{"_id":"6a5fbedf09f45281210ae354","slug":"withering-kharif-crops-came-back-to-life-rewari-news-c-198-1-sroh1010-242229-2026-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: मुरझा रही खरीफ की फसलों में फिर से आ गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: मुरझा रही खरीफ की फसलों में फिर से आ गई जान
Wed, 22 Jul 2026 12:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 22 Jul 2026 12:17 AM IST
विज्ञापन
बारिश के बाद खेतों में लहलहाती कपास की फसल। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेवाड़ी। जिले में हुई बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण मुरझा रही खरीफ फसलों में अब फिर से जान आ गई है। करीब 1.14 लाख एकड़ क्षेत्र में खड़ी बाजरा, कपास, मूंग, ग्वार, ज्वार और अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार को गति मिली है।
मौसम विशेषज्ञों ने 30 जुलाई तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, इस जुलाई माह में जिले में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अब तक औसत का 94.8 फीसदी ही वर्षा हुई है। यह सामान्य से करीब नौ फीसदी कम है। बरसाती सीजन में भी औसत 154 एमएम के मुकाबले लगभग 13 फीसदी कम बारिश हुई है। बारिश की कमी से खेतों में नमी लगातार घट रही थी, जिससे वर्षा पर निर्भर किसानों की चिंता बढ़ रही थी।
इस जुलाई में केवल दो बार ही 30 एमएम से अधिक बारिश हुई थी। आठ जुलाई को 40 एमएम और 15 जुलाई को 38 एमएम वर्षा दर्ज की गई। लंबे अंतराल तक अच्छी बारिश न होने से खेतों में नमी सूखने लगी थी। हल्की भूमि वाले क्षेत्रों में फसलों के पीले पड़ने और बढ़वार रुकने की चिंता थी। अब हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे बाजरा, ग्वार, मूंग और कपास की बढ़वार में तेजी आएगी।
विज्ञापन
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 30 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश की गतिविधियों की संभावना है। जुलाई के अंतिम दिनों तक मानसून सक्रिय होने से लगातार बारिश की गतिविधियों का दौर जारी रहेगा। मौसम की इस स्थिति के कारण दिन-रात के तापमान सामान्य के आसपास बने रहेंगे।
-- -- -- -- -- -- --
- यह है जिले में फसलों का रकबा:
बाजरा - 1,04,365 एकड़
कपास - 6,820 एकड़
मूंग - 121 एकड़
तिल - 10 एकड़
मूंगफली - 128 एकड़
पशुचारा - 2,768 एकड़
-- -- -- -- -- --
खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए : डॉ. मनोज
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि जिले में खरीफ फसलों की अधिकांश बुवाई पहले ही हो चुकी है। वर्तमान में फसलों को बढ़वार के लिए नमी की आवश्यकता है, जो ताजा बारिश से पूरी हुई है। किसानों को खेतों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यकता अनुसार खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए।
-- -- -- -- -- --
विज्ञापन
मौसम विशेषज्ञों ने 30 जुलाई तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, इस जुलाई माह में जिले में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अब तक औसत का 94.8 फीसदी ही वर्षा हुई है। यह सामान्य से करीब नौ फीसदी कम है। बरसाती सीजन में भी औसत 154 एमएम के मुकाबले लगभग 13 फीसदी कम बारिश हुई है। बारिश की कमी से खेतों में नमी लगातार घट रही थी, जिससे वर्षा पर निर्भर किसानों की चिंता बढ़ रही थी।
विज्ञापन
इस जुलाई में केवल दो बार ही 30 एमएम से अधिक बारिश हुई थी। आठ जुलाई को 40 एमएम और 15 जुलाई को 38 एमएम वर्षा दर्ज की गई। लंबे अंतराल तक अच्छी बारिश न होने से खेतों में नमी सूखने लगी थी। हल्की भूमि वाले क्षेत्रों में फसलों के पीले पड़ने और बढ़वार रुकने की चिंता थी। अब हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे बाजरा, ग्वार, मूंग और कपास की बढ़वार में तेजी आएगी।
विज्ञापन
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 30 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश की गतिविधियों की संभावना है। जुलाई के अंतिम दिनों तक मानसून सक्रिय होने से लगातार बारिश की गतिविधियों का दौर जारी रहेगा। मौसम की इस स्थिति के कारण दिन-रात के तापमान सामान्य के आसपास बने रहेंगे।
- यह है जिले में फसलों का रकबा:
बाजरा - 1,04,365 एकड़
कपास - 6,820 एकड़
मूंग - 121 एकड़
तिल - 10 एकड़
मूंगफली - 128 एकड़
पशुचारा - 2,768 एकड़
खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए : डॉ. मनोज
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि जिले में खरीफ फसलों की अधिकांश बुवाई पहले ही हो चुकी है। वर्तमान में फसलों को बढ़वार के लिए नमी की आवश्यकता है, जो ताजा बारिश से पूरी हुई है। किसानों को खेतों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यकता अनुसार खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए।