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Rohtak News: कार्यशाला में सांख्यिकीय तकनीकों और रिसर्च मेथोडोलॉजी का प्रशिक्षण दिया
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 27 May 2026 07:50 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआईएमएस रोहतक के मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और साइंस-टेक इंस्टीट्यूट लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बायोस्टैटिस्टिक्स एंड सर्वाइवल एनालिसिस विषय पर सात दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ।
यह कार्यशाला 21 से 27 मई तक वर्चुअल माध्यम से चली। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य अनुसंधान में बायोस्टैटिस्टिक्स और सर्वाइवल एनालिसिस की उपयोगिता को समझाना और शोधार्थियों को आधुनिक सांख्यिकीय तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था।
इसमें देशभर के मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, पैरामेडिकल और पब्लिक हेल्थ संस्थानों से जुड़े 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला में अध्ययन डिजाइन, सैंपलिंग, सैंपल साइज निर्धारण, एपिडेमियोलॉजिकल स्टडी, मेटा-एनालिसिस, हाइपोथेसिस टेस्टिंग, क्लिनिकल ट्रायल और सर्वाइवल एनालिसिस पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
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साथ ही सॉफ्टवेयर आधारित डेटा विश्लेषण का प्रशिक्षण भी दिया गया। निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने इसे शोध एवं चिकित्सा शिक्षा में नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया, जबकि आयोजन सचिव डॉ. संजय कुमार ने बताया कि प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, डिजिटल सामग्री और 7 क्रेडिट घंटे प्रदान किए जाएंगे।
रोहतक। पीजीआईएमएस रोहतक के मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और साइंस-टेक इंस्टीट्यूट लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बायोस्टैटिस्टिक्स एंड सर्वाइवल एनालिसिस विषय पर सात दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ।
यह कार्यशाला 21 से 27 मई तक वर्चुअल माध्यम से चली। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य अनुसंधान में बायोस्टैटिस्टिक्स और सर्वाइवल एनालिसिस की उपयोगिता को समझाना और शोधार्थियों को आधुनिक सांख्यिकीय तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था।
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इसमें देशभर के मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, पैरामेडिकल और पब्लिक हेल्थ संस्थानों से जुड़े 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला में अध्ययन डिजाइन, सैंपलिंग, सैंपल साइज निर्धारण, एपिडेमियोलॉजिकल स्टडी, मेटा-एनालिसिस, हाइपोथेसिस टेस्टिंग, क्लिनिकल ट्रायल और सर्वाइवल एनालिसिस पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
साथ ही सॉफ्टवेयर आधारित डेटा विश्लेषण का प्रशिक्षण भी दिया गया। निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने इसे शोध एवं चिकित्सा शिक्षा में नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया, जबकि आयोजन सचिव डॉ. संजय कुमार ने बताया कि प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, डिजिटल सामग्री और 7 क्रेडिट घंटे प्रदान किए जाएंगे।