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अंत:वस्त्र जांच केस में पुलिस को नहीं मिले साक्ष्य, लगाई फाइनल रिपोर्ट

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 01:31 AM IST
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Police found no evidence in the underwear investigation case and filed a final report.
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विजेंद्र कौशिक
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रोहतक। एमडीयू की महिलाकर्मियों के अंत:वस्त्र उतरवाकर तलाशी लेने के चर्चित प्रकरण में एसआईटी ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। एसआईटी अध्यक्ष व डीएसपी रवि खुंडिया ने कहा है कि सहायक रजिस्ट्रार श्याम सुंदर, सेनेटरी सुपरवाइजरों वितेंद्र व विनोद के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं मिले।
यह घटना 26 अक्तूबर को जिस रोज घटी, राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष सपत्नी कैंपस में ही ठहरे हुए थे। एमडीयू की ओर से पीजीआई थाने में लिखाई एफआईआर के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को सफाई में तेजी लाने के लिए कहा गया तो कुछ ने मासिक धर्म आने का हवाला देकर रियायत मांगी।
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लेकिन, सेनेटरी सुपरवाइजर ने इस पर नाराजगी जताते हुए मासिक धर्म की जांच के निर्देश दे दिए। आरोप है कि एक महिला कर्मचारी ने अंत:वस्त्र उतारकर जांच की। इस मामले ने तूल पकड़ा और घंटों हंगामा चला। राज्य महिला आयोग से लेकर सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष तक ने रिपोर्ट तलब की।
विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की घेराबंदी की। इसके बाद एमडीयू ने अपने सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर, एचकेआरएन के अनुबंधित सेनेटरी सुपरवाइजर वितेंद्र व विनोद पर एफआईआर लिखाई। यूनिवर्सिटी ने वितेंद्र व विनोद को बर्खास्त कर दिया और श्याम सुंदर को निलंबित।
एसपी ने डीएसपी मुख्यालय रवि खुंडिया की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की। टीम में पीजीआई थाना प्रभारी रोशन लाल, महिला थाना प्रभारी अंकिता व आर्य नगर थाने की एक महिला एसआई को शामिल किया गया।

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ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दी रिपोर्ट
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवलीन कौर की कोर्ट में तीन दिन पहले ही एसआईटी ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है। एसआईटी ने कहा है कि दो महीने तक गहन जांच के बावजूद पुलिस को तीनों आरोपियों के खिलाफ कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जो उन्हें दोषी करार देने लायक हो। एसआईटी ने विवि की आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। कहा है, आंतरिक जांच रिपोर्ट में भी आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं बताए गए हैं। इसी को आधार बनाते हुए पुलिस ने एफआईआर निक्षेपित करने का आग्रह किया है।
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पीड़ित महिलाएं कर सकती हैं अंतिम रिपोर्ट का विरोध

एसआईटी की ओर से दाखिल अंतिम जांच रिपोर्ट के स्वीकार या अस्वीकार करने का फैसला कोर्ट को लेना है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट होने पर कोर्ट इसे स्वीकार कर सकता है। अन्यथा इसे खारिज करते हुए दोबारा जांच के लिए निर्देशित कर सकता है। पीड़ित महिलाएं और याची एमडीयू के पास भी अंतिम जांच रिपोर्ट का अदालत में विरोध का अधिकार है।
वर्जन
पुलिस ने दो माह तक पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की है। इसमें आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। विवि की आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट में भी कोई सबूत नहीं दिया गया। इसी कारण अदालत में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है।
- रवि खुंडिया, डीएसपी मुख्यालय एवं अध्यक्ष एसआईटी
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