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Sonipat News: लॉ रिव्यू जर्नल के स्टूडेंट्स एडिशन के लिए मांगे शोधपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 12 Mar 2026 07:21 PM IST
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सोनीपत के डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में शोध-पत्र आमंत्रण संबंधी कार्यक्रम म
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने विधिक शोध, अकादमिक लेखन और बौद्धिक विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिए पहल की गई है। विश्वविद्यालय ने लॉ रिव्यू जर्नल के स्टूडेंट्स एडिशन के लिए शोधपत्र आमंत्रित किए हैं।
विश्वविद्यालय में वीरवार को आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जर्नल के उद्देश्य, प्रकाशन प्रक्रिया और विद्यार्थियों की सहभागिता से संबंधित जानकारी दी गई। इस अवसर पर कुलपति प्रो. देवेंद्र सिंह, कुलसचिव प्रो. आशुतोष मिश्रा, डॉ. ज्योति राणा, डॉ. अमित गुलारिया और संपादकीय टीम से जुड़े विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कुलपति ने कहा कि विधिक शोध के माध्यम से न केवल ज्ञान का विस्तार होता है बल्कि समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चिंतन और सार्थक विमर्श को भी बढ़ावा मिलता है। विद्यार्थी इस मंच का उपयोग अपने शोध, विश्लेषण और नवीन विचारों को प्रस्तुत करने के लिए करें।
कुलसचिव प्रो. मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के शोध प्रकाशन विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, आलोचनात्मक सोच तथा विधिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। इनके जरिए विद्यार्थी उभरते हुए कानूनी रुझानों, विकसित होते न्यायशास्त्र और समकालीन विधिक परिवर्तनों से परिचित हो पाते हैं।
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सोनीपत। डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने विधिक शोध, अकादमिक लेखन और बौद्धिक विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिए पहल की गई है। विश्वविद्यालय ने लॉ रिव्यू जर्नल के स्टूडेंट्स एडिशन के लिए शोधपत्र आमंत्रित किए हैं।
विश्वविद्यालय में वीरवार को आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जर्नल के उद्देश्य, प्रकाशन प्रक्रिया और विद्यार्थियों की सहभागिता से संबंधित जानकारी दी गई। इस अवसर पर कुलपति प्रो. देवेंद्र सिंह, कुलसचिव प्रो. आशुतोष मिश्रा, डॉ. ज्योति राणा, डॉ. अमित गुलारिया और संपादकीय टीम से जुड़े विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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कुलपति ने कहा कि विधिक शोध के माध्यम से न केवल ज्ञान का विस्तार होता है बल्कि समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चिंतन और सार्थक विमर्श को भी बढ़ावा मिलता है। विद्यार्थी इस मंच का उपयोग अपने शोध, विश्लेषण और नवीन विचारों को प्रस्तुत करने के लिए करें।
कुलसचिव प्रो. मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के शोध प्रकाशन विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, आलोचनात्मक सोच तथा विधिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। इनके जरिए विद्यार्थी उभरते हुए कानूनी रुझानों, विकसित होते न्यायशास्त्र और समकालीन विधिक परिवर्तनों से परिचित हो पाते हैं।