमा कंपनी ने मृतक के परिजनों को 18.60 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई जिसे परिजनों ने भी स्वीकार कर लिया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने इस समझौते को अंतिम रूप देते हुए आदेश पारित किया।
अदालत ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर मुआवजा राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा कराए। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो कंपनी को याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मुआवजा राशि के वितरण को लेकर भी ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इसमें मृतक के माता-पिता को कुल मुआवजे का 20-20 जबकि पत्नी को 40 प्रतिशत राशि दी जाएगी। वहीं दोनों नाबालिग बच्चों को 10-10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। संवाद