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Rewari News: बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए लग रहे टेंडर, नहीं मिल रही फर्म

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 09 Mar 2026 01:16 AM IST
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Tenders are being floated to capture stray animals, but firms are not being found.
अनाज मंडी मार्ग के पास खड़े पशु। संवाद
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रेवाड़ी। बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में आश्रय देने के लिए नगर परिषद की ओर से अभी तक दो बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब तीसरी बार 34.43 लाख रुपये का टेंडर लगाया गया है।
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नगर परिषद की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए पहली बार लगाए गए टेंडर में एक ही फर्म ने दो बिड लगाए थे जिसकी शिकायत पर टेंडर रद्द कर दिया गया था। फिर टेंडर आमंत्रित किया गया लेकिन दूसरी बार भी कोई एजेंसी आगे नहीं आई। अब तीसरी बार टेंडर जारी किया गया है।
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किसी एजेंसी के सामने नहीं आने का कारण बताया जाता है कि पूर्व में एक एजेंसी ने बेसहारा पशुओं को पकड़ा था। उस समय कई बार शिकायतें दर्ज हुईं थीं। शिकायतों के चलते भुगतान रोक दिया गया था। भुगतान लटकने के कारण एजेंसी को अपने मैनपावर, वाहन और अन्य संसाधनों की अदायगी समय पर करने में दिक्कत आई। इसी के चलते अब एजेंसियां रेवाड़ी में टेंडर भरने को तैयार नहीं हो पा रही हैं।
दूसरी तरफ नगर परिषद ने लावारिस पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए पशुपालकों पर सख्ती करने का फैसला लिया है। परिषद ने पशुओं को छोड़ने वाले पशुपालकों को दोबारा नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी जाएगी। नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें पशुपालकों और आम नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है।
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इस वजह से बढ़ती है पशुओं की संख्या
हर साल पशुओं की संख्या बढ़ने का एक मुख्य कारण यह भी है कि लक्ष्य हमेशा एक जैसा ही रहा है। औसतन हर साल की बात करें तो 1300 के आसपास पशु पकड़े जाते हैं। साल 2021 में भी 1300 पशु, 2022, 2023, 2024 में कुछ सुधार हुआ। 1800 से अधिक पशु पकड़े गए। नगर परिषद इस बार भी लक्ष्य बढ़ाने पर जोर दे रहा है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती यह रहती है कि गोशालाएं फुल हो जाती हैं। ऐसे में समस्या काफी बढ़ जाती है। इस बार भी यही समस्या देखने को मिली।

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लोगों ने की पशुओं को पकड़ने की मांग:
सेक्टर 1 निवासी विनोद कुमार ने बताया कि सेक्टर में हमेशा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। कई बार पशु हमला भी कर देते हैं। जल्द से जल्द पशुओं को पकड़ा जाए। भाड़ावास मार्ग निवासी कविता देवी ने बताया कि यह मार्ग काफी व्यस्त मार्ग है। यहां पर हमेशा पशुओं का जमावड़ा लगता है। इससे हादसा होने का खतरा भी रहता है। रात के समय स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। मांग है कि पशुओं को यहां से गोशालाओं में छोड़ा जाए।
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गाय के हमले से महिला की हो चुकी है मौत

शहर में सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। खासकर रात में और व्यस्त मार्गों पर इनके विचरण से वाहन चालकों को जोखिम उठाना पड़ता है। फरवरी में हंस नगर निवासी 60 वर्षीय कृष्णा की गाय के हमले में मौत हो गई थी। कृष्णा अपने घर के बाहर खड़ी थीं।


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वर्जन:
नगर परिषद ने पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर जारी किया है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य सौंप दिया जाएगा।-
अंकित वशिष्ठ, एक्सईएन, नगर परिषद
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