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Yamuna Nagar News: किसानों को दी फसल की नियमित निगरानी करने की दी सलाह
Thu, 06 Aug 2026 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:41 AM IST
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थाना छप्पर में धान के खेतों का निरीक्षण करतीं कृषि विभाग की टीम। विभाग
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यमुनानगर। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक टीम ने जिले में धान की फसल में कीट और बीमारियों की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसल सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण के दौरान धान की फसल में फिलहाल कीट और रोगों का प्रकोप बेहद कम पाया गया।
यह सर्वेक्षण वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के वनस्पति संरक्षण सलाहकार जेपी सिंह के निर्देशन में हुआ। क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (आरसीआईपीएमसी) फरीदाबाद और जिला कृषि विभाग के अधिकारियों ने इसमें सहयोग किया। उन्होंने संयुक्त रूप से धान की फसल का निरीक्षण किया। टीम ने खेतों में जाकर धान की फसल की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में फसल में किसी बड़े कीट या बीमारी का प्रकोप देखने को नहीं मिला है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई। उन्हें वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण करने के लिए भी कहा गया।
आईपीएम तकनीक अपनाने पर जोर
किसानों को पिछले वर्ष धान में आए ड्वार्फ रोग सहित अन्य संभावित बीमारियों से बचाव के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन (आईपीएम) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने इस तकनीक के महत्व पर जोर दिया। उन्हें बताया गया कि फसल में कीटों की रोकथाम के लिए पहले यांत्रिक और जैविक उपायों को प्राथमिकता दें। आवश्यकता पड़ने पर ही अनुमोदित कीटनाशकों का प्रयोग करें। इससे अनावश्यक रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल को रोका जा सकेगा। साथ ही, उत्पादन लागत भी कम होगी।
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सर्वेक्षण टीम और एनपीएसएस एप की जानकारी
सर्वेक्षण टीम में आरसीआईपीएमसी फरीदाबाद से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी लक्ष्मीकांत और केपी शर्मा शामिल थे। जिला कृषि विभाग से सहायक पौध संरक्षण अधिकारी सतीश कुमार, ब्लॉक कृषि अधिकारी विवेक सिंह और कृषि विकास अधिकारी चरण सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) मोबाइल एप के बारे में भी जानकारी दी। इस एप के माध्यम से किसान अपनी फसल में लगने वाले कीट और बीमारियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह एप किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
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यह सर्वेक्षण वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के वनस्पति संरक्षण सलाहकार जेपी सिंह के निर्देशन में हुआ। क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र (आरसीआईपीएमसी) फरीदाबाद और जिला कृषि विभाग के अधिकारियों ने इसमें सहयोग किया। उन्होंने संयुक्त रूप से धान की फसल का निरीक्षण किया। टीम ने खेतों में जाकर धान की फसल की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में फसल में किसी बड़े कीट या बीमारी का प्रकोप देखने को नहीं मिला है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई। उन्हें वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण करने के लिए भी कहा गया।
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आईपीएम तकनीक अपनाने पर जोर
किसानों को पिछले वर्ष धान में आए ड्वार्फ रोग सहित अन्य संभावित बीमारियों से बचाव के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन (आईपीएम) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने इस तकनीक के महत्व पर जोर दिया। उन्हें बताया गया कि फसल में कीटों की रोकथाम के लिए पहले यांत्रिक और जैविक उपायों को प्राथमिकता दें। आवश्यकता पड़ने पर ही अनुमोदित कीटनाशकों का प्रयोग करें। इससे अनावश्यक रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल को रोका जा सकेगा। साथ ही, उत्पादन लागत भी कम होगी।
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सर्वेक्षण टीम और एनपीएसएस एप की जानकारी
सर्वेक्षण टीम में आरसीआईपीएमसी फरीदाबाद से सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी लक्ष्मीकांत और केपी शर्मा शामिल थे। जिला कृषि विभाग से सहायक पौध संरक्षण अधिकारी सतीश कुमार, ब्लॉक कृषि अधिकारी विवेक सिंह और कृषि विकास अधिकारी चरण सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) मोबाइल एप के बारे में भी जानकारी दी। इस एप के माध्यम से किसान अपनी फसल में लगने वाले कीट और बीमारियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह एप किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।