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Rohtak News: पीजीआई पहुंची लीनियर एक्सीलरेटर मशीन, तीन माह बाद कैंसर ट्यूमर का सटीक इलाज होगा
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01-रोहतक के पीजीआईएमएस में पहुंची लीनियर एक्सीलरेटर मशीन। संवाद
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रोहतक। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पीजीआई रोहतक में अरसे बाद कैंसर पीड़ितों को अब सटीक इलाज मिलने की राह बन गई है। इसके लिए जर्मनी से लीनियर एक्सीलरेटर मशीन पहुंच गई है। मरीज के कैंसर प्रभावित अंग (कैंसर ट्यूमर) का ही इलाज करने वाली इस मशीन को इनस्टॉल करना बाकी है।
इस कम्प्यूटराइज मशीन को पूरी तरह चालू करने में तीन माह का समय लगने की उम्मीद है। यह उपकरण कैंसर प्रभावित हिस्से को छोड़ कर शेष सामान्य टिश्यू रेडिएशन के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखेगा।
पीजीआईएमएस ने कैंसर मरीजों की सुविधा को देखते हुए 30 करोड़ रुपये की लीनियर एक्सीलरेटर मशीन खरीदी है। इसके लिए पिछले 15 वर्षों से प्रयास चल रहा था। रेडिएशन से मरीज का इलाज करने में समक्ष इस मशीन के लिए क्षेत्रीय कैंसर रोग विभाग के साथ ही अलग भवन बनाया गया है।
इस दो मंजिला भवन में मशीन स्थापित की जाएगी। भवन में डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट, मरीज व अन्य स्टाफ के लिए कमरे बनाए गए हैं। ब्यूरो
एआरबी के मानकों पर बनाया भवन
संस्थान में पहुंचे इस नए उपकरण व इसके लिए जरूरी भवन की एआरबी से अनुमति पहले ही मिल चुकी है। पीजीआई के कैंसर विभाग में आने वाले मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड यानी एआरबी को भेजा गया था। रेडिएशन के खतरे को देखते हुए सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए यह मंजूरी जरूरी है इसलिए मशीन स्थापित होने वाले भवन का एक हिस्सा भूमिगत रहेगा। यहां रेडिएशन तत्व को सुरक्षित रखा जाएगा। एआरबी के मानकों के तहत रेडिएशन तत्व को रखने के लिए कंक्रीट की मोटी दीवारें बनाई गई हैं।
ट्यूमर की जगह ही पहुंचेगी रेडिएशन
लीनियर एक्सीलरेटर मशीन शरीर में कैंसर ट्यूमर का इलाज आसान करेगी। इस एक्सटर्नल मशीन का लक्ष्य बेहद सटीक है। यह केवल उसी जगह रेडिएशन छोड़ेगी जहां कैंसर ट्यूमर होगा। आसपास के टिश्यू सुरक्षित रहेंगे। यह मशीन मिलीमीटर में मिलने वाले छोटे से छोटे टिश्यू के इलाज में भी समक्ष है। इसके लिए रेडिएशन छोड़कर उस टिश्यू को खत्म कर देगी।
हर साल आ रहे 4000 मरीज, 1987 में आते थे 500
पीजीआई के कैंसर विभाग में हर साल करीब चार हजार से अधिक नए कैंसर मरीज आ रहे हैं। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 1987 में यह आंकड़ा करीब 500 था। उस समय न तो तकनीक थी और न ही इलाज की बेहतर सुविधाएं। वर्तमान में इलाज के आधुनिक उपकरणों के अलावा डॉक्टर, नई दवा और आधुनिक तकनीक उपलब्ध है। ऐसे में समय रहते बीमारी का पता लगाकर पीड़ित का इलाज संभव हुआ है। यही वजह है कि मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है। विभाग की ओपीडी में भी रोजाना 200 मरीज आ रहे हैं।
मुंह और गले के कैंसर के हैं 80 प्रतिशत मरीज
प्रदेश में कैंसर का एक बड़ा कारण तंबाकू है। इसके कारण मुंह, गले और फेफड़े के कैंसर रोगियों की संख्या अधिक है। यह कुल मरीजों का करीब 80 प्रतिशत है। दूसरे कारण में शराब, प्रदूषण, अनबैलेंस डाइट, व्यायाम से दूरी व अन्य कारण शामिल हैं।
कोबाल्ट थैरेपी से चलाया जा रहा है काम
पीजीआई के कैंसर विभाग में मरीजों को फिलहाल कोबाल्ट थैरेपी के जरिये राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। कोबाल्ट मशीन से रेडिएशन तरंगें छोड़कर सेंक लगाया जा रहा है। इससे मरीज के कैंसर प्रभावित अंग के अलावा शरीर के दूसरे टिश्यू भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इससे मरीज को राहत मिलने में देरी के साथ दूसरी समस्याएं भी सामने आती हैं। यह मशीन भी पुरानी हो चुकी है। वर्कलोड के चलते यह अक्सर खराब रहने लगी है।
मशीन इंस्टॉल करने में लगेंगे तीन महीने
पीजीआई में कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए आधुनिक लीनियर एक्सीलरेटर मशीन मंगवाई गई है। इसके लिए अलग भवन बनाया गया है। अब मशीन की इंस्टॉलेशन का काम बचा है। यह काम पूरा होने में तीन महीने लगेंगे। इसके बाद मशीन मरीजों के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी। -डॉ. अशोक चौहान, अध्यक्ष, क्षेत्रीय कैंसर विभाग, पीजीआईएमएस।
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इस कम्प्यूटराइज मशीन को पूरी तरह चालू करने में तीन माह का समय लगने की उम्मीद है। यह उपकरण कैंसर प्रभावित हिस्से को छोड़ कर शेष सामान्य टिश्यू रेडिएशन के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखेगा।
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पीजीआईएमएस ने कैंसर मरीजों की सुविधा को देखते हुए 30 करोड़ रुपये की लीनियर एक्सीलरेटर मशीन खरीदी है। इसके लिए पिछले 15 वर्षों से प्रयास चल रहा था। रेडिएशन से मरीज का इलाज करने में समक्ष इस मशीन के लिए क्षेत्रीय कैंसर रोग विभाग के साथ ही अलग भवन बनाया गया है।
इस दो मंजिला भवन में मशीन स्थापित की जाएगी। भवन में डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट, मरीज व अन्य स्टाफ के लिए कमरे बनाए गए हैं। ब्यूरो
एआरबी के मानकों पर बनाया भवन
संस्थान में पहुंचे इस नए उपकरण व इसके लिए जरूरी भवन की एआरबी से अनुमति पहले ही मिल चुकी है। पीजीआई के कैंसर विभाग में आने वाले मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड यानी एआरबी को भेजा गया था। रेडिएशन के खतरे को देखते हुए सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए यह मंजूरी जरूरी है इसलिए मशीन स्थापित होने वाले भवन का एक हिस्सा भूमिगत रहेगा। यहां रेडिएशन तत्व को सुरक्षित रखा जाएगा। एआरबी के मानकों के तहत रेडिएशन तत्व को रखने के लिए कंक्रीट की मोटी दीवारें बनाई गई हैं।
ट्यूमर की जगह ही पहुंचेगी रेडिएशन
लीनियर एक्सीलरेटर मशीन शरीर में कैंसर ट्यूमर का इलाज आसान करेगी। इस एक्सटर्नल मशीन का लक्ष्य बेहद सटीक है। यह केवल उसी जगह रेडिएशन छोड़ेगी जहां कैंसर ट्यूमर होगा। आसपास के टिश्यू सुरक्षित रहेंगे। यह मशीन मिलीमीटर में मिलने वाले छोटे से छोटे टिश्यू के इलाज में भी समक्ष है। इसके लिए रेडिएशन छोड़कर उस टिश्यू को खत्म कर देगी।
हर साल आ रहे 4000 मरीज, 1987 में आते थे 500
पीजीआई के कैंसर विभाग में हर साल करीब चार हजार से अधिक नए कैंसर मरीज आ रहे हैं। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 1987 में यह आंकड़ा करीब 500 था। उस समय न तो तकनीक थी और न ही इलाज की बेहतर सुविधाएं। वर्तमान में इलाज के आधुनिक उपकरणों के अलावा डॉक्टर, नई दवा और आधुनिक तकनीक उपलब्ध है। ऐसे में समय रहते बीमारी का पता लगाकर पीड़ित का इलाज संभव हुआ है। यही वजह है कि मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है। विभाग की ओपीडी में भी रोजाना 200 मरीज आ रहे हैं।
मुंह और गले के कैंसर के हैं 80 प्रतिशत मरीज
प्रदेश में कैंसर का एक बड़ा कारण तंबाकू है। इसके कारण मुंह, गले और फेफड़े के कैंसर रोगियों की संख्या अधिक है। यह कुल मरीजों का करीब 80 प्रतिशत है। दूसरे कारण में शराब, प्रदूषण, अनबैलेंस डाइट, व्यायाम से दूरी व अन्य कारण शामिल हैं।
कोबाल्ट थैरेपी से चलाया जा रहा है काम
पीजीआई के कैंसर विभाग में मरीजों को फिलहाल कोबाल्ट थैरेपी के जरिये राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। कोबाल्ट मशीन से रेडिएशन तरंगें छोड़कर सेंक लगाया जा रहा है। इससे मरीज के कैंसर प्रभावित अंग के अलावा शरीर के दूसरे टिश्यू भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इससे मरीज को राहत मिलने में देरी के साथ दूसरी समस्याएं भी सामने आती हैं। यह मशीन भी पुरानी हो चुकी है। वर्कलोड के चलते यह अक्सर खराब रहने लगी है।
मशीन इंस्टॉल करने में लगेंगे तीन महीने
पीजीआई में कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए आधुनिक लीनियर एक्सीलरेटर मशीन मंगवाई गई है। इसके लिए अलग भवन बनाया गया है। अब मशीन की इंस्टॉलेशन का काम बचा है। यह काम पूरा होने में तीन महीने लगेंगे। इसके बाद मशीन मरीजों के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी। -डॉ. अशोक चौहान, अध्यक्ष, क्षेत्रीय कैंसर विभाग, पीजीआईएमएस।