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Rohtak News: सुपवा में अभिव्यंजना का आगाज, कैंपस में बिखरे कला के रंग

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 12:25 AM IST
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Expression begins at Supwa, colors of art spread across the campus
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रोहतक। दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) की वार्षिक कला प्रदर्शनी ''''अभिव्यंजना'''' का रविवार शाम राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने शुभारंभ किया। विवि परिसर हजारों रंग बिरंगी कलाकृतियों से सजा नजर आया।
मुख्य अतिथि के साथ उनकी पत्नी मित्रा घोष भी कैंपस पहुंची। इनके साथ इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर केजी सुरेश व फर्स्ट लेडी ऑफ यूनिवर्सिटी प्रो. गायत्री रैना भी मौजूद रहीं। यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमित आर्य व रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने अतिथियों का स्वागत किया।
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राज्यपाल ने सूर्य कवि दादा लख्मी चंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ किया। विवि परिसर स्थित फैकल्टी ऑफ डिजाइन में लगाई गई कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कलाकृतियों को बारीकी से देखा व छात्रों से कलाकृतियों की जानकारी ली।
प्रदर्शनी देखकर उन्होंने छात्रों के टैलेंट, मेहनत व लगन के साथ इस तरह के आयोजन के लिए विवि प्रबंधन को सराहते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन छात्रों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए एक बेहतर मंच उपलब्ध कराते हैं।

यूनिवर्सिटी के पहले न्यूज लेटर का विमोचन
राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के न्यूज लेटर ''''अभिव्यक्ति-कला साधना की सशक्त आवाज'''' का विमोचन किया। यह यूनिवर्सिटी का पहला न्यूज लेटर है। इसमें जून 2025 से अप्रैल 2026 तक यूनिवर्सिटी की तरफ से की गई सभी सांस्कृतिक, अकादमिक व अन्य अभी तरह की गतिविधियों को समावेशित किया गया है। 24 पेज का न्यूज लेटर तैयार किया गया। अब नियमित रूप से हर तीसरे महीने न्यूज लेटर जारी किया जाएगा। सोमवार को यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह के चलते खास अतिथि ही प्रदर्शनी को देख सकेंगे। इसके अगले दिन पांच मई से प्रदर्शनी सभी लोगों के लिए खोल दी जाएगी।
आसमान को बनाया कैनवास
फैकल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स के कोऑर्डिनेटर विनय कुमार के अनुसार प्रदर्शनी में छात्रों ने एक से बढ़कर एक कलाकृति प्रदर्शित की हैं। एप्लाइड आर्ट, एनीमेशन, पेंटिंग, स्कल्पचर (मूर्तिकला) व प्रिंट मेकिंग का समावेश इस प्रदर्शनी में देखा जा सकता है। प्रदर्शनी में एक छात्र ने आसमान को ही कैनवास बना लिया है। उन्होंने ट्विग्स आर्ट (पेड़ की टहनी के टुकड़ों) से एक खास कलाकृति तैयार की है। इसे रस्सियों की मदद से लटकाया गया है। इसमें टहनियों के टुकड़ों से अक्षर बनाए गए हैं। जब ऊपर की तरफ देखते हैं तो आसमान में वह शब्द दिखाई देते हैं। इसके अलावा छात्रों ने अपनी कलाकृतियों में महिला शक्ति, ग्रामीण परिवेश, मातृत्व के भाव, अक्षरों व रंगों के जादू को शानदार तरीके से पेश किया है। हर कलाकृति के पीछे उसे तैयार करने वाले कलाकार की सोच व एक कहानी छिपी है। इसे बताने के लिए छात्र अपनी कलाकृतियों के पास मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही मिट्टी, क्ले व गत्ते से बने मॉडल, स्टील व लोहे की तारों से बने स्कल्पचर, फोटोग्राफी, एनिमेशन से तैयार आर्ट, पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग, वेस्ट चीजों से तैयार कलाकृतियां अपनी तरफ आकर्षित करती हैं।
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