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Rewari News: रसायनिक पानी धारूहेड़ा पहुंचा तो होगा पर्यावरणीय नुकसान

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 28 Jan 2026 12:52 AM IST
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If chemical water reaches Dharuhera, there will be environmental damage.
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र का रसायनिक पानी। स्रोत : ग्रामीण
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धारूहेड़ा। राजस्थान के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहे रसायनिक पानी के धारूहेड़ा पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसा हुआ तो धारूहेड़ा में पर्यावरणीय नुकसान होगा। रासायनिक पानी धारूहेड़ा के गांव नंदरामपुर बास, जड़थल और साहबी नदी क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका है। यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो इससे व्यापक पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है।
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गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने इस गंभीर स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान सरकार, मुख्यमंत्री राजस्थान, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीसी खैरथल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह कदम न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि आम जनता की स्वास्थ्य और आजीविका की रक्षा के लिए भी अनिवार्य है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और अन्य न्यायिक मंचों पर उठाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
प्रकाश यादव ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के पास शनि मंदिर के समीप बड़ी मात्रा में बिना उपचारित, रसायनयुक्त औद्योगिक पानी सड़क पर बहते हुए देखा गया है।
यह दूषित पानी खेतों और खाली जमीन की ओर बह रहा है, जिससे यह क्षेत्र साहबी नदी कैचमेंट तक पहुंच सकता है। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से औद्योगिक इकाइयों द्वारा रासायनिक पानी की खुले में निकासी की जा रही है।
इसके कारण कृषि भूमि की उर्वरता घट रही है, भूजल प्रदूषित हो रहा है और मानव और पशु स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। पत्र में इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 का उल्लंघन बताया गया है। प्रकाश यादव ने औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही और नियामक एजेंसियों की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल उठाए।
लोगों ने तुरंत खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र का निरीक्षण करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि दूषित पानी के वैज्ञानिक नमूने लेकर लैब जांच कर दोषी इकाइयों की पहचान की जाए। दोषी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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