{"_id":"6a5d1c7b11d23e30bc011de4","slug":"police-action-in-section-174a-cases-questioned-accused-acquitted-due-to-procedural-flaws-rewari-news-c-198-1-rew1001-242110-2026-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: धारा 174ए के मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, प्रक्रिया की खामी से आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: धारा 174ए के मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, प्रक्रिया की खामी से आरोपी बरी
Mon, 20 Jul 2026 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 20 Jul 2026 12:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेवाड़ी। अदालत के आदेश के बाद पेश नहीं होने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज किए जाने वाली आईपीसी की धारा 174ए के मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में अदालत ने ऐसे मामलों में आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है।
धारा 174ए के मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 के तहत आवश्यक शिकायत की अनदेखी पुलिस कार्रवाई को कमजोर कर रही है। रेवाड़ी में सामने आए मामलों में अदालत ने पाया कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तो की, लेकिन कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। इसके चलते अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और आरोपियों को बरी होने का लाभ मिला।
केस 1 : गुरुदेव सिंह बरी, कानूनी प्रक्रिया में खामी मिली
18 जुलाई को सुनाए फैसले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) आशीष कुमार मंडल की अदालत ने धारा 174ए आईपीसी के मामले में अलवर के गांव टिमिलियावास निवासी आरोपी गुरुदेव सिंह को बरी कर दिया। मॉडल टाउन थाना पुलिस ने सात अगस्त 2019 को आरोपी को उद्घोषित व्यक्ति घोषित किए जाने के बाद आठ फरवरी 2020 को मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष ने चार गवाह पेश किए, लेकिन अदालत में वह आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि धारा 174ए के तहत कार्रवाई के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 के अनुसार लिखित शिकायत जरूरी थी। अदालत ने माना कि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही उद्घोषित व्यक्ति घोषित करने वाले आदेश की प्रमाणित प्रति भी पेश नहीं की गई। अदालत ने आरोप साबित नहीं होने पर आरोपी को बरी कर दिया।
विज्ञापन
केस 2 : भीम सिंह बरी, एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
18 जुलाई को सुनाए फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने धारा 174ए आईपीसी के मामले में मोहल्ला रामसिंहपुर निवासी आरोपी भीम सिंह को बरी कर दिया। मॉडल टाउन थाना पुलिस ने एक जुलाई 2019 को उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि अदालत के आदेश के बाद भी वह पेश नहीं हुआ था, जिसके चलते उसे उद्घोषित व्यक्ति घोषित किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने तीन गवाह पेश किए और गिरफ्तारी व अन्य दस्तावेज अदालत में रखे। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि धारा 174ए के मामले में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, बल्कि धारा 195 सीआरपीसी के तहत अदालत की ओर से लिखित शिकायत जरूरी है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए माना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके चलते अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहा और आरोपी को बरी कर दिया गया।
विज्ञापन
धारा 174ए के मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 के तहत आवश्यक शिकायत की अनदेखी पुलिस कार्रवाई को कमजोर कर रही है। रेवाड़ी में सामने आए मामलों में अदालत ने पाया कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तो की, लेकिन कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। इसके चलते अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और आरोपियों को बरी होने का लाभ मिला।
विज्ञापन
केस 1 : गुरुदेव सिंह बरी, कानूनी प्रक्रिया में खामी मिली
18 जुलाई को सुनाए फैसले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) आशीष कुमार मंडल की अदालत ने धारा 174ए आईपीसी के मामले में अलवर के गांव टिमिलियावास निवासी आरोपी गुरुदेव सिंह को बरी कर दिया। मॉडल टाउन थाना पुलिस ने सात अगस्त 2019 को आरोपी को उद्घोषित व्यक्ति घोषित किए जाने के बाद आठ फरवरी 2020 को मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष ने चार गवाह पेश किए, लेकिन अदालत में वह आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि धारा 174ए के तहत कार्रवाई के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 के अनुसार लिखित शिकायत जरूरी थी। अदालत ने माना कि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही उद्घोषित व्यक्ति घोषित करने वाले आदेश की प्रमाणित प्रति भी पेश नहीं की गई। अदालत ने आरोप साबित नहीं होने पर आरोपी को बरी कर दिया।
विज्ञापन
केस 2 : भीम सिंह बरी, एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
18 जुलाई को सुनाए फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने धारा 174ए आईपीसी के मामले में मोहल्ला रामसिंहपुर निवासी आरोपी भीम सिंह को बरी कर दिया। मॉडल टाउन थाना पुलिस ने एक जुलाई 2019 को उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि अदालत के आदेश के बाद भी वह पेश नहीं हुआ था, जिसके चलते उसे उद्घोषित व्यक्ति घोषित किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने तीन गवाह पेश किए और गिरफ्तारी व अन्य दस्तावेज अदालत में रखे। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि धारा 174ए के मामले में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, बल्कि धारा 195 सीआरपीसी के तहत अदालत की ओर से लिखित शिकायत जरूरी है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए माना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके चलते अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहा और आरोपी को बरी कर दिया गया।