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राज्यसभा चुनाव में उजागर हुई कांग्रेस की अंदरूनी कलह : खरक
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महम। राज्यसभा के लिए कर्मबीर बौद्ध का मात्र पॉइंटों से चुना जाना कांग्रेस की जीत नहीं, उनकी अंदरूनी कलह व कमजोर नेतृत्व का स्पष्ट प्रमाण है। यह कहना है भाजपा के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी शमशेर सिंह खरक का। सोमवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसा है।
उन्होंने कहा कि 37 विधायकों की ताकत होने के बावजूद कांग्रेस जिस तरह रेंगते हुए जीत तक पहुंची, वह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर भरोसे का संकट गहरा चुका है। अपने ही विधायकों पर नियंत्रण न होना कांग्रेस नेतृत्व की सबसे बड़ी कमजोरी है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब वह स्वयं अधिकृत एजेंट थे और विधायक उन्हें बैलेट दिखाकर वोट डाल रहे थे, तब पांच विधायकों की क्रॉस वोटिंग व चार वोटों का अमान्य होना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि या तो यह नेतृत्व की विफलता है, या फिर यह सब कुछ उनकी जानकारी में हुआ है। पांच क्रॉस वोट व चार अमान्य वोट मिलाकर कुल नौ वोटों की सेंधमारी हुई। कांग्रेस अब तक दोषी विधायकों के नाम सार्वजनिक करने से बच रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल गलती नहीं, एक संगठित अंदरूनी खेल का संकेत है। कांग्रेस ने विधायकों को रिसॉर्ट में रखकर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की। यह रणनीति पूरी तरह विफल रही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी 2016 के ‘पेन कांड’ और 2022 की वोटिंग में गड़बड़ी की घटनाओं का शिकार हो चुकी है। इनसे पार्टी ने कोई सबक नहीं लिया। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस बार-बार अपनी ही गलतियों को दोहराती है।
उन्होंने कहा कि 37 विधायकों की ताकत होने के बावजूद कांग्रेस जिस तरह रेंगते हुए जीत तक पहुंची, वह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर भरोसे का संकट गहरा चुका है। अपने ही विधायकों पर नियंत्रण न होना कांग्रेस नेतृत्व की सबसे बड़ी कमजोरी है।
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब वह स्वयं अधिकृत एजेंट थे और विधायक उन्हें बैलेट दिखाकर वोट डाल रहे थे, तब पांच विधायकों की क्रॉस वोटिंग व चार वोटों का अमान्य होना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि या तो यह नेतृत्व की विफलता है, या फिर यह सब कुछ उनकी जानकारी में हुआ है। पांच क्रॉस वोट व चार अमान्य वोट मिलाकर कुल नौ वोटों की सेंधमारी हुई। कांग्रेस अब तक दोषी विधायकों के नाम सार्वजनिक करने से बच रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल गलती नहीं, एक संगठित अंदरूनी खेल का संकेत है। कांग्रेस ने विधायकों को रिसॉर्ट में रखकर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की। यह रणनीति पूरी तरह विफल रही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी 2016 के ‘पेन कांड’ और 2022 की वोटिंग में गड़बड़ी की घटनाओं का शिकार हो चुकी है। इनसे पार्टी ने कोई सबक नहीं लिया। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस बार-बार अपनी ही गलतियों को दोहराती है।