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Rohtak News: एमबीबीएस छात्रा का आरोप-पीजीआई लाइब्रेरी उपलब्ध कराने में असक्षम
Wed, 19 Aug 2026 07:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 19 Aug 2026 07:54 PM IST
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43-एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा मोनिका गोयत
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फोटो: 43
किसी कोर्स के एग्जाम होने पर तीन घंटे के लिए रीडिंग रूम को बनाया जाता सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई की एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा मोनिका गोयत ने संस्थान प्रशासन पर लाइब्रेरी उपलब्ध कराने में असक्षम होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कहा कि साल में अधिकतर समय रीडिंग रूम को एग्जामिनेशन सेंटर बनाया जाता है।
कहा, साल में मुश्किल से 15 दिन लगातार रीडिंग रूम खुलता है। फिर बीच में किसी कोर्स के एग्जाम आ जाए तो बंद कर दिया जाता है। हालांकि, संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. रूप सिंह का कहना है कि एग्जाम के समय तीन घंटे के लिए रीडिंग रूम को सेंटर बनाया जाता है।
मोनिका गोयत ने वीडियो में कहा कि उनके सीनियर भी प्रशासन को लिखित में पत्र देकर रीडिंग रूम की मांग कर चुके हैं लेकिन फिर भी प्रशासन इस समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं देता।
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छात्रा का आरोप है कि नेशनल मेडिकल काउंसिल के नियमानुसार मेडिकल कॉलेज में बच्चों के पढ़ने के लिए लाइब्रेरी या रीडिंग रूम होना अनिवार्य होता है। संस्थान बच्चों को लाइब्रेरी देने में ही असमर्थ है। ऐसे में नियमों का पालन भी नहीं हो रहा।
पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है : मोनिका
मोनिका ने आरोप लगाए कि रीडिंग रूम को एग्जाम हॉल बनाने के कारण विद्यार्थियों को बाहर पढ़ने जाना पड़ता है। प्रशासन को समझ ही नहीं आ रहा कि बच्चों को लाइब्रेरी की जरूरत है।
वर्जन
एग्जाम कराने के लिए तीन घंटे के लिए रीडिंग रूम को एग्जाम सेंटर बनाया जाता है। बाहर बारिश में तो बच्चों की परीक्षा नहीं करा सकते। कोई कुछ भी वीडियो डालकर आरोप लगा देता है। आठ से दस दिन में एग्जाम खत्म हो जाते हैं।
- डॉ. रूप सिंह, रजिस्ट्रार, स्वास्थ्य विज्ञान विवि
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किसी कोर्स के एग्जाम होने पर तीन घंटे के लिए रीडिंग रूम को बनाया जाता सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई की एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा मोनिका गोयत ने संस्थान प्रशासन पर लाइब्रेरी उपलब्ध कराने में असक्षम होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कहा कि साल में अधिकतर समय रीडिंग रूम को एग्जामिनेशन सेंटर बनाया जाता है।
कहा, साल में मुश्किल से 15 दिन लगातार रीडिंग रूम खुलता है। फिर बीच में किसी कोर्स के एग्जाम आ जाए तो बंद कर दिया जाता है। हालांकि, संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. रूप सिंह का कहना है कि एग्जाम के समय तीन घंटे के लिए रीडिंग रूम को सेंटर बनाया जाता है।
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मोनिका गोयत ने वीडियो में कहा कि उनके सीनियर भी प्रशासन को लिखित में पत्र देकर रीडिंग रूम की मांग कर चुके हैं लेकिन फिर भी प्रशासन इस समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं देता।
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छात्रा का आरोप है कि नेशनल मेडिकल काउंसिल के नियमानुसार मेडिकल कॉलेज में बच्चों के पढ़ने के लिए लाइब्रेरी या रीडिंग रूम होना अनिवार्य होता है। संस्थान बच्चों को लाइब्रेरी देने में ही असमर्थ है। ऐसे में नियमों का पालन भी नहीं हो रहा।
पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है : मोनिका
मोनिका ने आरोप लगाए कि रीडिंग रूम को एग्जाम हॉल बनाने के कारण विद्यार्थियों को बाहर पढ़ने जाना पड़ता है। प्रशासन को समझ ही नहीं आ रहा कि बच्चों को लाइब्रेरी की जरूरत है।
वर्जन
एग्जाम कराने के लिए तीन घंटे के लिए रीडिंग रूम को एग्जाम सेंटर बनाया जाता है। बाहर बारिश में तो बच्चों की परीक्षा नहीं करा सकते। कोई कुछ भी वीडियो डालकर आरोप लगा देता है। आठ से दस दिन में एग्जाम खत्म हो जाते हैं।
- डॉ. रूप सिंह, रजिस्ट्रार, स्वास्थ्य विज्ञान विवि